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क्रांति यात्रा की पूरी कहानी: इंटर की परीक्षा के बाद क्रांतिकारी आंदोलन में कूद गए थे शचींद्रनाथ बख्शी

Sat, 13 Aug 2022 08:03 AM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Sat, 13 Aug 2022 08:03 AM IST
सार

आजादी पाने की ललक में देश के वरिष्ठ नेताओं के अलावा युवा और किशोर भी आंदोलन में कूद गए। ऐसे ही क्रांतिकारी सेनानी थे शचींद्रनाथ बख्शी। काकोरी कांड के इस नायक ने अपने अदम्य साहस से वीरता के नए आयाम गढ़े। 

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Shachindranath had jumped into the revolutionary movement after the Inter examination
शचींद्रनाथ बख्शी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

काशी के अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है। आजादी पाने की ललक इतनी ज्यादा थी कि वरिष्ठ नेताओं के अलावा युवा और किशोर भी आंदोलन में अपनी आहुति देने को तत्पर थे। ऐसे ही क्रांतिकारी सेनानी थे शचींद्रनाथ बख्शी। काकोरी कांड के इस नायक ने अपने अदम्य साहस से वीरता के नए आयाम गढ़े। शचींद्र नाथ बख्शी की किताब क्रांति के पथ पर में क्रांति यात्रा की पूरी कहानी है।
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शचींद्र नाथ बख्शी पर राष्ट्रीय आंदोलन का इतना ज्यादा असर था कि इंटर की परीक्षा देने के बाद से ही वह क्रांतिकारी गतिविधियों में जुट गए। वाराणसी में 1922 में जब अनुशीलन समिति की शाखा खुली तो उन्होंने नए क्रांतिकारियों को भर्ती करने और प्रशिक्षण केंद्रों के प्रबंधन की जिम्मेदारी उठा ली।
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लगन, मेहनत और समर्पण का ही परिणाम था कि समिति का विस्तार हुआ और क्रांतिकारी गतिविधियां तेज हो गईं। गुप्तचर विभाग के कान खड़े हो गए और वह पीछे लग गया। शचींद्र को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने बनारस छोड़ दिया और लखनऊ को केंद्र बना लिया। 1924 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की जिम्मेदारी उठाई। बनारस, लखनऊ और झांसी की जिम्मेदारियां निभाते हुए कई युवाओं को क्रांति की इस मशाल से जोड़ा

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काकोरी कांड के दौरान अशफाक और लाहिड़ी के जिम्मे रेल रोकने और बख्शी के जिम्मे काम पूरा होने तक गार्ड को कब्जे में रखने की जिम्मेदारी थी। अंग्रेजी हुकूमत के मुंह पर क्रांतिवीरों द्वारा मारा गया यह तमाचा उनको बौखलाने के लिए काफी था। दूसरे दिन से जांच शुरू हो गई। पुलिस ने आजाद, अशफाक और बख्शी को छोड़कर सभी को गिरफ्तार कर लिया। तीनों क्रांतिकारी फरार हो गए और पुलिस इनकी तलाश करती रही। बख्शी को पुलिस ने 1927 में भागलपुर से गिरफ्तार कर लिया।

इनके ऊपर काकोरी कांड का दूसरा मुकदमा चलाया गया। इसमें अशफाक को फांसी और बख्शी को आजीवन कारावास की सजा दी गई। जेल में भी बंदियों के अधिकार व सुविधाओं के लिए इनका संघर्ष चलता रहा। बरेली जेल में 53 दिनों तक अनशन किया। इसमें मन्मथनाथ गुप्त और राजकुार सिन्हा भी थे।

शहर दक्षिणी से विधायक भी बने
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के योद्धा शचींद्रनाथ बख्शी का जन्म 27 दिसंबर सन 1900 ई. को वाराणसी में हुआ था। आजादी के बाद वह शहर दक्षिणी से विधायक भी चुने गए। सुल्तानपुर में 23 नवंबर सन 1984 ई. को उनका निधन हुआ।
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