{"_id":"61a28b73c1ef391dc860f6b4","slug":"salute-to-the-art-of-mahadev-done-on-the-banks-of-the-ganges-varanasi-news-vns6248952164","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा के तट पर किया महादेव की कला को नमन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा के तट पर किया महादेव की कला को नमन
विज्ञापन
ठुमरी सम्राट पं. महादेव प्रसाद मिश्र की स्मृति में गंगा के तट पर संगीत की रसधार प्रवाहित हुई। संस्कृति विभाग, संस्कार भारती, पं. महादेव प्रसाद मिश्र संगीत संस्थान एवं सुबह ए बनारस के तत्वावधान में शनिवार को अस्सी घाट पर पं. महादेव मिश्र स्मृति संगीत समारोह के प्रथम चरण की शुरूआत हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति प्रो. चितरंजन ज्योतिषी एवं विशिष्ट अतिथि संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. राजेश्वर आचार्य ने दीप जलाकर शुभारंभ किया।
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि पं. महादेव मिश्र साक्षात महादेव शंकर जैसे फक्कड़ स्वभाव एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। प्रो. चितरंजन ने विद्यार्थियों को उनकी जीवनी पढ़ने की सलाह दी। इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंबरीष चंचल को पं. महादेव मिश्र स्मृति सम्मान दिया गया। इसके बाद सांगीतिक कार्यक्रम की शुरूआत पं. महादेव प्रसाद मिश्र संगीत संस्थान के विद्यार्थियों ने गणेश वंदना गाइये गणपति जगवंदन...से की। पं. महादेव प्रसाद मिश्र के प्रपौत्र शुभ मिश्र ने राग मालकौंस में तीनताल में निबद्ध रचना आए सुर के पंछी आए... सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। तबले पर सिद्धांत मिश्र, सारंगी पर आशीष मिश्र ने संगत की। इसके बाद पं. महादेव मिश्र के पुत्र व शिष्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने मंच संभाला। उन्होंने राग खमाज में निबद्ध अपने पिता की ठुमरी व्याकुल भई ब्रज बाम...से शुरूआत की। अगली प्रस्तुति रही बंदिश की ठुमरी की। पं गणेश ने अंत में पं महादेव के एक और प्रिय दादरा से समापन किया। इसके बाद दिल्ली से पधारे बांसुरी वादक पं. राजेंद्र प्रसन्ना ने मंच संभाला। तबले पर पं. पुंडलिक कृष्ण भागवत और बांसुरी पर प्रांजल ने संगत की। अगले कार्यक्रम में युवा वादक शिवांग एवं अभिषेक मिश्र का युगल सितार वादन हुआ। तबला संगति श्रीकांत मिश्र की रही। अंतिम प्रस्तुति सौरव एवं गौरव मिश्र के युगल कथक की रही। दोनों कलाकरों ने बनारस घराने के पारंपरिक कथक की प्रस्तुति के साथ-साथ आनंद तांडव की भावपूर्ण प्रस्तुति से सबका हृदय मुग्ध किया। इस दौरान अतिथियों का स्वागत पं. गणेश प्रसाद मिश्र और धन्यवाद पं. प्रमोद मिश्र ने किया। मौके पर समाजसेवी दीनदयाल, डॉ. रत्नेश वर्मा मौजूद रहे।
विज्ञापन
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष प्रो. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि पं. महादेव मिश्र साक्षात महादेव शंकर जैसे फक्कड़ स्वभाव एवं बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। प्रो. चितरंजन ने विद्यार्थियों को उनकी जीवनी पढ़ने की सलाह दी। इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंबरीष चंचल को पं. महादेव मिश्र स्मृति सम्मान दिया गया। इसके बाद सांगीतिक कार्यक्रम की शुरूआत पं. महादेव प्रसाद मिश्र संगीत संस्थान के विद्यार्थियों ने गणेश वंदना गाइये गणपति जगवंदन...से की। पं. महादेव प्रसाद मिश्र के प्रपौत्र शुभ मिश्र ने राग मालकौंस में तीनताल में निबद्ध रचना आए सुर के पंछी आए... सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। तबले पर सिद्धांत मिश्र, सारंगी पर आशीष मिश्र ने संगत की। इसके बाद पं. महादेव मिश्र के पुत्र व शिष्य पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने मंच संभाला। उन्होंने राग खमाज में निबद्ध अपने पिता की ठुमरी व्याकुल भई ब्रज बाम...से शुरूआत की। अगली प्रस्तुति रही बंदिश की ठुमरी की। पं गणेश ने अंत में पं महादेव के एक और प्रिय दादरा से समापन किया। इसके बाद दिल्ली से पधारे बांसुरी वादक पं. राजेंद्र प्रसन्ना ने मंच संभाला। तबले पर पं. पुंडलिक कृष्ण भागवत और बांसुरी पर प्रांजल ने संगत की। अगले कार्यक्रम में युवा वादक शिवांग एवं अभिषेक मिश्र का युगल सितार वादन हुआ। तबला संगति श्रीकांत मिश्र की रही। अंतिम प्रस्तुति सौरव एवं गौरव मिश्र के युगल कथक की रही। दोनों कलाकरों ने बनारस घराने के पारंपरिक कथक की प्रस्तुति के साथ-साथ आनंद तांडव की भावपूर्ण प्रस्तुति से सबका हृदय मुग्ध किया। इस दौरान अतिथियों का स्वागत पं. गणेश प्रसाद मिश्र और धन्यवाद पं. प्रमोद मिश्र ने किया। मौके पर समाजसेवी दीनदयाल, डॉ. रत्नेश वर्मा मौजूद रहे।
विज्ञापन