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जीवन में योग से बढ़कर है वियोग : बाल व्यास
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 30 Jul 2016 02:13 AM IST
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Shrimad Bhagwat Katha in Kashi
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दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन भागवत कथा मर्मज्ञ पं. श्रीकांत शर्मा बाल व्यास ने उद्धव -गोपी संवाद पर विस्तार से रोशनी डाली। कहा कि योग से वियोग कम नहीं होता है। योग और वियोग दोनों एक ही स्तर के हैं। योगी रंगीन हो जाता है, जबकि वियोगी का मन रंग जाता है। योगी तन में भस्म लगाता है वियोगी का सब कुछ भस्म हो जाता है।
बाल व्यास ने कहा कि प्रभु श्रीकृष्ण गोपियों की परीक्षा के लिए उद्धव को ज्ञान देने के लिए भेजते हैं, किंतु खुद उद्धव गोपियों से ज्ञान लेकर लौट जाते हैं। ज्ञान हमेशा हार जाता है, प्रेम जीत जाता है। रुक्मिणी विवाह की चर्चा करते हुए बाल व्यास ने कहा कि भगवान भक्त को कभी निराश नहीं करते, किंतु उसके प्रेम में समर्पण होना चाहिए। रुक्मिणी की भी भगवान ने इच्छाएं पूर्ण कीं। शाम को कथा मंडप में रुक्मिणी की झांकी का दर्शन कर भक्त भाव विभोर हो उठे।
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बाल व्यास ने कहा कि प्रभु श्रीकृष्ण गोपियों की परीक्षा के लिए उद्धव को ज्ञान देने के लिए भेजते हैं, किंतु खुद उद्धव गोपियों से ज्ञान लेकर लौट जाते हैं। ज्ञान हमेशा हार जाता है, प्रेम जीत जाता है। रुक्मिणी विवाह की चर्चा करते हुए बाल व्यास ने कहा कि भगवान भक्त को कभी निराश नहीं करते, किंतु उसके प्रेम में समर्पण होना चाहिए। रुक्मिणी की भी भगवान ने इच्छाएं पूर्ण कीं। शाम को कथा मंडप में रुक्मिणी की झांकी का दर्शन कर भक्त भाव विभोर हो उठे।
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