सीएम के आदेश नहीं आए काम, गड्ढों में गिरे कांवरिये
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श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने का सरकारी दावा सावन के पहले ही दिन हवा हवाई साबित हुआ। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के निर्देशों का कहीं भी असर नहीं दिखा। आम श्रद्धालुओं से लेकर सुगम दर्शन करने वालों को मंदिर परिक्षेत्र में अव्यवस्थाओं से दो-चार होना पड़ा। भीड़ अधिक होने के कारण गंगा तट से लेकर बाबा दरबार तक अफरातफरी की स्थिति बनी रही।
दर्जनों श्रद्धालु मंदिर परिक्षेत्र में खोदे गए गड्ढों में गिरकर चोटिल हो गए। घाट से लेकर गलियों तक प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थिति और बिगड़ गई। भीड़ को अनियंत्रित होते देख पुलिस ने मोर्चा संभाला, तब जाकर स्थिति कुछ हद तक नियंत्रित हो सकी।
खंडग्रास चंद्रग्रहण के मोक्ष के उपरांत गंगा तट से स्नान कर श्रद्धालुओं का रेला काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर चल पड़ा। मंदिर परिक्षेत्र से लेकर गंगा तट और बांसफाटक तक श्रद्धालु ही दिखे। बैरिकेडिंग नहीं होने के कारण भीड़ अनियंत्रित हो गई। बांसफाटक से सरस्वती फाटक, कोतवालपुरा से लेकर डेढ़सी पुलिया तक अंधेरा होने के कारण श्रद्धालु गिरते-पड़ते मंदिर पहुंचे।
सांड़ और गाय गलियों में घूमते रहे। सरस्वती फाटक से बाहर निकलने वाला गेट बंद होने से चितरंजन पार्क और बासंफाटक पर सामान रखने वाले यात्रियों को घूमकर कचौड़ी गली, मणिकर्णिका द्वार गोदौलिया से जाना पड़ा। नीलकंठ द्वार का चैनल भी मंदिर प्रशासन ने नहीं खुलवाया। इसके कारण कचौड़ी गली जाने वाले यात्री पतली पगडंडी से होकर गुजर रहे थे, जिसके बगल में 10 फीट का गड्ढा था। गलियों में मलबा पड़ा होने और अंधेरा होने के कारण कई यात्रियों को चोटें आईं।
सुगम दर्शन करने वालों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। शृंगार गौरी के बगल में मंदिर प्रशासन की ओर से गढ्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। इसमें कई श्रद्धालु गिरकर चोटिल हो गए। गेट नंबर पांच की तरफ भी टूटी हुई टाइल्स और गढ्ढे में गिरकर श्रद्धालु चोटिल हुए। आम दर्शनार्थियों ने सुगम दर्शन करने वालों का विरोध भी किया।
भीड़ अधिक होने और अफरातफरी की स्थिति देखकर पुलिस ने अनहोनी से बचाने के लिए श्रद्धालुओं को गेट नंबर चार से एंट्री करानी पड़ी। अंधेरा होने और कई यात्रियों के गिरने के कारण अफरातफरी मच गई। हंगामा बढ़ता देखकर पुलिस ने कई थानों की फोर्स बुलाई। रस्सा पार्टी मंगाकर बैरिकेडिंग की व्यवस्था कराई गई। छत्ता द्वार पर मलबा गिरा होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी हुई। सरस्वती फाटक से निकलने वाले रास्ते पर मकानों के मलबे से निकली हुई सरिया में भी फंसकर कई लोगों को चोट लगी।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि अनुमान से ज्यादा भीड़ के कारण कुछ अव्यवस्था की शिकायतें मिली। लोक निर्माण विभाग और नगर निगम को बृहस्पतिवार तक बैरिकेडिंग और सफाई के लिए निर्देश दिया गया है। सबकी जिम्मेदारी तय है, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई होगी।
80 हजार ने किया बाबा का दर्शन :
सावन के पहले दिन देर रात तक 80 हजार भक्तों ने बाबा दरबार में हाजिरी लगाई। सुबह छह बजे से शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला शयन आरती तक चलता रहा। कांवरिया शिविरों में भी कांवरियों की भीड़ लगी रही।