वाराणसी: बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में एसएसपी सख्त, लापरवाही करने पर दरोगा और थानेदार निलंबित
वाराणसी के सारनाथ क्षेत्र में बच्चे का अपहरण कर 50 हजार की फिरौती मांगने और फिर उसकी हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही पर एसएसपी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने सारनाथ थाना प्रभारी इन्द्रभूषण यादव और दरोगा संजय कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय जांच का आदेश दिया गया है।
एसएसपी अमित पाठक ने मंगलवार को बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद भी बच्चे की तलाश के लिए ठोस प्रयास न करने, प्रकरण से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत न कराने और पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही बरतने के आरोप में दोनों पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।
ये है मामला
पुलिस के अनुसार, सारनाथ थाना क्षेत्र के पंचक्रोशी पैगंबरपुर निवासी मंजय कुमार वैवाहिक कार्यक्रमों में स्टेज की सजावट काम करता है। मंजय का इकलौता बेटा और कक्षा चार में पढ़ने वाला विशाल(9) 29 जनवरी को क्षेत्र में ही हाथी देखने निकला था। इसके बाद उसका पता नहीं लगा। खोजबीन के बाद मंजय ने सारनाथ थाने में सूचना दी तो गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई।
30 जनवरी को मंजय के घर के सामने एक कागज फेंका पड़ा मिला। कागज में लिखा था कि 50 हजार रुपये चौबेपुर लेकर आओ, वरना विशाल को मार दिया जाएगा। मंजय परिजनों के साथ चौबेपुर गया लेकिन घंटों के इंतजार के बाद भी उसके पास कोई नहीं आया। सोमवार की दोपहर मंजय के घर से लगभग 500 मीटर दूर बच्चे फूलों के खेत में खेल रहे थे। उसी दौरान एक बच्चे ने विशाल का शव देखा तो शोर मचाते हुए घर जाकर अपनी मां को बताया और देखते ही देखते लोगों की भीड़ जुट गई। एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि वारदात से जुड़े सभी बिंदुओं को खंगाला जा रहा है। खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच सहित पुलिस की तीन टीमें गठित की गई हैं।
पुलिस दिखाती तत्परता तो शायद जिंदा होता बच्चा
29 जनवरी से गायब विशाल का शव सोमवार को पंचक्रोशी पैगंबरपुर स्थित उसके घर के समीप फूलों के खेत में मिला तो परिजनों ने सारनाथ थाने की पुलिस को जमकर खरीखोटी सुनाई। सभी का कहना था कि यदि पुलिस तत्परता दिखाती तो शायद बच्चा बच जाता। वहीं, एसएसपी ने सारनाथ थाना प्रभारी और पुरानापुल चौकी प्रभारी को जमकर फटकारा और पूछा कि ऐसी लापरवाही क्यों की...? एसएसपी ने दोनों को कार्रवाई की चेतावनी दी है।
विशाल के पिता मंजय और परिजनों का कहना था कि 29 जनवरी को जब बच्चा गायब हुआ तो पुलिस ने सूचना को बहुत हल्के में लिया। 30 जनवरी को जब 50 हजार रुपये वाला कागज घर के सामने मिला तो पुलिस को फिर सूचना दी गई। तब जाकर पुलिस ने सीसी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया। इसके बावजूद क्राइम ब्रांच जैसी एजेंसी की मदद लेकर बच्चे को खोजने का प्रयास गंभीरता के साथ नहीं किया गया। पुलिस की लापरवाही और लचर कार्यशैली बच्चे की जिंदगी और भारी पड़ गई। स्थानीय लोगों का कहना था कि इस प्रकरण में शुरू से ही लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।