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UP: चार लाख मंदिरों को कब्जे से मुक्त करे सरकार, संतों ने किया आह्वान; मथुरा-काशी-ज्ञानवापी पर मांगा अपना हक

Sun, 15 Jun 2025 05:19 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 15 Jun 2025 05:19 AM IST
सार

अखिल भारतीय संत समिति के कार्यकारिणी बैठक में काशी के संतों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। देशभर के संतों ने मंदिरों को अपने हक में लेने की बात कही।

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Saints appealed to government to free four lakh temples from occupation demanded rights
अखिल भारतीय संत समिति की बैठक को संबोधित करते महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वृंदावन में चल रहे अखिल भारतीय संत समिति के कार्यकारिणी व संत सम्मेलन में साधु-संतों ने सनातन को आगे बढ़ाने मंथन किया। काशी के संत भी पहुंचे हैं। उन्होंने अयोध्या की तरह ही मथुरा और काशी के ज्ञानवापी को अपने हक में लेने जोर दिया।

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उन्होंने केंद्र सरकार के ऑपरेशन सिंदूर की सराहना की और संत समाज के प्रधानमंत्री के साथ हमेशा खड़ा रहने पर सहमति जताई। साथ ही बांकेविहारी कॉरिडोर का समर्थन किया और हिंदुओं के देशभर में चार लाख मंदिरों को सरकारी कब्जे से कानून बनाकर वापस करने की मांग की।
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दो दिवसीय सम्मेलन में काशी पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर बालकदास महाराज, अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री जितेंद्रानंद महाराज आदि शामिल हुए। संतों ने कहा कि सेना कैसे लड़ेगी, किस हथियार और कुटनीति से युद्ध करेगी, कब सीजफायर होगा, यह समाज में चर्चा का नहीं, रणनीति का विषय है। इसके लिए पीएम और उनके जिम्मेदार मंत्रालय और मंत्रियों का काम है। हां, हमें युद्ध के समय इसका एकजुट होना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि वक्त वोर्ड एक्ट की आड़ में देश को अशांत करने वाली राष्ट्रविरोधी ताकतों को हिंदू जवाब देंगे। कहा, सरकार द्वारा मंदिरों के कॉरिडोर बनाने के पक्ष खड़े हैं, लेकिन मंदिरों के राग, भोग व पूजा परंपरा में किसी तरह की सरकारी हस्तक्षेप ठीक नहीं है। अब हिंदू समाज जागरूक हो चुका है। 

मंदिरों के चढ़ावे के पैसे से हिंदुओं के विकास के लिए क्या कार्य हो रहे हैं, उसे बताना होगा। इस दौरान नई कार्यकारिणी का विस्तार किया गया। अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अविचल दास महाराज ने की। श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज, स्वामी वासुदेवानंद महाराज, हंसानंद तीर्थ, यत्रीद्रानंद गिरि, रामनंदाचार्य, द्वाराचार्य आदि साधु-संत पहुंचे थे।

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