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Varanasi News: श्रीरामजानकी की निकली बरात, संकटमोचन मंदिर में गूंजी चौपाई
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वाराणसी। अगहन मास शुक्ल पक्ष की पंचमी पर रविवार को श्रीसीताराम विवाह पंचमी श्रद्धा और उल्लास से मनाई गई। घर से लेकर मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया। व्रतियों ने रामजानकी विवाह की झांकी सजाई। उधर, संकटमोचन मंदिर में नौ दिनों तक चलने वाले अनुष्ठान की शुरुआत मानस नवाह्न पाठ और मानस कथा से हुई। रामजानकी मठ अस्सी में बरात निकालकर विधिवत सीताराम विवाह की रस्में निभाई गईं।
संकट मोचन मंदिर में सुबह मानस नवाह्न पाठ शुरू हुआ। मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने मानस पोथी, आचार्य और वैदिक ब्राह्मणों का पूजन किया। व्यास राघवेंद्र पांडेय के आचार्यत्व में 118 ब्राह्मणों ने मानस के दोहों व चौपाइयों के जरिये भगवान श्रीराम व सीता विवाह का सुंदर वर्णन किया। मंदिर परिसर मानस की दोहे और चौपाइयों से गूंजता रहा। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि मानस को जीवन में उतारने से मानव का कल्याण होगा। मानस पाठ के यजमान प्रेमचंद मेहरा ने महंत जी का माल्यार्पण कर स्वागत किया। शाम को दूर-दाराज से आए मानस मर्मज्ञों ने कथारस से विभोर किया।
वहीं, रामजानकी मठ में चल रही तीन दिवसीय श्रीसीताराम विवाह पंचमी महोत्सव के दूसरे दिन महंत राजकुमार दास के नेतृत्व में गाजेबाजे के साथ भव्य प्रभु श्रीराम की बरात शोभायात्रा निकाली गई। सुसज्जित रथ, पालकी व घोड़े पर भगवान राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के स्वरूप विराजमान थे। भक्त मंगलगीत व स्तुति गान करते चल रहे थे। बरात की अगवानी व स्वागत सत्यनारायण झुनझुनवाला किया। पूजा आदर्श सरावगी और पूर्णिमा पुरुषोत्तम पारोलिया ने की। द्वारचार के बाद मठ में श्रीरामजानकी विवाह शुरू हुआ। जयमाल, लावा परक्षन, मां जानकी का कन्यादान आदि रस्में निभाई गईं। मठ के प्रभारी रामलोचन दास ने बताया कि सोमवार को राम कलेवा का आयोजन होगा। शोभायात्रा में महंत संतोष दास, सचिन शर्मा, सर्वेश्वर शरण, शियाबल्लभ, श्रवण दास, संत बालकदास आदि रहे। कश्मीरीगंज, राजादरवाजा, तेलियाना आदि इलाकों में स्थित श्रीरामजानकी मंदिरों के अलावा मठों में भी पूजन अर्चन व विवाह की रस्म निभाई गई।
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संकट मोचन मंदिर में सुबह मानस नवाह्न पाठ शुरू हुआ। मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने मानस पोथी, आचार्य और वैदिक ब्राह्मणों का पूजन किया। व्यास राघवेंद्र पांडेय के आचार्यत्व में 118 ब्राह्मणों ने मानस के दोहों व चौपाइयों के जरिये भगवान श्रीराम व सीता विवाह का सुंदर वर्णन किया। मंदिर परिसर मानस की दोहे और चौपाइयों से गूंजता रहा। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि मानस को जीवन में उतारने से मानव का कल्याण होगा। मानस पाठ के यजमान प्रेमचंद मेहरा ने महंत जी का माल्यार्पण कर स्वागत किया। शाम को दूर-दाराज से आए मानस मर्मज्ञों ने कथारस से विभोर किया।
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वहीं, रामजानकी मठ में चल रही तीन दिवसीय श्रीसीताराम विवाह पंचमी महोत्सव के दूसरे दिन महंत राजकुमार दास के नेतृत्व में गाजेबाजे के साथ भव्य प्रभु श्रीराम की बरात शोभायात्रा निकाली गई। सुसज्जित रथ, पालकी व घोड़े पर भगवान राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न के स्वरूप विराजमान थे। भक्त मंगलगीत व स्तुति गान करते चल रहे थे। बरात की अगवानी व स्वागत सत्यनारायण झुनझुनवाला किया। पूजा आदर्श सरावगी और पूर्णिमा पुरुषोत्तम पारोलिया ने की। द्वारचार के बाद मठ में श्रीरामजानकी विवाह शुरू हुआ। जयमाल, लावा परक्षन, मां जानकी का कन्यादान आदि रस्में निभाई गईं। मठ के प्रभारी रामलोचन दास ने बताया कि सोमवार को राम कलेवा का आयोजन होगा। शोभायात्रा में महंत संतोष दास, सचिन शर्मा, सर्वेश्वर शरण, शियाबल्लभ, श्रवण दास, संत बालकदास आदि रहे। कश्मीरीगंज, राजादरवाजा, तेलियाना आदि इलाकों में स्थित श्रीरामजानकी मंदिरों के अलावा मठों में भी पूजन अर्चन व विवाह की रस्म निभाई गई।
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