संपूर्णानंद में प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़े का मामला: सरकार से आज चर्चा के बाद कार्य परिषद लेगी अंतिम निर्णय
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वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़े मामले में अब शासन से चर्चा के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को कार्यपरिषद की बैठक में एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर होने वाली कार्रवाई पर कोई चर्चा नहीं हुई। कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने बताया कि शासन स्तरीय बैठक के बाद अगली कार्यपरिषद में इस मामले पर निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़े में दो कुलपति सहित 19 अधिकारी व कर्मचारियों को एसआईटी ने दोषी ठहराया था।
सोमवार को कुलपति की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में कुलसचिव राजबहादुर ने बताया कि प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़े के मामले में शासन स्तर से मंगलवार को लखनऊ में बैठक बुलाई गई है। कार्यपरिषद ने विश्वविद्यालय में चार दशक से बंद अग्निहोत्र को आरंभ करने पर विचार किया। वहीं, कार्यपरिषद ने वित्त समिति की सिफारिशों पर अंतिम मुहर लगा दी।
फिल्म की शूटिंग के लिए अब देने होंगे पांच लाख
वित्त समिति की सिफारिशों को लागू होने के बाद अब महाविद्यालय सत्यापन शुल्क को दो सौ रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया। महाविद्यालयों को सत्यापन केलिए पांच गुना अधिक शुल्क जमा करना होगा। अंकपत्रों की द्वितीय प्रति के लिए 100 रुपये की जगह 500 रुपये तथा उपाधिपत्र की द्वितीय प्रति के लिए 300 की जगह 500 रुपया शुल्क देना होगा। विश्वविद्यालय परिसर में फिल्म की शूटिंग का शुल्क पांच हजार से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किए गए हैं।
वहीं शताब्दी भवन की बुकिंग को 75 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये किया गया है। इसके अलावा सफाई व बिजली केलिए अतिरिक्त पांच हजार रुपये जमा कराने होंगे। हालांकि विश्वविद्यालय अधिकारी और कर्मचारियों को इस बढ़ोत्तरी से मुक्त रखा गया है। आगामी सत्र में 26 करोड़ 95 लाख 49 हजार 837 रुपये के घाटे का बजट पेश किया गया। वित्त समिति ने विश्वविद्यालय की आय छह करोड़ तीन लाख 26 हजार, शासन से प्राप्त 27 करोड़ छह लाख 63 हजार और निजी स्त्रोत से आय 37 लाख 60 हजार का बजट पेश किया। विश्वविद्यालय की कुल आय 33 करोड़ 47 लाख 49 हजार 740 रुपये तथा कुल व्यय 60 करोड़ 42 लाख 99 हजार 577 रुपये दर्शाई गई है।