संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालयः हॉस्टल खाली कराने के विरोध में छात्रों ने किया हंगामा, विवि प्रशासन ने 25 सितंबर तक दी मोहलत
छात्रों के हंगामे को देखते हुए पुलिस बुला ली गई। इसके बाद भी छात्र हॉस्टल खुलवाने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों के अड़ियल रुख को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें 25 सितंबर तक हॉस्टल खाली करने की मोहलत दी है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में बुधवार को छात्रों ने छात्रावास खाली कराने के विरोध में तालाबंदी कर प्रदर्शन किया। साथ ही प्रशासनिक भवन पर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों के हंगामे को देखते हुए पुलिस बुला ली गई। इसके बाद भी छात्र हॉस्टल खुलवाने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों के अड़ियल रुख को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें 25 सितंबर तक हॉस्टल खाली करने की मोहलत दी है।
बुधवार को छात्रसंघ अध्यक्ष कृष्ण मोहन शुक्ला के नेतृत्व में छात्र प्रशासनिक भवन पर धरने पर बैठ गए। छात्रों का कहना था कि 10 सितंबर से एनसीसी व 16 सितंबर से शास्त्री आचार्य की कक्षाएं शुरू होने जा रही है। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर आदेश भी जारी हो चुका है। वहीं दूसरी ओर छात्रों से छात्रावास भी खाली कराए जा रहे हैं।
यदि छात्रावास खाली करा दिया गया तो दूर दराज से आकर विश्वविद्यालय पढ़ने वाले छात्रों के सामने रहने की समस्या खड़ी हो जाएगी। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शास्त्री और आचार्य की परीक्षा 13 अगस्त को ही समाप्त हो चुकी है। इसे देखते हुए छात्रों को छात्रावास खाली करने के लिए कई बार निर्देश दिया गया बावजूद इसके छात्र में छात्रावास में जमे हुए ह़ैं।
ऐसे में नए दाखिला लेने वाले छात्रों को हॉस्टल आवंटित नहीं किया जा सकता है। नए सिरे से आवंटन करने के लिए छात्रावास खाली कराए जा रहे हैं। चीफ प्रॉक्टर प्रो. शैलेश मिश्र छात्रों को हॉस्टल खाली कराने के लिए 25 सितंबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद 26 सितंबर को छात्रों को हास्टल खाली करना होगा। इसके बाद नए सिरे से हॉस्टल का आवंटन किया जाएगा।
संपूर्णानंद के सहायक कुलसचिव ने अपने पद से दिया था इस्तीफा
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव कपिल किशोर लाल अंतत: विश्वविद्यालय से कार्यमुक्त हो गए। इस्तीफा देने के दो माह बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सहायक कुलसचिव को कार्यमुक्त किया। दो दिन पहले ही सहायक कुलसचिव ने कार्यमुक्त करने के लिए आत्मदाह तक की धमकी भी दी थी। आननफानन में विश्वविद्यालय ने कार्यमुक्त किया।
विश्वविद्यालय की ओर से कार्यमुक्त होने का आदेश मिलते ही कपिल किशोर लाल ने प्रयागराज में केंद्रीय महालेखाकार कार्यालय में प्रभागीय लेखा अधिकारी पद पर कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। वेतन विसंगतियों से क्षुब्ध होकर कपिल किशोर ने आठ जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इसकी प्रतिलिपि शासन को भेज दी थी।
खास बात है कि वह 13 जनवरी को संस्कृत विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव पद पर कार्यभार ग्रहण किए थे। इससे पहले वह केंद्रीय महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) द्वितीय प्रयागराज में प्रभागीय लेखा अधिकारी पद पर कार्यरत थे। कुलसचिव डा. ओमप्रकाश का कहना है कि उनकी नियुक्ति शासन से हुई थी। उन्होंने इस्तीफे की प्रतिलिपि शासन को भी भेजी थी। शासन की स्वीकृति मिलने में देरी के कारण उन्हें कार्यमुक्त करने में दो माह लग गए।