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प्रधानमंत्री के संसदीय कार्यालय के समीप पहुंचे यूपी के शिक्षामित्र, जोरदार प्रदर्शन
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 27 Jul 2017 11:40 PM IST
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पीएम संसदीय कार्यालय के पास प्रदर्शन करते शिक्षामित्र
- फोटो : अमर उजाला
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शिक्षक पद पर बहाली की मांग को लेकर बुधवार को वाराणसी और मिर्जापुर मंडल के शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन किया। कीनाराम आश्रम से रवींद्रपुरी स्थित पीएम के संसदीय कार्यालय पर प्रदर्शन करने जा रहे शिक्षामित्रों को पुलिस ने आचार्य रामचंद्र शुक्ल चौराहे पर रोक दिया।
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यहीं पर शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में महिला शिक्षामित्र भी शामिल रहीं। सुबह दस बजे से लेकर शाम 3:30 बजे तक चले इस प्रदर्शन के चलते रवींद्रपुरी-लंका मार्ग साढ़े पांच घंटे पूरी तरह से बंद रहा।
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आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम सिटी और संसदीय कार्यालय पर देने के बाद प्रदर्शन समाप्त किया। प्रदर्शन को नेतृत्व कर रहे एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र दूबे ने कहा कि जिस प्रकार तमिलनाडु में जलीकट्टू के मामले में सरकार ने किया है। उसी प्रकार उनकी बहाली के मामले में किया जाए।
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संसद से अध्यादेश पारित कर कानून बनाएं। इससे 1,72,000 शिक्षामित्रों का भविष्य बच सकेगा। याद दिलाया कि अपने संसदीय क्षेत्र में 18 सितंबर 2015 को डीरेका में मंच से पीएम ने कहा था कि शिक्षामित्रों के साथ अन्याय नहीं होगा। यहां तक की उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा के घोषणा पत्र में भी शिक्षामित्रों के भविष्य को सुरक्षित करने का वायदा किया था।
जिला प्रशासन को भारी संख्या में शिक्षामित्रों के संसदीय कार्यालय पर पहुंचने की खबर रही। इसी कारण से विजया तिराहे से लंका तक का इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया। आईपी विजया से कीनाराम जाने वाले रास्ते को पुलिस ने एहतियातन बंद कर दिया था। पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने जगह-जगह शिक्षामित्रों को रोक दिया।
दूसरे जिलों से आने वाले शिक्षामित्रों को जिले की सीमा पर रोका गया। बावजूद इसके सैकड़ों की संख्या में शिक्षामित्र कीनाराम आश्रम पहुंच गए। यहां से जुलूस की शक्ल में पीएम के संसदीय कार्यालय की ओर शिक्षामित्र कूच कर गए। इस दौरान जमकर शासन प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
पुलिस प्रशासन ने सभी शिक्षामित्रों को आचार्य रामचंद्र शुक्ल चौराहे के आगे बढ़ने नहीं दिया। चारों तरफ से पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रखी थी। बैरिकेडिंग के आगे जैकेट, हेलमेट, आंसू का गोला, वाटर कैनन, एंबुलेंस, रस्सी आदि के साथ सुरक्षाबलों के जवान खड़े हो गए।
किसी को आगे जाने नहीं दिया। इसके बाद शिक्षामित्र यही बैठ गए। मौके पर पहुंचे एडीएम सिटी जेएम सिंह, एपी सिटी दिनेश कुमार सिंह पहुंचे। उन्होंने ज्ञापन लिया। बावजूद इसके प्रदर्शन समाप्त नहीं हुआ।
एक घंटे बाद पुन: आला अधिकारियों से वार्ता के बाद पांच सदस्य पीएम के संसदीय कार्यालय पहुंचे। यहां के प्रभारी शिवशरण पाठक को मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शन समाप्त किया।
उमसभरी गरमी में कई महिला शिक्षामित्र हुई बेहोश
उमसभरी गरमी में कई महिला शिक्षामित्र हुई बेहोश
- फोटो : अमर उजाला
प्रदर्शन के दौरान उमसभरी गरमी में सड़कों पर बैठी कुछ महिला शिक्षामित्र बेहोश हो गई। उन्हें साथियों ने पानी का छींटा मारकर किनारे पेड़ की छांव में बैठा दिया। इस स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल जलकल से पानी की एक टैंकर मंगवाकर समीप खड़ा करवा दिया।
जिससे शिक्षामित्रों की प्यास बुझी। प्रदर्शन के दौरान कुछ वाहन चालक दूसरे रास्तों से रवींद्रपुरी मार्ग पर आ गए। राहगीर और वाहन चालक जब प्रदर्शन कारियों के बगल से जाने का प्रयास करते तो शिक्षामित्र हो हल्ला करके उन्हें रोक देते। इस दौरान उनके कहासुनी ़और मारपीट तक हो गई। पुलिस ने समझा बुझाकर मामला शांत कराया।
संसदीय कार्यालय नहीं पहुंच सके फरियादी
प्रदर्शन और पुलिस की नाकेबंदी के चलते कई फरियादी पीएम के संसदीय कार्यालय नहीं पहुंच सके। उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। कई फरियादी दूर दराज गांव से आए थे। काफी देर तक बैठे रहे कि रास्ता खुले तो कार्यालय जाकर शिकायती पत्र दे सके लेकिन तब तक शाम हो गई और कई वापस लौट गए।
जिससे शिक्षामित्रों की प्यास बुझी। प्रदर्शन के दौरान कुछ वाहन चालक दूसरे रास्तों से रवींद्रपुरी मार्ग पर आ गए। राहगीर और वाहन चालक जब प्रदर्शन कारियों के बगल से जाने का प्रयास करते तो शिक्षामित्र हो हल्ला करके उन्हें रोक देते। इस दौरान उनके कहासुनी ़और मारपीट तक हो गई। पुलिस ने समझा बुझाकर मामला शांत कराया।
संसदीय कार्यालय नहीं पहुंच सके फरियादी
प्रदर्शन और पुलिस की नाकेबंदी के चलते कई फरियादी पीएम के संसदीय कार्यालय नहीं पहुंच सके। उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। कई फरियादी दूर दराज गांव से आए थे। काफी देर तक बैठे रहे कि रास्ता खुले तो कार्यालय जाकर शिकायती पत्र दे सके लेकिन तब तक शाम हो गई और कई वापस लौट गए।
शिक्षामित्रों के आंदोलन से शिक्षा व्यवस्था चरमराई
चार स्कूलों पर लटके ताले, आठ हुए एकल
- फोटो : अमर उजाला
समायोजन रद्द होने के बाद शिक्षामित्रों के आंदोलन से शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। बड़ागांव ब्लॉक के चार प्राथमिक विद्यालयों में ताले लटक गए हैं तो आठ स्कूल एकल हो गए हैं।
इस स्थिति से निबटने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए से इन स्कूलों में दूसरे विद्यालयों से शिक्षकों की तैनाती की अनुमति मांगी है।
उच्चतम न्यायालय के समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद से शिक्षामित्रों ने स्कूलों में अध्यापन की बजाय आंदोलन की राह पकड़ ली है।
ऐसे में जिन स्कूलों में सिर्फ शिक्षामित्र से समायोजित किए गए शिक्षकों की तैनाती थी, वे इस समय अध्यापक विहीन हो गए हैं। इसके चलते नोनियापुर, सिसवा, अनेई और कूड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालयों में गुरुवार को ताले ही नहीं खुले।
वहीं, रतनपुर, अनेई द्वितीय, रायपुर, हसनपुर बलरामपुर, साईंपुर, सियरहां और बिरांव के प्राथमिक विद्यालय केवल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इस स्थित को देखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी रमाकांत सिंह पटेल ने न्याय पंचायत प्रभारियों की आपात बैठक बुलाकर विचार-विमर्श किया।
साथ ही बीएसए से इन स्कूलों में दूसरे विद्यालयों के शिक्षकों को तैनात करने की अनुमति मांगी है। बीईओ ने बताया कि एक-दो दिन में शिक्षकों की व्यवस्था कर सभी स्कूलों में शिक्षक कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
इस स्थिति से निबटने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए से इन स्कूलों में दूसरे विद्यालयों से शिक्षकों की तैनाती की अनुमति मांगी है।
उच्चतम न्यायालय के समायोजन रद्द करने के फैसले के बाद से शिक्षामित्रों ने स्कूलों में अध्यापन की बजाय आंदोलन की राह पकड़ ली है।
ऐसे में जिन स्कूलों में सिर्फ शिक्षामित्र से समायोजित किए गए शिक्षकों की तैनाती थी, वे इस समय अध्यापक विहीन हो गए हैं। इसके चलते नोनियापुर, सिसवा, अनेई और कूड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालयों में गुरुवार को ताले ही नहीं खुले।
वहीं, रतनपुर, अनेई द्वितीय, रायपुर, हसनपुर बलरामपुर, साईंपुर, सियरहां और बिरांव के प्राथमिक विद्यालय केवल एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। इस स्थित को देखते हुए खंड शिक्षा अधिकारी रमाकांत सिंह पटेल ने न्याय पंचायत प्रभारियों की आपात बैठक बुलाकर विचार-विमर्श किया।
साथ ही बीएसए से इन स्कूलों में दूसरे विद्यालयों के शिक्षकों को तैनात करने की अनुमति मांगी है। बीईओ ने बताया कि एक-दो दिन में शिक्षकों की व्यवस्था कर सभी स्कूलों में शिक्षक कार्य शुरू करा दिया जाएगा।