{"_id":"606b685c8ebc3ed913223280","slug":"shitala-maata-pujan-in-varanasi-varanasi-news-vns583567837","type":"story","status":"publish","title_hn":"घर-घर पूजी गईं मां शीतला, मंदिर में पहुंचे भक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घर-घर पूजी गईं मां शीतला, मंदिर में पहुंचे भक्त
विज्ञापन
महामारी का शमन करने वाली माता शीतला घर-घर पूजी गईं। घरों के बाहर और चौराहों पर माता को भोग अर्पित कर शीतलाष्टमी का व्रत-पूजन संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने माता को बसिअऊरा का भोग लगाकर महामारी का शमन करने की प्रार्थना की। दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला मंदिर तथा शहर के शीतला मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने दर्शन-पूजन किया।
सोमवार की भोर से ही घरों में शीतलाष्टमी के अनुष्ठान आरंभ हो गए। रसोईघर की दीवार पर पांचों अंगुली घी में डुबोकर छापा लगाया गया और उस पर रोली, चावल चढ़ाकर पूजन शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने रविवार की रात में तैयार किया गया बसिअऊरा का भोग माता को लगाया। भोग में मेवा, मिठाई, पूआ, गुलगुला, दाल, चावल, पूड़ी, सब्जी अर्पित करने के बाद प्रसाद स्वरूप परिवार व रिश्तेदारों में वितरित किया गया।
कहीं माता के गीत गूंज रहे थे तो कहीं घरों में माता की आरती। महिलाओं ने मेरी माता को चिनिये चौबारो, दूधपूत को चिनिये चौबारो, कौन ने मैया ईंट थपाई और कौन ने घोरो है गारो। श्रीकृष्ण ने मैया ईंट थपाई, दाऊजी घोरौ हैं गारौ... गाकर माता से पूरे परिवार को महामारी और संकटों से दूर रखने की कामना की। शीतला अष्टमी पर कोरोना काल के बाद भक्तों ने दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला माता के दर्शन किए। कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया गया। मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय ने माता की महाआरती उतारी।
विज्ञापन
स्वच्छता का संदेश देती हैं माता शीतला
नमामि गंगे की ओर से सोमवार को शीतलाष्टमी पर माता शीतला की आरती उतारी गई। दशाश्वमेध स्थित माता शीतला की आरती के बाद लोगों को जागरूक भी किया गया। संयोजक राजेश शुक्ला ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि शीतलाष्टमी का पर्व हमें स्वच्छता की सीख देता है।
बड़ी शीतला मंदिर में हुआ शृंगार
चैत्र शुक्ल पक्ष की शीतला अष्टमी पर सोमवार को दुर्गाकुंड स्थित बड़ी शीतला माता का शृंगार किया गया। मंदिर के महंत सुमेश चौबे ने भोर में आरती उतारी। इसके बाद मंदिर के पट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए। माता का शृंगार कर उनको भोग लगाया गया। इस दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में मारवाड़ी समाज की महिलाएं दर्शन पूजन करने के लिए घर से तरह-तरह का पकवान बनाकर भोग लगाने के लिए पहुंची।
विज्ञापन
सोमवार की भोर से ही घरों में शीतलाष्टमी के अनुष्ठान आरंभ हो गए। रसोईघर की दीवार पर पांचों अंगुली घी में डुबोकर छापा लगाया गया और उस पर रोली, चावल चढ़ाकर पूजन शुरू हुआ। श्रद्धालुओं ने रविवार की रात में तैयार किया गया बसिअऊरा का भोग माता को लगाया। भोग में मेवा, मिठाई, पूआ, गुलगुला, दाल, चावल, पूड़ी, सब्जी अर्पित करने के बाद प्रसाद स्वरूप परिवार व रिश्तेदारों में वितरित किया गया।
विज्ञापन
कहीं माता के गीत गूंज रहे थे तो कहीं घरों में माता की आरती। महिलाओं ने मेरी माता को चिनिये चौबारो, दूधपूत को चिनिये चौबारो, कौन ने मैया ईंट थपाई और कौन ने घोरो है गारो। श्रीकृष्ण ने मैया ईंट थपाई, दाऊजी घोरौ हैं गारौ... गाकर माता से पूरे परिवार को महामारी और संकटों से दूर रखने की कामना की। शीतला अष्टमी पर कोरोना काल के बाद भक्तों ने दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला माता के दर्शन किए। कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया गया। मंदिर के महंत पं. शिव प्रसाद पांडेय ने माता की महाआरती उतारी।
विज्ञापन
स्वच्छता का संदेश देती हैं माता शीतला
नमामि गंगे की ओर से सोमवार को शीतलाष्टमी पर माता शीतला की आरती उतारी गई। दशाश्वमेध स्थित माता शीतला की आरती के बाद लोगों को जागरूक भी किया गया। संयोजक राजेश शुक्ला ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि शीतलाष्टमी का पर्व हमें स्वच्छता की सीख देता है।
बड़ी शीतला मंदिर में हुआ शृंगार
चैत्र शुक्ल पक्ष की शीतला अष्टमी पर सोमवार को दुर्गाकुंड स्थित बड़ी शीतला माता का शृंगार किया गया। मंदिर के महंत सुमेश चौबे ने भोर में आरती उतारी। इसके बाद मंदिर के पट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए गए। माता का शृंगार कर उनको भोग लगाया गया। इस दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में मारवाड़ी समाज की महिलाएं दर्शन पूजन करने के लिए घर से तरह-तरह का पकवान बनाकर भोग लगाने के लिए पहुंची।