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संस्कृति संसद: काशी में जुटेंगे 3000 संत-महंत और महामंडलेश्वर, बलूचिस्तान और पीओके पर होगा मंथन
Sat, 30 May 2026 04:13 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Sat, 30 May 2026 04:13 PM IST
सार
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में दो से पांच नवंबर तक संस्कृति संसद का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान शक्तिपीठों, द्वादश ज्योतिर्लिंगों और चारधाम से साधु-संत व अनुयायी आएंगे।
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रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में होगा मंथन।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
काशी में दो से पांच नवंबर तक सिगरा स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले संस्कृति संसद को इस बार ऐतिहासिक बनाने की तैयारी है। इसमें देशभर से लगभग 3000 साधु-संत, महंत और महामंडलेश्वर शामिल होंगे। संसद में सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के साथ-साथ पीओके और बलूचिस्तान से जुड़े मुद्दों पर भी मंथन किया जाएगा। आयोजन में हिंदू बलूच प्रतिनिधियों के भी शामिल होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के एक हजार मंदिरों के महंत और पुजारियों के अलावा भारतीय संस्कृति से जुड़े विद्वान और वक्ता विदेशों से भी भाग लेंगे।
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अखिल भारतीय संत समिति, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, श्रीकाशी विद्वत परिषद और गंगा महासभा की ओर से आयोजित संस्कृति संसद का शुभारंभ दो नवंबर को होगा। देशभर से आए साधु-संत श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए रुद्राभिषेक करेंगे।
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अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि हर दो वर्ष पर आयोजित होने वाली संस्कृति संसद में इस बार सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के साथ पीओके और बलूचिस्तान के मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान से कुछ प्रतिनिधि भी इसमें भाग लेंगे। संसद में सनातन उन्मूलन की चुनौतियों और हिंदू धर्म के विरुद्ध कथित राजनीतिक एवं धार्मिक षड्यंत्रों पर भी विचार-विमर्श होगा।
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उन्होंने बताया कि देश के 400 से अधिक जिलों और 127 संप्रदायों के साधु-संत इसमें शामिल होंगे। दो सौ से अधिक महामंडलेश्वर भी संस्कृति संसद में भाग लेंगे। साधु-संत श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में रुद्राभिषेक कर अयोध्या में बलिदान हुए ज्ञात-अज्ञात लोगों की आत्मा की शांति तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने की कामना करें।
51 शक्तिपीठ व द्वादश ज्योतिर्लिंग से आएंगे संत
संस्कृति संसद में हिंदू संस्कृति के प्रमुख पीठों में 51 शक्तिपीठों, द्वादश ज्योतिर्लिंगों और चारधाम पीठों के संत भी शामिल होंगे। जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि नेपाल, बांगलादेश, पाकिस्तान में मौजूद शक्तिपीठों के संतों को भी आमंत्रण दिया जाएगा। इसके अलावा द्वादश ज्योतिर्लिंगों और चारधाम पीठों को भी आमंत्रण पत्र भेजा जाएगा।
मठ और मंदिरों के आएंगे 1000 महंत और पुजारी भी
संस्कृति संसद में देशभर के संतों के अलावा उत्तर प्रदेश के मठ और मंदिरों के 1000 महंत व पुजारी भी आएंगे। 16 महानगरों के मंदिरों को बुलाया भेजा जाएगा। इसके अलावा पुरोहितों को भी निमंत्रण दिया जाएगा।
संस्कृति संसद में हिंदू संस्कृति के प्रमुख पीठों में 51 शक्तिपीठों, द्वादश ज्योतिर्लिंगों और चारधाम पीठों के संत भी शामिल होंगे। जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि नेपाल, बांगलादेश, पाकिस्तान में मौजूद शक्तिपीठों के संतों को भी आमंत्रण दिया जाएगा। इसके अलावा द्वादश ज्योतिर्लिंगों और चारधाम पीठों को भी आमंत्रण पत्र भेजा जाएगा।
मठ और मंदिरों के आएंगे 1000 महंत और पुजारी भी
संस्कृति संसद में देशभर के संतों के अलावा उत्तर प्रदेश के मठ और मंदिरों के 1000 महंत व पुजारी भी आएंगे। 16 महानगरों के मंदिरों को बुलाया भेजा जाएगा। इसके अलावा पुरोहितों को भी निमंत्रण दिया जाएगा।