संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय: शास्त्री और आचार्य में दाखिले के लिए तीन साल की बाध्यता समाप्त, प्रवेश प्रक्रिया 29 जुलाई से
वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए अब तीन साल की बाध्यता समाप्त हो गई है। छात्र अब 12वीं और स्नातक के बाद तीन साल से अधिक का अंतराल होने पर भी शास्त्री व आचार्य में दाखिले के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए अब तीन साल की बाध्यता समाप्त हो गई है। छात्र अब बारहवीं और स्नातक के बाद तीन साल से अधिक का अंतराल होने पर भी शास्त्री व आचार्य में दाखिले के लिए आवेदन कर सकेंगे। सबसे खास बात यह है कि वर्तमान सत्र में दाखिले की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। शास्त्री, आचार्य, योग एवं एमए हिंदू अध्ययन में दाखिले के लिए 29 जुलाई से ऑनलाइन आवेदन शुरू होंगे और 20 अगस्त फार्म भरे जा सकेंगे।
रविवार को कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में प्रवेश समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय में शास्त्री व आचार्य में प्रवेश पर विचार विमर्श हुआ। प्रवेश आवेदन के साथ ही छात्रों को अब हास्टल के लिए भी आवेदन करना होगा।
हर छात्र को अपना ईमेल और मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से भरना होगा। विश्वविद्यालय की तरह महाविद्यालयों को भी प्रवेश के समय दो सौ रुपये का पंजीकरण शुल्क जमा करना होगा। प्रवेश समिति ने प्रदेश के बाहर के पूर्व मध्यमा और उत्तर मध्यमा में व्यक्तिगत फॉर्म भरने की भी अनुमति दिया है।
प्रवेश समिति ने संबद्ध महाविद्यालयों को अपनी वेबसाइट पर प्रबंधक, प्राचार्य एवं अध्यापकों की स्थिति, नाम, पता और शैक्षणिक अर्हता का विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। बैठक में छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. हरिशंकर पांडेय, प्रो. रमेश प्रसाद, प्रो. महेंद्र पांडेय, प्रो. हीरक कान्ति चक्रवर्ती, डॉ. विजय कुमार पांडेय, प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. शंभू नाथ शुक्ल, परीक्षा नियंत्रक अर्चना जौहरी, कुलसचिव केश लाल, विजय कुमार मणि त्रिपाठी उपस्थित थे।