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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का हाल, कुलपति को छोड़ पूरा विश्वविद्यालय धरने पर

Fri, 13 Oct 2017 10:38 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 13 Oct 2017 10:38 AM IST
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sampurnanand sanskrit university strike going countinuesly
प्राध्यापक, अधिकारी, कर्मचारी और छात्र दे रहे धरना - फोटो : अमर उजाला
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय पर लगातार पांच दिनों से धरना-प्रदर्शन जारी है। इसके चलते विश्वविद्यालय में पठन-पाठन के साथ ही प्रशासनिक काम-काज ठप है।
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परिसर में अलग-अलग पांच स्थानों पर धरना और नारेबाजी के बीच कुलपति को छोड़कर हर कोई अपना विरोध जता रहा है। शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और छात्र अपनी-अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे रहे।
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छात्रों का एक गुट छात्र समस्याओं के समाधान के लिए धरने पर है। वहीं दूसरा गुट कुलसचिव को कार्यमुक्त करने और छात्रावास सहित अन्य समस्याओं के समाधान के लिए मोर्चा खोले हुए है। शिक्षक इस आरोप को लेकर धरने पर हैं कि कुलपति द्वारा बिना परिनियम में संशोधन के नियुक्ति की जा रही है।
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कर्मचारियाें की नाराजगी वेतन का भुगतान न होने और प्रमोशन आदि में विसंगतियों को लेकर है। जबकि सोमवार से धरने पर बैठे अधिकारी व्यवस्थागत खामियों से विश्वविद्यालय का कामकाज प्रभावित होने से नाराज हैं।

मुंह पर काली पट्टी लगाकर धरने पर बैठे सुरक्षाधिकारी, संपत्ति अधिकारी, संगणक प्रभारी सहित अन्य अधिकारियों ने मांग की कि जल्द से जल्द परिसर का माहौल सामान्य किया जाए और इसके लिए कुलपति तत्काल कदम उठाएं।

मामले में कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दुबे ने कहा है कि राजभवन से निर्देश मिलते ही नियुक्तियां रोक दी जाएंगी। मैंने सभी से आग्रह किया है कि विरोध प्रदर्शन बंद करें और दीक्षांत की तैयारियों में जुट जाएं। 

टल सकता है दीक्षांत समारोह

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परिसर में पठन-पाठन और काम रहा ठप, वापस लौटे छात्र - फोटो : अमर उजाला
संस्कृत विश्वविद्यालय में शिक्षक, कर्मचारियों और छात्रों के धरने के कारण दीक्षांत की तैयारियां भी नहीं शुरू हो सकी हैं। ऐसे में 27 अक्तूबर को प्रस्तावित दीक्षांत समारोह टलने की आशंका नजर आ रही है। कुलपति ने इस मामले की पूरी जानकारी राजभवन को भी दी है।

विश्वविद्यालय में 27 अक्तूबर को दीक्षांत समारोह की तिथि तय की गई है। समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की संस्तुति राजभवन और विश्वविद्यालय ने की थी।

हालांकि अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय से इस मामले में सहमति नहीं मिल सकी है। इधर, चार दिनों से चल रहे धरना-प्रदर्शन के चलते समारोह पर आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हैं। कुलपति ने भी स्वीकार किया कि दीक्षांत की तिथि आगे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा हैै।
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