सावन की अंतिम दिन: झूले पर विराजी पंचबदन प्रतिमा, पीएसी बैंड की धुन पर निकली पालकी; श्रद्धालुओं ने झूला झुलाया
टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से बाबा की पालकी यात्रा निकली। पालकी में सवार पंचबदन प्रतिमा को श्रद्धालु झूला झुलाते हुए धाम तक ले गए। पीएसी बैंड की धुन पर निकली पालकी यात्रा में भक्तों की भीड़ उमड़ी। धाम पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजन-अर्चन किया। इस दौरान पूरा परिसर बाबा के जयकारों से गूंज उठा।
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सावन की अंतिम फुहारों के बीच शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा पर काशी ने अपने आराध्य बाबा विश्वनाथ को प्रेम और श्रद्धा से झूला झुलाया। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से पंचबदन बाबा की चल प्रतिमा पालकी में सवार होकर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम पहुंची। 36वीं वाहिनी पीएसी के बैंड पर ॐ नमः शिवाय और मेरी झोपड़ी के भाग खुल जाएंगे, महादेव आएंगे... की धुन गूंजती रही। धाम पहुंचने पर बाबा को सपरिवार गर्भगृह में झूले पर विराजमान कराया गया। भक्तों ने झूले की डोर थामकर बाबा से सुख-समृद्धि, लोकमंगल और काशी-राष्ट्र पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।
शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा पर टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से पंचबदन बाबा की चल प्रतिमा पालकी में सवार होकर श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई। बाबा की अगवानी के लिए काशीवासी और श्रद्धालु रास्ते में खड़े रहे। किसी ने हाथ जोड़कर महादेव को नमन किया तो किसी ने जयकारे लगाकर वातावरण को शिवमय कर दिया। पीएसी जवानों की वर्दी, कदमों की लय और वाद्ययंत्रों से निकलती शिव आराधना की धुन ने पालकी यात्रा को आध्यात्मिक रंग दे दिया।
काशी की गलियों से होकर बाबा विश्वनाथ के स्वागत में उठता भक्ति का संगीत उनके धाम तक पहुंचता रहा। मंदिर पहुंचने के बाद विधि-विधान से बाबा को सपरिवार गर्भगृह में झूले पर विराजमान कराया गया। इसके साथ ही पारंपरिक झुलनोत्सव शुरू हुआ। काशीवासियों ने श्रद्धा और प्रेम से झूले की डोर थामी और अपने आराध्य को झुलाया।
सावन पूर्णिमा पर शिवभक्तों ने किया बाबा का सामूहिक जलाभिषेक : सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री बाबा काशी विश्वनाथ भक्त सेवा समिति के ओर से 27वां वार्षिक सामूहिक जलाभिषेक श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। संगठन के पदाधिकारियों ने शोभायात्रा निकालकर बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया।
लक्सा स्थित एक होटल से उत्तर प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु के नेतृत्व में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यह शोभायात्रा गिरजाघर, गोदौलिया, दशाश्वमेध और विश्वनाथ गली के पारंपरिक मार्गों से होते हुए बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंची। शोभायात्रा के दौरान रास्ते भर गूंजती मधुर शहनाई की धुनें विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
सावन के अंतिम दिन शिवमय हुई काशी, भक्तों ने किया जलाभिषेक
सावन महीने के अंतिम दिन श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को काशी पूरी तरह शिवमय नजर आई। भोर की पहली किरण के साथ ही गंगा स्नान और बाबा के जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लग गया। काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर शहर और ग्रामीण अंचल के प्रमुख देवालयों में श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर दर्शन-पूजन किया और सुख-समृद्धि की कामना की। श्री काशी विश्वनाथ धाम में तड़के मंगला आरती के बाद जैसे ही पट खुले, पूरा परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
बाबा विश्वनाथ का रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष श्रृंगार किया गया था। भक्तों ने उन्हें राखी अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। शहर के अन्य प्रमुख शिवालयों गौरी केदारेश्वर, महामृत्युंजय, तिलभांडेश्वर और ओंकारेश्वर के साथ ही काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव के दरबार में भी दिनभर भारी भीड़ उमड़ी। संकटमोचन और दुर्गाकुंड मंदिर में भी भक्तों ने शीश नवाया। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर में गंगा-गोमती संगम पर स्नान कर लाखों कांवड़ियों और क्षेत्रीय श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।