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15 लाख का इनामी आतंकी आरिज उर्फ जुनैद गिरफ्तार, आजमगढ़ स्थित गांव में छाई खामोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 15 Feb 2018 02:27 PM IST
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गिरफ्तारी के बाद गांव, गली और मुहल्ले में छाई खामोशी
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली पुलिस ने यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले 15 लाख रुपये के इनामी आतंकी आरिज उर्फ जुनैद जुनैद को गिरफ्तार कर लिया है। आरिज को भारत-नेपाल वार्डर से गिरफ्तार करने के बाद यूपी का आजमगढ़ जिला पुन: सुर्खियों में आ गया। इंडियन मुजाहिद्दीन का सक्रिय सदस्य आरिज दिल्ली में हुए बटला एनकाउंटर और लखनऊ सहित अन्य बड़े शहरों में हुए सिलसिलेवार बम धमाका के मामले में फरार था।
उसकी गिरफ्तारी के बाद आजमगढ़ स्थित गांव से लेकर शहर तक उसके सभी परिचितों ने खामोशी अख्तियार कर ली है। बिलरियागंज थाने की पुलिस उसके घर पहुंची। उसके पैतृक आवास में ताला बंद मिला। ऐसे में पुलिस ने पड़ोसी से बातचीत कर उसका डाटा तैयार किया। नसीरपुर गांव निवासी 15 लाख रुपये के इनामी आरिज के विषय में सब आपस में तो चर्चा कर रहे हैं, पर पूछने पर कोई बोलने को तैयार नहीं है।
आरिज के पिता जफरे आलम की वर्ष 2009 में मौत हो गई। नसीरपुर गांव सहित आसपास के क्षेत्र में आरिज का परिवार सम्मानित परिवार रहा है। उसके एक चाचा बदरे आलम आईएएस रह चुके हैं। जबकि दूसरे चाचा डा. फकरे आलम परिवार सहित आजमगढ़ के बाजबहादुर कोट किला मुहल्ले में रहते हैं और गांव में अपनी डिस्पेंसरी चलाते हैं। इन्हीं की डिस्पेंसरी पर आरिज का छोटा भाई साबिज रहकर काम करता है।
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जबकि उसका दूसरे नंबर का भाई शारिक दिल्ली में रहकर प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। तीन भाईयों में सबसे बड़ा आरिज इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान वह अपने कुछ मित्रों के साथ देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो गया। हालांकि उसके नाम का खुलासा सितंबर 2008 में दिल्ली में हुए बटला एनकाउंटर की घटना के बाद हुई जांच में उजागर हुआ।
दिल्ली पुलिस का दावा है कि आरिज इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा सहित अन्य पुलिसवालों पर फायर कर फरार हो गया था। आरिज का नाम उजागर होने पर दिल्ली पुलिस समेत देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुट गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। गिरफ्तारी न होने पर एनआईए और दिल्ली पुलिस की तरफ से उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
वहीं आरिज की गिरफ्तारी के विषय में उसके नाते रिश्तेदारों तक को जानकारी हो गई थी, लेकिन कोई इस विषय में बोलने को तैयार नहीं हुआ। नसीरपुर गांव के प्रधानपति अबू सालिब ने बताया कि आरिज का परिवार सम्मानित रहा है। इन लोगों पर थाने में एक भी मुकदमा नहीं दर्ज है। ऐसे में आरिज के ऊपर कहां से इतना बड़ा इल्जाम लग गया। यह समझ में नहीं आ रहा।
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उसकी गिरफ्तारी के बाद आजमगढ़ स्थित गांव से लेकर शहर तक उसके सभी परिचितों ने खामोशी अख्तियार कर ली है। बिलरियागंज थाने की पुलिस उसके घर पहुंची। उसके पैतृक आवास में ताला बंद मिला। ऐसे में पुलिस ने पड़ोसी से बातचीत कर उसका डाटा तैयार किया। नसीरपुर गांव निवासी 15 लाख रुपये के इनामी आरिज के विषय में सब आपस में तो चर्चा कर रहे हैं, पर पूछने पर कोई बोलने को तैयार नहीं है।
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आरिज के पिता जफरे आलम की वर्ष 2009 में मौत हो गई। नसीरपुर गांव सहित आसपास के क्षेत्र में आरिज का परिवार सम्मानित परिवार रहा है। उसके एक चाचा बदरे आलम आईएएस रह चुके हैं। जबकि दूसरे चाचा डा. फकरे आलम परिवार सहित आजमगढ़ के बाजबहादुर कोट किला मुहल्ले में रहते हैं और गांव में अपनी डिस्पेंसरी चलाते हैं। इन्हीं की डिस्पेंसरी पर आरिज का छोटा भाई साबिज रहकर काम करता है।
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जबकि उसका दूसरे नंबर का भाई शारिक दिल्ली में रहकर प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। तीन भाईयों में सबसे बड़ा आरिज इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। इसी दौरान वह अपने कुछ मित्रों के साथ देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो गया। हालांकि उसके नाम का खुलासा सितंबर 2008 में दिल्ली में हुए बटला एनकाउंटर की घटना के बाद हुई जांच में उजागर हुआ।
दिल्ली पुलिस का दावा है कि आरिज इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा सहित अन्य पुलिसवालों पर फायर कर फरार हो गया था। आरिज का नाम उजागर होने पर दिल्ली पुलिस समेत देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियां उसकी तलाश में जुट गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। गिरफ्तारी न होने पर एनआईए और दिल्ली पुलिस की तरफ से उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
वहीं आरिज की गिरफ्तारी के विषय में उसके नाते रिश्तेदारों तक को जानकारी हो गई थी, लेकिन कोई इस विषय में बोलने को तैयार नहीं हुआ। नसीरपुर गांव के प्रधानपति अबू सालिब ने बताया कि आरिज का परिवार सम्मानित रहा है। इन लोगों पर थाने में एक भी मुकदमा नहीं दर्ज है। ऐसे में आरिज के ऊपर कहां से इतना बड़ा इल्जाम लग गया। यह समझ में नहीं आ रहा।
आतंकी के घर पहुंची पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
आरिज की गिरफ्तारी के बाद बुधवार को बिलरियागंज थाने की पुलिस उसके घर पहुंची। उसके पैतृक आवास में ताला बंद मिला। ऐसे में पुलिस ने पड़ोसी से बातचीत कर उसका डाटा तैयार किया। एसओ बिलरियागंज विजय प्रताप यादव ने बताया कि नसीरपुर गांव निवासी आरिज उर्फ जुनैद के पीछे भले ही देश की तमाम खुफिया एजेंसियां लगी हुई थी।
लेकिन स्थानीय पुलिस द्वारा गतिविधियों पर कोई नजर नहीं रखी जा रही थी। बुधवार को जैसे ही आरिज के दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा भारत-नेपाल बार्डर से गिरफ्तार होने की सूचना मिली कि तुरंत बिलरियागंज थाने की पुलिस नसीरपुर गांव पहुंची और उसके परिवार का डाटा सहित अन्य जानकारी उसके पड़ोसियों से लेकर वापस लौट गई।
बटला एनकाउंटर के बाद सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव के कई लड़कों का नाम सामने आने पर पुलिस ने इन पर सख्ती बरतते हुए सितंबर 2017 में छह फरार संदिग्धों की हिस्ट्रीशीट खोल दी थी। जबकि शहर कोतवाली क्षेत्र के बाजबहादुर मुहल्ला निवासी दो अन्य फरार संदिग्धों की हिस्ट्री खोलना तो दूर इन दोनों के विषय में पुलिस को भनक तक नहीं लग सकी थी।
बता दें कि देश में किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश रचने के आरोप में यूपी एटीएस की टीम ने गंभीरपुर थाना क्षेत्र के छाऊ गांव निवासी अबुजैद को दुबई से भारत लौटते समय पांच नवंबर 2017 को मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। अबुजैद से पूछताछ और खुफिया विभाग से मिले इनपुट के आधार पर सितंबर 2017 में एसपी ने फरार छह संदिग्धों की हिस्ट्रीशीट खुलवा दी।
जिनकी हिस्ट्रीशीट खोली गई है उन पर 10-10 लाख रुपये के इनाम घोषित हैं। सभी सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव के निवासी हैं। यह सभी फरार चल रहे हैं।
पुलिस ने संजरपुर गांव निवासी छह संदिग्धों की हिस्ट्रीशीट तो खोल दी। लेकिन इनके साथी शहर कोतवाली क्षेत्र के बाजबहादुर मुहल्ला निवासी फरार मिर्जा शादाब बेग, और आरिज उर्फ जुनैद की ना तो हिस्ट्रीशीट खोली जा सकी। ना ही पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के लिए स्थानीय स्तर पर ही कोई प्रयास किया।
लेकिन स्थानीय पुलिस द्वारा गतिविधियों पर कोई नजर नहीं रखी जा रही थी। बुधवार को जैसे ही आरिज के दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा भारत-नेपाल बार्डर से गिरफ्तार होने की सूचना मिली कि तुरंत बिलरियागंज थाने की पुलिस नसीरपुर गांव पहुंची और उसके परिवार का डाटा सहित अन्य जानकारी उसके पड़ोसियों से लेकर वापस लौट गई।
बटला एनकाउंटर के बाद सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव के कई लड़कों का नाम सामने आने पर पुलिस ने इन पर सख्ती बरतते हुए सितंबर 2017 में छह फरार संदिग्धों की हिस्ट्रीशीट खोल दी थी। जबकि शहर कोतवाली क्षेत्र के बाजबहादुर मुहल्ला निवासी दो अन्य फरार संदिग्धों की हिस्ट्री खोलना तो दूर इन दोनों के विषय में पुलिस को भनक तक नहीं लग सकी थी।
बता दें कि देश में किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की साजिश रचने के आरोप में यूपी एटीएस की टीम ने गंभीरपुर थाना क्षेत्र के छाऊ गांव निवासी अबुजैद को दुबई से भारत लौटते समय पांच नवंबर 2017 को मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। अबुजैद से पूछताछ और खुफिया विभाग से मिले इनपुट के आधार पर सितंबर 2017 में एसपी ने फरार छह संदिग्धों की हिस्ट्रीशीट खुलवा दी।
जिनकी हिस्ट्रीशीट खोली गई है उन पर 10-10 लाख रुपये के इनाम घोषित हैं। सभी सरायमीर थाना क्षेत्र के संजरपुर गांव के निवासी हैं। यह सभी फरार चल रहे हैं।
पुलिस ने संजरपुर गांव निवासी छह संदिग्धों की हिस्ट्रीशीट तो खोल दी। लेकिन इनके साथी शहर कोतवाली क्षेत्र के बाजबहादुर मुहल्ला निवासी फरार मिर्जा शादाब बेग, और आरिज उर्फ जुनैद की ना तो हिस्ट्रीशीट खोली जा सकी। ना ही पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के लिए स्थानीय स्तर पर ही कोई प्रयास किया।
पिता-चाचा की मौत में भी नहीं आया था घर
ariz khan
- फोटो : अमर उजाला
इंडियन मुजाहिद्दीन के सक्रिय आतंकी आरिज उर्फ जुनैद के परिवार का खर्च उसके चाचा डा. फकरे आलम ही चलाते हैं। उसके चाचा ने कहा कि बटला एनकाउंटर के बाद से ही आरिज ना तो अपने पिता-चाचा की मौत पर घर आया, ना ही किसी शादी समारोह में उसने भाग लिया। देश विरोधी गतिविधियों में आरिज की संलिप्तता के बाद से ही परिवार के लोगों ने आरिज से नाता तोड़ लिया था।
आरिज उर्फ जुनैद की गिरफ्तारी के विषय में उसके चाचा डा. फकरे आलम ने कहा कि वर्ष 2008 के बाद से आरिज कभी भी घर नहीं आया, ना ही परिवार के लोग उससे कोई रिश्ता ही रखना चाहते हैं। आरिज की बूढ़ी मां तबस्सुम अपने छोटे बेटे साबिज, जो अपने चाचा की डिस्पेंसरी पर रहता है उसके साथ शहर के जालंधरी मुहल्ले में कमरा लेकर रहती हैं।
डा. फकरे आलम ने बताया कि उनके परिवार का क्षेत्र में कभी अच्छाखासा नाम रहा है, लेकिन आरिज का नाम देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के बाद से पूरी मर्यादा मिट्टी में मिल गई।
आरिज उर्फ जुनैद की गिरफ्तारी के विषय में उसके चाचा डा. फकरे आलम ने कहा कि वर्ष 2008 के बाद से आरिज कभी भी घर नहीं आया, ना ही परिवार के लोग उससे कोई रिश्ता ही रखना चाहते हैं। आरिज की बूढ़ी मां तबस्सुम अपने छोटे बेटे साबिज, जो अपने चाचा की डिस्पेंसरी पर रहता है उसके साथ शहर के जालंधरी मुहल्ले में कमरा लेकर रहती हैं।
डा. फकरे आलम ने बताया कि उनके परिवार का क्षेत्र में कभी अच्छाखासा नाम रहा है, लेकिन आरिज का नाम देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के बाद से पूरी मर्यादा मिट्टी में मिल गई।