फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   Satish Kaushik film Kagaj story seen controversy before release Azamgarh

रिलीज से पहले विवादों में घिरती दिख रही फिल्म ‘कागज’ मृतक ने निर्माता पर लगाया यह आरोप

Fri, 01 Jan 2021 07:51 PM IST
विचित्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़ Published by: विचित्र सिंह Updated Fri, 01 Jan 2021 07:51 PM IST
विज्ञापन
Satish Kaushik film Kagaj story seen controversy before release Azamgarh
राजघाट पर प्रेसवार्ता को संबोधित करते लाल बिहारी मृतक और अन्य। - फोटो : अमर उजाला

सात जनवरी 2021 को रिलीज होने वाली ‘कागज’ फिल्म विवादों में घिरती नजर आ रही है। यह फिल्म यूपी के आजमगढ़ जनपद के रहने वाले लाल बिहारी मृतक के जीवन पर बनाई गई है। शुक्रवार को राजघाट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान मृतक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल बिहारी ने फिल्म निर्देशक सतीश कौशिक पर धोखाधड़ी और तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाया है। 

विज्ञापन


उन्होंने कहा कि निर्माता निर्देशक सतीश कौशिक फिल्म बनाने के लिए वर्ष 2003 में राइटर इम्तेयाज हुसैन के साथ उनके घर आए थे। उसके बाद फिल्म का काम शुरू हुआ। बताया कि वह उनको बार-बार मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, आजमगढ़ और सीतापुर बुलाते रहे। कहा कि उनका पूरा परिवार 18 वर्ष से उन्हें सहयोग करता रहा। कागज फिल्म में उनके लिखे दो गाने भी हैं।

विज्ञापन

आरोप लगाया कि उनके संघर्ष की कहानी को तोड़-मरोड़ कर किसान, बुनकर की जगह उनको बैंडबाजा वाला बना दिया गया। इतना ही नहीं, लाल बिहारी मृतक की जगह भरत लाल मृतक नाम बताया गया है। आरोप लगाया कि फिल्म एग्रीमेंट की कॉपी मांगने पर वह हीलाहवाली करते रहे। एक बार भी उन्हें फिल्म की कहानी नहीं सुनाई और न ही फिल्म दिखवाई। फिल्म रिलीज होने से पहले दिखाने से मना कर दिया। एग्रीमेंट की कॉपी फिर मांगने पर कहा गया कि कहानी का सारा अधिकार उनके पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सतीश कौशिक ने सौ रुपये के स्टांप पर हस्ताक्षर कराकर उनके संघर्ष की कहानी अपने नाम कर ली और उसका लाभ उठा रहे हैं।

18 साल बाद मुर्दा से हुए जिंदा

छह मई 1955 में जनपद आजमगढ़, ग्राम खलीलाबाद, थाना तहसील निजामाबाद में जन्म लेने वाले लाल बिहारी मृतक के पिता कृषि मजदूर थे। उनकी मौत के बाद अमिलो, थाना मुबारकपुर, तहसील सदर आजमगढ़ में उनका पालन पोषण हुआ। 30 जुलाई 1976 को उन्हें अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया था। काफी संघर्षों के बाद 30 जून 1994 को वह अभिलेखों में दोबारा जिंदा हुए। तबसे वह लगातार अभिलेखों में मृत लोगों को जिंदा साबित करने की जंग लड़ते आ रहे हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed