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संकट मोचन संगीत समारोहः सुरों की रसधार से संगीत प्रेमी हो रहे मंत्रमुग्ध
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 06 Apr 2018 10:51 AM IST
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मालिनी अवस्थी के सुमधुर उपशास्त्रीय गायन पर मुग्ध हुए श्रोता
- फोटो : अमर उजाला
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संकट मोचन संगीत समारोह की पहली निशा में रोनू मजूमदार की बांसुरी की मिठास संगीत प्रेमियों को तर कर गई। ब्रह्म मुहूर्त में मंचासीन हुए रोनू ने राग विभाष से शुरुआत की और फिर बांसुरी के अवरोही और आरोही तान के बेहतर संयोजन से समा बांध दिया। फिर जब पंचम सुरों की तान छेड़ी तो तालियों की गूंज के बीच संगीत प्रेमी विभोर हो गए।
रोनू के साथ संकटमोचन के दरबार में पहली बार संगत कर रहे संजू सहाय ने भी तबले पर जबरदस्त करामात दिखाई। टुकड़ों, तिहाइयों और परन की कलात्मकता से मोह लिया। फिर मंच पर आईं मालिनी अवस्थी ने सुरों की रसधार से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया।
राग जोगिया से शुरुआत की, बंदिश के बोल थे ‘पिया से मिलन आए आज...’। फिर बनारसी दादरा ‘जोहूं तोरी बटिया ओ बालमा...’ की सुमधुर प्रस्तुति के बाद उन्होंने दो चैती भी सुनाई। बोल थे, ‘सोवत निंदिया जगावे हो रामा भोरे भोरे और सुगवा बोलेला हमरी अटरिया...।’
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अंत में राग भैरवी में बंदिश ‘नैनन की मत मारो तलवरिया से’ अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। उनके साथ तबले पर पंडित राम कुमार मिश्र, हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र ने कुशल संगत की। इससे पहले पंडित एल सुब्रमण्यम ने दक्षिण भारतीय शैली में वायलिन वादन से श्रोताओं को आनंदित किया।
उन्होंने राग ललित भैरव में दो बंदिशें बजाईं। फिर पंडित जसराज के शिष्य मेवाती घराने के पंडित रतन मोहन शर्मा ने भी संकट मोचन के दरबार में अपनी स्वरांजलि पेश की। उनके साथ उनके शिष्य एवं पुत्र ईश्वर रतन शर्मा ने सहयोग किया।
तबले पर पंडित राम कुमार मिश्र और हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। रतन शर्मा ने गायन का समापन मृगनयनी के यार नवल रसिया... से किया। संचालन पंडित हरिराम द्विवेदी, प्रतिभा सिन्हा एवं अभिषेक ने किया।
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रोनू के साथ संकटमोचन के दरबार में पहली बार संगत कर रहे संजू सहाय ने भी तबले पर जबरदस्त करामात दिखाई। टुकड़ों, तिहाइयों और परन की कलात्मकता से मोह लिया। फिर मंच पर आईं मालिनी अवस्थी ने सुरों की रसधार से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया।
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राग जोगिया से शुरुआत की, बंदिश के बोल थे ‘पिया से मिलन आए आज...’। फिर बनारसी दादरा ‘जोहूं तोरी बटिया ओ बालमा...’ की सुमधुर प्रस्तुति के बाद उन्होंने दो चैती भी सुनाई। बोल थे, ‘सोवत निंदिया जगावे हो रामा भोरे भोरे और सुगवा बोलेला हमरी अटरिया...।’
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अंत में राग भैरवी में बंदिश ‘नैनन की मत मारो तलवरिया से’ अपनी प्रस्तुति को विराम दिया। उनके साथ तबले पर पंडित राम कुमार मिश्र, हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र ने कुशल संगत की। इससे पहले पंडित एल सुब्रमण्यम ने दक्षिण भारतीय शैली में वायलिन वादन से श्रोताओं को आनंदित किया।
उन्होंने राग ललित भैरव में दो बंदिशें बजाईं। फिर पंडित जसराज के शिष्य मेवाती घराने के पंडित रतन मोहन शर्मा ने भी संकट मोचन के दरबार में अपनी स्वरांजलि पेश की। उनके साथ उनके शिष्य एवं पुत्र ईश्वर रतन शर्मा ने सहयोग किया।
तबले पर पंडित राम कुमार मिश्र और हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। रतन शर्मा ने गायन का समापन मृगनयनी के यार नवल रसिया... से किया। संचालन पंडित हरिराम द्विवेदी, प्रतिभा सिन्हा एवं अभिषेक ने किया।