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Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों से होगी अमृत वर्षा, यहां जानें- मान्यता और महत्व
Sun, 05 Oct 2025 09:47 AM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Sun, 05 Oct 2025 09:47 AM IST
सार
Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा छह अक्तूबर को है। वहीं स्नान और दान सात अक्तूबर को होगा। इस दौरान चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होगी।
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शरद पूर्णिमा 2025
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की किरणों से अमृत की बरसात होगी। षोडश कलायुक्त चंद्रमा से निकलने वाली किरणें रोक और शोक को हरने वाली हैं। छह अक्तूबर को रात्रि में मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाएगी। सात अक्तूबर से कार्तिक स्नान के यम, व्रत और नियम तथा दीपदान शुरू हो जाएंगे।
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ज्योर्तिविद विमल जैन ने बताया कि अश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि छह अक्तूबर को दिन में 12.24 बजे लग रही है और सात अक्तूबर सुबह 8.18 बजे तक रहेगी। व्रत की पूर्णिमा छह अक्तूबर को रहेगी जबकि स्नान-दान की पूर्णिमा सात अक्तूबर को मनाई जाएगी। रेवती नक्षत्र छह अक्तूबर को अर्द्धरात्रि के बाद 4.2 मिनट से सात अक्तूबर को अर्द्धरात्रि के बाद 1.58 बजे तक रहेगा।
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काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व सदस्य पं. दीपक मालवीय ने बताया कि शरद पूर्णिमा अपनी आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्ता के लिए जाना जाता है। यह वह रात है जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर पृथ्वी पर अमृतमयी चांदनी बरसाता है।
मान्यता है कि इस रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। साथ ही, धन की देवी मां लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं।
आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी में औषधीय गुण होते हैं। इस रात चंद्रमा की किरणें इतनी शक्तिशाली होती हैं कि खुले आसमान में रखी गई खीर अमृत के समान हो जाती है। इस खीर को ग्रहण करने से शरीर रोगमुक्त रहता है।
मान्यता है कि इस रात खुले आसमान के नीचे खीर रखने और अगले दिन उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। साथ ही, धन की देवी मां लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं।
आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार, शरद पूर्णिमा की चांदनी में औषधीय गुण होते हैं। इस रात चंद्रमा की किरणें इतनी शक्तिशाली होती हैं कि खुले आसमान में रखी गई खीर अमृत के समान हो जाती है। इस खीर को ग्रहण करने से शरीर रोगमुक्त रहता है।