Sankatmochan Sangeet Samaroh: शताब्दी वर्ष की दूसरी निशा पर छाया शिवमणि के ड्रम का जादू, अद्भुत थी शिव अराधना
हनुमत लला को प्रणाम करके शिवमणि ने रुद्रावतार के आंगन में सात सुरों को नए रूप में ड्रम, बाल्टी, सूटकेस, गिलास पर सजाया। पांच राज्यों के संगीत को ताल में पिरोकर शिवमणि ने ऐसा जादू जगाया कि हर कोई बस दम साधे हुए हर झंकार को अपने मन के तारों से मिला रहा था। ड्रम, जंबे, घंटी, रसोईघर की थाली, चिमटा के साथ गिलास, बाल्टी और सूटकेस भी ड्रम सेट के साथ ताल से ताल मिला रहे थे।
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शिवमणि के ड्रम की थाप और यू राजेश के मेंडोलिन की सुरलहरियों ने ऐसा समां बांधा की हनुमत लला के मंदिर का कोना-कोना झंकृत हो उठा। शिवमणि ने ड्रम पर स्टिक्स के साथ ऐसा जादू जगाया कि पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान होता रहा। संकटमोचन संगीत समारोह की दूसरी निशा की पहली प्रस्तुति के लिए शाम से पूरा परिसर श्रोताओं और श्रद्धालुओं से भर गया।
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संगीत समारोह के शताब्दी वर्ष की दूसरी निशा ने प्रथम निशा के ठहराव की ऊर्जा के साथ संगीतयम श्रीगणेश किया। मंगलवार की शाम से श्रद्धालु शिवमणि के ड्रम का जादू महसूस करने के लिए जुटने लगे थे। शाम को 7 बजे जैसे ही शिवमणि ने ड्रम पर स्टिक फेरी तो थाप से निकली झंकार के साथ हर-हर महादेव का जयघोष भी गूंज उठा।
हनुमत लला को प्रणाम करके शिवमणि ने रुद्रावतार के आंगन में सात सुरों को नए रूप में ड्रम, बाल्टी, सूटकेस, गिलास पर सजाया। पांच राज्यों के संगीत को ताल में पिरोकर शिवमणि ने ऐसा जादू जगाया कि हर कोई बस दम साधे हुए हर झंकार को अपने मन के तारों से मिला रहा था। ड्रम, जंबे, घंटी, रसोईघर की थाली, चिमटा के साथ गिलास, बाल्टी और सूटकेस भी ड्रम सेट के साथ ताल से ताल मिला रहे थे। सात से 12 मात्राओं में लयकारी का ऐसा चमत्कार दिखाया कि श्रोता भी खुद को ना रोक सके। जय-जय बजरंगबली, हर-हर महादेव का जयघोष लगातार गूंज रहा था। शिवमणि ने सबसे पहले शंखनाद से शुरूआत की और अनवरत दो घंटे की प्रस्तुति में यू राजेश ने मेंडोलिन पर ड्रम के साथ मनोहारी संगत की। मधुर ध्वनि की जुगलबंदी ने हर किसी को अपना मुरीद बना दिया।
भरतनाट्यम से की शिव आराधना, गूंजा हर हर महादेव
समारोह की दूसरी प्रस्तुति में चेन्नई की श्रीशा शशांक ने सहयोगी कलाकारों के साथ भरतनाट्यम से हनुमान दरबार में शिव की आराधना की तो हर हर महादेव से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो उठा। इसके बाद भरतनाट्यम से हनुमान चालीसा की प्रस्तुति पर दर्शकों ने ताली बजाकर जोरदार तरीके से श्रीशा का स्वागत किया। श्रीशा ने शिव, अंबा और हनुमान व श्रीकृष्ण पर आधारित रचनाओं का मर्म नृत्य की भंगिमाओं में अभिव्यक्त किया। शिवाष्टकम, राजराजेश्वरी स्तोत्रम को राग मालिका में पेश किया। उन्होंने तमिल के पारंपरिक नृत्य से प्रस्तुति को विराम दिया।
अरमान खान ने गायिकी में छोड़ी अमिट छाप
मंगलवार को तीसरी प्रस्तुति शास्त्रीय गायक अरमान खान और उनकी टीम की रही। अरमान खान जैसे ही अपनी टीम के साथ मंच पर पहुंचे और सुमधुर वाद्ययंत्रों की धुन के बीच अपनी गायिकी प्रस्तुत की तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। तबले पर मुंबई से आए यशवंत वैष्णव, संवादिनी में दिल्ली से विनय मिश्र और सारंगी पर जालंधर से विनायक सहाय ने सारंगी बजाकर सभी का दिल जीत लिया।