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संकट मोचन संगीत समारोह: 150 कलाकार, सबसे ज्यादा 40 प्रस्तुतियां तबला वादन की; पं. साजन मिश्र ने किया समापन

Wed, 23 Apr 2025 03:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 23 Apr 2025 03:19 PM IST
सार

संकट मोचन संगीत समारोह संगीत समारोह का समापन हो गया। अब अगले साल दो अप्रैल 2026 को हनुमान जयंती, दो से पांच अप्रैल 2026 तक सार्वभौम रामायण सम्मेलन और 6 से 11 अप्रैल 2026 तक 103वां संगीत समारोह होगा।

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Sankat Mochan sangeet samaroh 150 artists maximum 40 performances of Tabla playing
गायन प्रस्तुत करते पंडित साजन व स्वरांश मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Sankat Mochan Sangeet Samaroh: छह दिवसीय संकट मोचन संगीत समारोह के 102वें संस्करण का समापन अलसुबह शास्त्रीय बंदिश में अक्खड़ काशी के बोल के साथ हो गया। भंग के छनइया, काशी के खेवइया... और अघोर चालीसा... से संगीत समारोह की पूर्णाहुति हुई। पूरे छह दिनों तक 150 कलाकारों ने महावीर के आंगन में संगीत साधना की। इसमें सबसे ज्यादा 40 प्रस्तुतियां तबला वादन की रहीं। 

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संगीत समारोह में 30 से अधिक प्रस्तुतियां संतूर, सारंगी, सितार और वायलिन वादन की रहीं। नृत्य विधा से जुड़ी प्रस्तुतियों में 50 कलाकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं, अनूप जलोटा, पं. अजय पोहनकर, स्नेहा शंकर, कंकना बनर्जी जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपने सुरों और साज से महफिल सजाई।  

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श्रोताओं को भाए शास्त्रीय बंदिश में अक्खड़ काशी के बोल
मंगलवार की भोर में मंच पर पहुंचे बनारस घराने पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने हनुमान भक्तों को विभोर कर दिया। उन्होंने श्रोताओं को ठेठ बनारस और महादेव की काशी से परिचित कराया। साथ में बेटे स्वरांश मिश्र ने राग बसंत की धुन छेड़ी।
 
दो बंदिश गायन के दौरान उनकी लंबी-लंबी तानों को सुन श्रोता मुग्ध हो उठे। अंत में अघोर चालीसा गाने से पहले उन्होंने पान का एक बीड़ा मुंह में दबाया। इसी प्रस्तुति के साथ संकट मोचन संगीत समारोह का 102वां संस्करण मंगलवार को पूरा हो गया। पूरे पांच दिनों तक कार्यक्रम का संचालन डाॅ. व्योमेश शुक्ल, जगदीश्वरी चौबे, सौरभ चक्रवर्ती ने किया। 

Sankat Mochan sangeet samaroh 150 artists maximum 40 performances of Tabla playing
पंडित सुरेश गंधर्व और शेनू मजूमदार। - फोटो : अमर उजाला

दादा गुरुजी उस्ताद आमिर खान की बंदिश सुनाई
102वें समारोह की अंतिम निशा की आधी रात उस्ताद आमिर खां को दादा गुरुजी संबोधित करते हुए पंडित सुरेश गंधर्व ने पांचवीं प्रस्तुति इंदौर घराने से संबंधित गायन की दी। बड़ा खयाल पार न पायो अपरमपार और शिव शंकर की महिमा... पर छोटा खयाल बंदिश गाई। 

पंडित गंधर्व ने कहा कि बजरंग बली की कृपा से ही आने का सौभाग्य मिलता है। यहां जो हाजिरी न लगा पाए उसका संगीत कभी पूरा नहीं होता। छठीं प्रस्तुति बांसुरीवादन की रही। पं. रोनू मजूमदार और ऋषिकेष मजूमदार ने राग परमेश्वरी की अवतारणा की। धमार के बाद तीनताल में बंदिश बजाकर हनुमान जी की स्तुति की।

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शाहबाज खान ने कहा- मैं पहले क्यों नहीं आया 
पहली बार संगीत समारोह के मंच पर पहुंचे शाहबाज खान ने कहा कि अहो भाग्य प्राप्त हुआ है। यहां आने के बाद लग रहा है कि पहले क्यों नहीं आया। यहां से ये सोच के जा रहा हूं कि अगली बार जब भी मौका मिलेगा, मैं यहां जरूर आऊंगा। उन्होंने उस्ताद आमिर खां पर म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद साहब की लिखी एक नज्म भी सुनाई। 

शाहबाज खान ने कहा कि उन्होंने संकट मोचन मंदिर में हनुमान जी और भगवान राम से देश और समाज के कल्याण की कामना की। महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्रा ने शाहबाज खान का सम्मान किया। मंच पर उस्ताद की शिष्या विदुषी कंकना बनर्जी ने कहा कि शाहबाज हमारे गुरु के सुपुत्र हैं, हमारे पुत्र की तरह ही हैं। हमारा अहो भाग्य है, ये यहां पर आए हैं।

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