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काशी का अनोखा मंदिर: सेतुबंध से काशी आए भगवान रामेश्वर, प्रभु श्रीराम करते हैं अभिषेक; जानें- क्या है इतिहास

Tue, 13 Aug 2024 04:42 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 13 Aug 2024 04:42 PM IST
सार

काशी के चार धाम में एक रामेश्वर महादेव का मंदिर हैं। यह मंदिर काशी में अयोध्या नगरी में है। इस मंदिर में भगवान श्रीराम स्वयं अपने इष्ट भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।   

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Sawan 2024 special story of famous shiva temple Rameshwar Mahadev Temple in kashi
रामेश्वर महादेव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

काशी में 33 कोटि देवी-देवता, तीर्थ और नदियां विराजमान हैं। काशी के चार धाम में एक रामेश्वर महादेव काशी की अयोध्या नगरी में ही विराजमान हैं। यहां श्रीराम स्वयं अपने इष्ट भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। सेतुबंध पर अपने एक अंश रहकर रामेश्वर महादेव काशी में संपूर्ण भाव से काशीवासियों को अपना दर्शन देते हैं। मानमंदिर घाट पर ही श्री रामेश्वर महादेव ज्योतिर्लिंग का मंदिर है।

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काशी खंड के अनुसार रामेश्वरान्महाक्षेत्राज्जटीदेवः समागतः। एकदन्तोत्तरे भागे सोऽर्चितः सर्वकामदः।। यानी महादेव से नंदी जी कहते हैं- हे भगवन! सेतुबंध रामेश्वर महाक्षेत्र से जटी देव अर्थात् भगवान रामेश्वर यहां आए हैं। वे एकदंत गणेश के उत्तरभाग में हैं। उनका पूजन करने से वे सभी कामनाओं को पूर्ण कर देते हैं। वायव्य कोण में सोमेश्वर के समीप अयोध्या पुरी है, जहां रामेश्वर लिंग है। 
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भगवान प्रभु श्रीराम स्वयं यहां निवास करते हैं। उसके आगे दक्षिण धातेश्वर हैं। उनके भी आगे बढ़ते ही सोमेश्वर लिंग मिलता है। उसके नैर्ऋत्यकोण में सज्जनों को कनक देनेवाला कनकेश्वर लिंग है। इन्हीं कनकेश्वर की आराधना से भगवान श्रीराम को अक्षय कनक की प्राप्ति हुई।

भगवान रामेश्वर लिंग के निकट रामतीर्थ है, उसमें केवल स्नान करने ही से विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। काशी की पौराणिक चारधाम में से एक यही रामेश्वर धाम है और द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग है। काशी की सप्तपुरियों में से एक अयोध्यापुरी की सीमा भी यहीं समाप्त होती है। 

भगवान श्रीराम ने लंका विजय से पहले समुद्र के किनारे रामेश्वर महादेव की आराधना की थी और उनका शिवलिंग स्थापित किया था। भगवान राम की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिया और विजय का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद भगवान राम की प्रार्थना पर भक्तों का कल्याण करने के लिए भगवान शिव वहीं रामेश्वर महादेव के रूप में विराजमान हो गए। इसके बाद बाबा विश्वनाथ जब काशी आए तो सेतुबंध से रामेश्वर महादेव भी काशी में विराजमान हुए।
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