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संपूर्णानंद संस्कृत विविः 24 साल के परीक्षा परिणाम संदिग्ध, फंसा हजारों विद्यार्थियों का भविष्य
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 20 Aug 2017 10:10 PM IST
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
- फोटो : file
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों का भविष्य सत्यापन के फेर में फंस गया है। विश्वविद्यालय ने परीक्षा अभिलेखों में व्यापक पैमाने पर की गई छेड़छाड़ के आधार पर 24 साल के परीक्षा परिणाम को संदिग्ध की श्रेणी में डाल दिया है।
इस अवधि के जो भी रिजल्ट सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय में आ रहे हैं, उन्हें न तो वैध बताया जा रहा है न अवैध, ‘संदिग्ध’ लिखकर संबंधित संस्थान को लौटा दिया जा रहा है। ऐसे में संस्थान भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे अभ्यर्थी की डिग्री को सही मानें या गलत। सत्यापन के इस पेच से हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है।
दरअसल, विश्वविद्यालय के परीक्षा अभिलेखों में व्यापक पैमाने पर छेड़छाड़ की गई है। परीक्षा विभाग के मुताबिक 1985 से 2009 तक टेबुलेशन रजिस्टर में पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री और आचार्य के करीब हजारों परीक्षार्थियों के अंकपत्र में गड़बड़ियां हैं।
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टेबुलेशन रजिस्टर के पन्ने बदलकर कई परीक्षार्थियों को सीधे अंतिम खंड के अंकपत्र और प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए हैं। परीक्षा अभिलेखों में व्यापक पैमाने पर छेड़छाड़ और कटिंग की गई है। कटिंग पर किसी जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी के हस्ताक्षर तक नहीं हैं।
इसे देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस अवधि के विद्यार्थियों का रिजल्ट संदिग्ध की श्रेणी में डाल दिया है। छात्रों की संख्या के बारे में भी विश्वविद्यालय को पता नहीं है। हर साल विद्यार्थियों की संख्या हजारों में होती है।
इस लिहाज से 24 साल के आंकड़े का अनुमान लगाया जाए तो यह संख्या लाखों में पहुंच जाएगी। इस मामले में पिछले दिनों एसआईटी ने भी पत्र भेजकर विश्वविद्यालय की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और प्रक्रिया की पूरी जानकारी मांगी थी।
सीबीसीआईडी सहित विभिन्न जांचों में भी अभिलेखों में गड़बड़ी का खुलासा हो चुका है। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन इस समस्या का कोई समाधान अब तक नहीं निकाल पाया है।
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इस अवधि के जो भी रिजल्ट सत्यापन के लिए विश्वविद्यालय में आ रहे हैं, उन्हें न तो वैध बताया जा रहा है न अवैध, ‘संदिग्ध’ लिखकर संबंधित संस्थान को लौटा दिया जा रहा है। ऐसे में संस्थान भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे अभ्यर्थी की डिग्री को सही मानें या गलत। सत्यापन के इस पेच से हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लग गया है।
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दरअसल, विश्वविद्यालय के परीक्षा अभिलेखों में व्यापक पैमाने पर छेड़छाड़ की गई है। परीक्षा विभाग के मुताबिक 1985 से 2009 तक टेबुलेशन रजिस्टर में पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा, शास्त्री और आचार्य के करीब हजारों परीक्षार्थियों के अंकपत्र में गड़बड़ियां हैं।
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टेबुलेशन रजिस्टर के पन्ने बदलकर कई परीक्षार्थियों को सीधे अंतिम खंड के अंकपत्र और प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए हैं। परीक्षा अभिलेखों में व्यापक पैमाने पर छेड़छाड़ और कटिंग की गई है। कटिंग पर किसी जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी के हस्ताक्षर तक नहीं हैं।
इसे देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस अवधि के विद्यार्थियों का रिजल्ट संदिग्ध की श्रेणी में डाल दिया है। छात्रों की संख्या के बारे में भी विश्वविद्यालय को पता नहीं है। हर साल विद्यार्थियों की संख्या हजारों में होती है।
इस लिहाज से 24 साल के आंकड़े का अनुमान लगाया जाए तो यह संख्या लाखों में पहुंच जाएगी। इस मामले में पिछले दिनों एसआईटी ने भी पत्र भेजकर विश्वविद्यालय की सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और प्रक्रिया की पूरी जानकारी मांगी थी।
सीबीसीआईडी सहित विभिन्न जांचों में भी अभिलेखों में गड़बड़ी का खुलासा हो चुका है। बावजूद इसके विश्वविद्यालय प्रशासन इस समस्या का कोई समाधान अब तक नहीं निकाल पाया है।
तीन साल पहले जारी किया था नया रजिस्टर बनाने का निर्देश
अभिलेखों में हेराफेरी को देखते हुए विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने तीन वर्ष पूर्व कंप्यूटर में दर्ज रिकार्ड से नया टेबुलेशन रजिस्टर बनाने का निर्देश दिया था। कार्य परिषद के निर्देश के बावजूद अब तक अभिलेखों का नवीनीकरण नहीं किया जा सका है।
विश्वविद्यालय के टेबुलेशन रजिस्टर दो प्रतियों में बने हुए हैं। इसके बावजूद कई परीक्षार्थियों के विवरण सिर्फ एक प्रति में संशोधित किए गए हैं। इसके चलते भी सैकड़ों परीक्षार्थियों के अंकपत्र संदिग्ध श्रेणी में शामिल कर दिए गए हैं।
मामले में परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजनाथ ने कहा कि संदिग्ध परीक्षाफल एक बड़ी समस्या बन गए हैं। इस प्रकरण को जल्द ही परीक्षा समिति में रखा जाएगा ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। वहीं अभिलेखों के नवीनीकरण के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
विश्वविद्यालय के टेबुलेशन रजिस्टर दो प्रतियों में बने हुए हैं। इसके बावजूद कई परीक्षार्थियों के विवरण सिर्फ एक प्रति में संशोधित किए गए हैं। इसके चलते भी सैकड़ों परीक्षार्थियों के अंकपत्र संदिग्ध श्रेणी में शामिल कर दिए गए हैं।
मामले में परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजनाथ ने कहा कि संदिग्ध परीक्षाफल एक बड़ी समस्या बन गए हैं। इस प्रकरण को जल्द ही परीक्षा समिति में रखा जाएगा ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके। वहीं अभिलेखों के नवीनीकरण के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।