वाराणसी: फल, सब्जी और अनाज के साथ ही अब बीजों का भी होगा निर्यात
बीते दो साल में वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर, चंदौली सहित पूर्वांचल के कई जिलों से आम, चावल, सेम, हरी मिर्च, हरी मटर का सफल निर्यात हुआ। जिसका फायदा सीधे किसानों को मिला। अब एपीडा बीजों को भी निर्यात करेगा।
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निर्यातक हब के रूप में उभर रहे बनारस से जल्द ही बीजों का भी निर्यात किया जाएगा। इसके अलावा जैविक उत्पादों के ज्यादा उत्पादन के लिए किसानों को मॉडर्न तकनीक की जानकारी समय-समय दी जाएगी। यह बातें गुरुवार को वाराणसी मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहीं। जो एपीडा की ओर आयोजित अमृत महोत्सव के तहत कृषि निर्यात के लिए जागरूता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। जहां मंडल के चार जिलों के प्रगतिशील किसान, एफपीओ, कृषि वैज्ञानिक सहित कृषि निर्यात से जुड़ी कई संस्थाएं और विभाग के प्रतिनिधि मौजूद थे।
बीते दो साल में वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर, चंदौली सहित पूर्वांचल के कई जिलों से आम, चावल, सेम, हरी मिर्च, हरी मटर का सफल निर्यात हुआ। जिसका फायदा सीधे किसानों को मिला। किसानों के उत्साह को देखते हुए कृषि निर्यात को और आसान बनाने के लिए एपीडा ने जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
जिसमें उद्यान, कृषि, निर्यातक, संस्थाएं और किसान संगठनों ने हिस्सा लिया। दो साल में 10 से 12 बार निर्यात का अनुभव रखने वाले वाराणसी मंडल के किसान संगठनों द्वारा जल्द ही 10 प्रतिशत बीजों का निर्यात किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था के प्रभारी उप निदेशक अजय कुमार सिंह के मुताबिक संस्था की ओर से तीन मंडल आजमगढ़, विंध्याचल और वाराणसी में 1313 की संख्या में किसान, निजी कंपनी और निगम की ओर से बीज तैयार किए जाते हैं, जो प्रमाणित है।
जो रबी और खरीफ दोनों सीजन के धान, गेहूं, चना, मटर, मूंग, मसूर, सरसों जौ, जई, बरसिंघ का एक से डेढ़ लाख क्विंटल तक बीज का उत्पादन करते हैं। इनके अलावा बीएचय 17 योजनाओं के तहत हजारों क्विंटल बीज का उत्पादन है प्रतिवर्ष करता है।