यहां पर आषाढ़ में ही रखा गया सावन के सोमवार का व्रत, जानिए इसके पीछे की वजह
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भले ही सावन 17 जुलाई से शुरू हो रहा है पर भदोही जिले में आषाढ़ के अंतिम सोमवार से ही बम-बम के उद्घोष से शिवालय गूंज रहे हैं। भदोही जिले में ऐसी मान्यता है कि सावन में पांच सोमवार के व्रत के साथ ही पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
इस साल सावन में पांच सोमवार की जगह चार सोमवार ही पड़ रहे हैं। भदोही जिले में अषाढ़ मास के आखिरी सोमवार को जिले के शिवालयों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सावन में पांच सोमवार का व्रत रखने वाली महिलाओं ने इस बार सावन में केवल चार सोमवार ही पड़ने के कारण आषाढ़ के अंतिम सोमवार से ही व्रत आरंभ कर दिया।
इसी क्रम में सोमवार को हरिहरनाथ धाम के अलावा बड़े शिव, तिलेश्वर नाथ, सेमराधनाथ आदि शिव मंदिरों पर आस्था का सैलाब उमड़ा। ऐसी मान्यता है कि सावन में पांच सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनचाही मुरादें पूरी करते हैं।
इसलिए जिस सावन माह में चार सोमवार पड़ते हैं, उसमें महिलाएं एक सोमवार पहले यानी अषाढ़ के अंतिम सोमवार से ही व्रत आरंभ कर देती हैं और उसे पहला सोमवार माना जाता है। सोमवार को विभिन्न शिवालयों पर जलाभिषेक हुआ और दर्शन पूजन किया गया। शिवभक्तों ने 'जय भोलेनाथ' का उद्घोष करते हुए दर्शन-पूजन किया।
डुहिया के आचार्य पंडित दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि जिस सावन में पांच सोमवार से कम पड़ते हैं, उस सावन में अषाढ़ के अंतिम सोमवार से ही महिलाएं व्रत आरंभ कर देती हैं।