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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Sampurnanand first Sanskrit University of india where Dr. Ambedkar Chair will be established

SSVV: देश का पहला संस्कृत विश्वविद्यालय जहां स्थापित होगी डॉ. आंबेडकर चेयर, इन दो कोर्स को मिली मंजूरी

Tue, 13 Aug 2024 12:57 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 13 Aug 2024 12:57 PM IST
सार

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में स्पेनिश डिप्लोमा और मंदिर प्रबंधन डिप्लोमा का संचालन होगा। इसके लिए विद्या परिषद की बैठक में मंजूरी मिली। इस दौरान पाठ्यक्रम और अंकपत्र में पौराहित्य-कर्मकांड अंकित करने पर सहमति बनी।

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Sampurnanand first Sanskrit University of india where Dr. Ambedkar Chair will be established
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश के 18 संस्कृत विश्वविद्यालयों में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय पहला विश्वविद्यालय होगा जहां डॉ. बीआर आंबेडकर चेयर की स्थापना की जाएगी। विश्वविद्यालय में दो वर्षीय स्पेनिश डिप्लोमा और मंदिर प्रबंधन का डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही संस्कृत महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों का भी स्थानांतरण किया जाएगा।

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सोमवार को कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई विद्यापरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर पेश प्रस्ताव पर सर्व सम्मति से मुहर लग गई। योग साधना केंद्र में विद्यापरिषद की बैठक में कुलपति ने कहा कि डॉ. बीआर आंबेडकर चेयर के माध्यम से आंबेडकर के संस्कृत में योगदान, व्यक्तित्व और समावेशी विकास के साथ सामाजिक न्याय पर उनके कृतित्व पर अध्ययन और शोध किया जाएगा। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय देश का पहला विश्वविद्यालय होगा जहां यह चेयर स्थापित होगी। वेद विभाग की ओर से शास्त्री/आचार्य की डिग्री व अंक पत्र में पौरोहित्य-कर्मकांड अंकित किए जाने पर स्वीकृत दी गई।
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हिंदू अध्ययन के पाठ्यक्रम को तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग के अंतर्गत चलाने की स्वीकृति प्रदान की गई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से जारी एसओपी के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा संचालित शास्त्री-आचार्य के पाठ्यक्रमों की संरचना एवं अंकपत्र के प्रारूप के अनुमोदन पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। द्विवर्षीय स्पेनिश भाषा डिप्लोमा पाठ्यक्रम और मंदिर प्रबंधन में डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करने की स्वीकृति दी गई।

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संस्कृत महाविद्यालयों में अध्यापकों के स्थानांतरण के लिए कमेटी द्वारा प्रस्तुत नियामक-नीति पर सहमति बनी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में स्थानांतरण नीति लागू करने के लिए गठित समिति की संस्तुति को शर्तों के अनुसार स्वीकार किया गया। इसमें निर्धारित किया गया कि सभी प्राध्यापकों को ग्रामीण क्षेत्रों में पांच वर्ष कार्य किया होना आवश्यक होगा। केंद्रीय तिब्बती उच्च शिक्षा संस्थान के पूर्व मध्यमा/उत्तर मध्यमा के पाठ्यक्रम को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम के बराबर समकक्षता प्रदान की गई।

देश विदेश की छह संस्थाओं के अनुबंध पर लगी विद्यापरिषद की मुहर

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के देश और विदेश के विश्वविद्यालयों के साथ हुए समझौतों को भी स्वीकृत किया गया। इसमें महावीर धम्म-विनय विश्वविद्यालय, ह्मवबी नगर, योंङ्गांग, म्यामार के साथ शैक्षणिक, शोध, प्रकाशन एवं सांस्कृतिक अनुबंध पर मुहर लगी। इसी तरह कविकुलगुरु कालीदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक महाराष्ट्र, सेन्ट्रो लैटिनो अमेरिकानो डी एस्टुडियोस, वेदिकोश, इक्वाडोर, इंस्टिट्यूटो सर्वेटस नई दिल्ली और संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान के बीच हुए समझौतों पर भी मुहर लगी है। बैठक में कुलसचिव राकेश कुमार, प्रो. केके शर्मा, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो. जितेंद्र कुमार, प्रो. सुधाकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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