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काशी के तीन संस्कृत विद्वानों को मिला पुरस्कार
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
Updated Thu, 12 Feb 2015 09:23 AM IST
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प्रतिष्ठित यश भारती पुरस्कार से हाल ही में काशी की आठ विभूतियों को नवाजने के बाद प्रदेश सरकार ने जब उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के पुरस्कारों की घोषणा की तो उसमें भी काशी के तीन संस्कृत विद्वानों को शामिल किया है। खास बात यह कि पांच साल बाद घोषित किए गए इस पुरस्कार में यश भारती से सम्मानित वागीश शास्त्री को विश्व भारती पुरस्कार के लिए चुना गया है।
इस सूची में जिन दो अन्य विद्वानों का नाम है उनमें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्राध्यापक रहे प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में संस्कृत विभाग के प्रोफेसर रह चुके प्रो. अमर नाथ पांडेय को बाल्मीकि पुरस्कार के लिए चुना गया है।
संस्कृत समाज का सम्मान
विश्व भारती पुरस्कार मिलना संस्कृत समाज का सम्मान है। यह मेरे लिए अप्रत्याशित सूचना थी। यह संस्कृत की लंबे समय तक सेवा का प्रतिफल है। संस्कृत का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से जल्द ही विद्या मंदिर खोला जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों को तीन माह का प्रशिक्षण और प्रतिभावान छात्रों को पुरस्कृत किया जाएगा।-प्रो. भगीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’
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संस्कारों की भाषा है संस्कृत
संस्कृत उपेक्षित भाषा रही है, जबकि यह संस्कारों की भाषा है। प्रदेश सरकार ने इस पुरस्कार के लिए मेरा चुनाव कर संस्कृत की परंपरा का मान बढ़ाया है। संस्कृत से ही संस्कारों का जन्म होता है। इसलिए देश और प्रदेश की सरकारों को संस्कृत के विकास के लिए काम करना चाहिए। जिस पीढ़ी में संस्कृत से संस्कार जन्म ले वह आतंकवाद और विषमता भूलकर अपराधों से हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगी।-प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी
संस्कृत का करना होगा प्रचार-प्रसार
आदि कवि बाल्मीकि के नाम पर पुरस्कार मिलना अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए सभी को आगे आना होगा। बाल्मीकि ने जिस प्रकार की रचना की और राम के चरित्र का वर्णन किया वह हमेशा के लिए आदर्श बना रहेगा। प्रदेश सरकार ने सम्मान प्रदान कर भाषा का सम्मान किया है। -प्रो. अमरनाथ पांडेय
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इस सूची में जिन दो अन्य विद्वानों का नाम है उनमें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के प्राध्यापक रहे प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में संस्कृत विभाग के प्रोफेसर रह चुके प्रो. अमर नाथ पांडेय को बाल्मीकि पुरस्कार के लिए चुना गया है।
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संस्कृत समाज का सम्मान
विश्व भारती पुरस्कार मिलना संस्कृत समाज का सम्मान है। यह मेरे लिए अप्रत्याशित सूचना थी। यह संस्कृत की लंबे समय तक सेवा का प्रतिफल है। संस्कृत का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से जल्द ही विद्या मंदिर खोला जाएगा, जिसमें विद्यार्थियों को तीन माह का प्रशिक्षण और प्रतिभावान छात्रों को पुरस्कृत किया जाएगा।-प्रो. भगीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’
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संस्कारों की भाषा है संस्कृत
संस्कृत उपेक्षित भाषा रही है, जबकि यह संस्कारों की भाषा है। प्रदेश सरकार ने इस पुरस्कार के लिए मेरा चुनाव कर संस्कृत की परंपरा का मान बढ़ाया है। संस्कृत से ही संस्कारों का जन्म होता है। इसलिए देश और प्रदेश की सरकारों को संस्कृत के विकास के लिए काम करना चाहिए। जिस पीढ़ी में संस्कृत से संस्कार जन्म ले वह आतंकवाद और विषमता भूलकर अपराधों से हमेशा के लिए मुक्त हो जाएगी।-प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी
संस्कृत का करना होगा प्रचार-प्रसार
आदि कवि बाल्मीकि के नाम पर पुरस्कार मिलना अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है। संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए सभी को आगे आना होगा। बाल्मीकि ने जिस प्रकार की रचना की और राम के चरित्र का वर्णन किया वह हमेशा के लिए आदर्श बना रहेगा। प्रदेश सरकार ने सम्मान प्रदान कर भाषा का सम्मान किया है। -प्रो. अमरनाथ पांडेय