Varanasi: सावन के पहले सोमवार को यादव बंधु निभाएंगे वर्षों पुरानी परंपरा, मात्र 21 लोगों को जलाभिषेक की अनुमति
10 जुलाई को सावन के पहले सोमवार पर 21 यादव बंधुओं को बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में प्रवेश कर जलाभिषेक की अनुमति दी गई है। चंद्रवंशी गोप समिति के साथ तीन दौर की वार्ता के बाद पुलिस और मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
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शिव की नगरी काशी में सावन के पहले सोमवार को जगत कल्याण के लिए यादव बंधुओं द्वारा सालों से दिलचस्प परंपरा को निभाया जा रहा है। इस बार सावन के पहले सोमवार को 21 यादव बंधुओं को बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में प्रवेश करके जलाभिषेक की अनुमति दी गई है। इसके अलावा बाकी यदुवंशी समाज के लोग बाहर से ही जलाभिषेक करेंगे।
चंद्रवंशी गोप समिति के साथ तीन दौर की वार्ता के बाद पुलिस और मंदिर प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। समिति के अध्यक्ष लालजी यादव ने बताया कि वर्षों से चली आ रही परंपरा को यादव समाज निभाएगा। 10 जुलाई को पहले सोमवार पर इस बार भक्तों की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन व मंदिर प्रशासन ने 21 यदुवंशी समाज के लोगों को गर्भगृह में जलाभिषेक की अनुमति दी है।
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इन मार्गों से गुजरेगी जलाभिषेक यात्रा
हम लोगों की जलाभिषेक यात्रा गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर, शीतला मंदिर होते हुए श्री काशी विश्वनाथ धाम में गंगा द्वार से प्रवेश करेगी। जो पुरानी परंपरा चली आ रही है हम उसका निर्वहन करेंगे, हम ना तो किसी प्रकार की नई परंपरा शुरू करेंगे ना ही अपनी पुरानी परंपरा को छोड़ेंगे।
जो मार्ग रहा है हम उसी मार्ग से जलाभिषेक करेंगे। मंदिर प्रशासन का पूरा सहयोग किया जाएगा। आम श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए हम लोगों ने 21 लोगों के ही गर्भगृह में प्रवेश को स्वीकार कर लिया है। बताते चलें कि नंगे पैर कंधे पर गंगा जल का मटका लिए यदुवंशियों का रेला लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। यादव समाज का पीतल ध्वज और डमरू बजाते युवकों के दल को देख रास्ते भर हर-हर महादेव का उद्घोष होता रहता है।
अनुमति नहीं मिली तो यदुवंशी मंदिर में देंगे धरना
वाराणसी। गोवर्धन पूजा समिति के पदाधिकारियों ने 21 लोगों के गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति पर रोष जताया है। शनिवार को गोवर्धनधाम राजघाट पर बैठक में 10 जुलाई को होने वाले पारंपरिक सावन के जलाभिषेक की तैयारियों पर चर्चा हुई। अध्यक्ष विनोद यादव और महामंत्री पारस यादव ने बताया कि जलाभिषेक में शामिल होने के लिए देश भर से यादव बंधु बनारस आते हैं। ऐसे में केवल 21 लोगों को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति देना ठीक नहीं है।
हमारी परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। पिछले साल भी व्यवस्था के नाम पर जिला प्रशासन ने सभी यदुवंशियों को गर्भगृह मे जाने से रोक दिया था। मौके पर सारे यदुवंशियों ने जब विरोध किया तब गर्भगृह में प्रवेश कर जलाभिषेक करने दिया गया। अगर व्यवस्था के नाम पर हमारी परंपरा को रोका गया तो सारा यदुवंशी समाज वहीं धरना देने के लिए विवश होगा। इसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।