Sawan 2022: स्वर्णिम आभा से दमकने लगा काशी का मार्कंडेय महादेव मंदिर, कल केंद्रीय मंत्री करेंगे लोकार्पण
वाराणसी शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर गंगा-गोमती के संगम पर कैथी गांव में विराजते हैं मार्कंडेय महादेव। मार्कंडेय महादेव मंदिर का शिखर अब स्वर्णिम आभा से दमकने लगा है।
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वाराणसी के कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर का शिखर अब स्वर्णिम आभा से दमकने लगा है। शिखर पर गोल्डन प्लेटिंग तांबे की परत चढ़ाने का काम पूरा हो चुका है। सावन के तीसरे सोमवार को इसका लोकार्पण केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय करेंगे। यह संयोग ही है कि पिछले साल सावन के तीसरे सोमवार को कार्य का शुभारंभ हुआ था। ठीक एक साल बाद लोकार्पण किया जाएगा।
विशेषज्ञों की राय पर केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र पांडेय ने तांबे के प्लेट लगवाने का निर्णय लिया था, क्योंकि तांबे की परत की आयु एक हजार साल तक रहेगी। इस ऐतिहासिक कार्य को करने के लिए कुछ संस्थाएं तथा समाज के प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने भी सहयोग किया था। इसकी लागत लगभग 50 लाख रुपये है। स्वर्णिम आभा के शिखर बन जाने के बाद मंदिर का स्वरूप और भव्य हो गया है।
मार्कंडेय महादेव मंदिर की ये है मान्यता
मार्कंडेय महादेव मंदिर की मान्यता है कि सावन मास में एक लोटा जल रामनाम लिखा बेलपत्र चढ़ाने मात्र से ही लोगों की कामनाएं पूर्ण होती हैं। सांसद व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के प्रयास से करोड़ों रुपये की लागत से मंदिर का जीर्णोद्धार व संगम व गंगा घाट जो राजस्थान के गुलाबी पत्थरों से सजाया गया है।
यहां गंगा गोमती संगम घाट व गंगा घाट पर लगाई गई जेटी लोगों को आकर्षित कर रही है। सैलानियों की आमद बढ़ने से रोजगार भी बढ़ रहा है। यहां सैलानियों के लिए मोटर बोट चलाने जाने की पहल जारी हो गई है। लाइटिंग, शौचालय, रैन बसेरा, पर्यटन गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं का निर्माण किया गया है।
राजा दशरथ ने यहीं किया था पुत्रेष्टि यज्ञ
गंगा-गोमती के तट पर बसा कैथी गांव मारकंडेय जी के नाम से विख्यात है। यह गर्ग, पराशर, शृंगी, उद्याल आदि ऋषियों की तपोस्थली है। मान्यता है कि इसी स्थान पर राजा दशरथ को पुत्र प्राप्ति के लिए शृंगी ऋषि ने पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था। इसके परिणाम स्वरूप राजा दशरथ को चार पुत्र राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघभन प्राप्त हुए थे। यही वह तपोस्थली है, जहां राजा रघु द्वारा ग्यारह बार हरिवंशपुराण का परायण करने पर उन्हें उत्तराधिकारी प्राप्त हुआ था। पुत्र कामना के लिए यह स्थल काफी दुर्लभ है।