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मोहन भागवत ने दिया संदेश, अपनी संस्कृति का प्रचार बढ़ाएं, कुरीतियां मिटाएं
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 14 Nov 2018 11:01 AM IST
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मोहन भागवत
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बनारस में छह दिवसीय प्रचारक वर्ग शिविर के तीसरे दिन मंगलवार को सामाजिक कुरीतियों, स्वयंसेवक विकास एवं अस्पृश्यता पर मंथन हुआ। सर संघ चालक मोहन भागवत ने बौद्धिक सत्र में अपनी संस्कृति के प्रचार-प्रसार करने का संदेश दिया।
मंगलवार को सुबह की शाखा के बाद दो सत्रों में संघ प्रमुख की मौजूदगी में मंथन हुआ। सांध्यकालीन शाखा के बाद एक और सत्र चला। सांध्यकालीन शाखा के बाद संघ प्रमुख की राष्ट्रीय स्तर के प्रचारकों के साथ चुनिंदा प्रचारकों संग बैठक हुई।
पढ़ें: आरएसएस प्रमुख ने दिया संघ के विस्तार का संदेश, प्रचारकों से भरवाया गया फीडबैक फार्म
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इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं का आचरण धर्मनिष्ठ हो। इस परिकल्पना को साकार करने और पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव कम करने के लिए सनातनी संस्कृति को और प्रचारित करने को कहा गया।
भारतीय संस्कृति के तमाम पहलुओं पर परस्पर संवाद स्थापित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही राष्ट्र निर्माण में जो भूमिका संघ की रही है, उसका मुख्य केंद्र में युवाओं को रखने पर विचार-विमर्श हुआ। छुआछूत और जातिगत भेदभाव दूर करने के लिए जन जागृति अभियान चलाने की सलाह पर सहमति बनी।
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मंगलवार को सुबह की शाखा के बाद दो सत्रों में संघ प्रमुख की मौजूदगी में मंथन हुआ। सांध्यकालीन शाखा के बाद एक और सत्र चला। सांध्यकालीन शाखा के बाद संघ प्रमुख की राष्ट्रीय स्तर के प्रचारकों के साथ चुनिंदा प्रचारकों संग बैठक हुई।
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इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं का आचरण धर्मनिष्ठ हो। इस परिकल्पना को साकार करने और पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव कम करने के लिए सनातनी संस्कृति को और प्रचारित करने को कहा गया।
भारतीय संस्कृति के तमाम पहलुओं पर परस्पर संवाद स्थापित करने पर भी बल दिया गया। साथ ही राष्ट्र निर्माण में जो भूमिका संघ की रही है, उसका मुख्य केंद्र में युवाओं को रखने पर विचार-विमर्श हुआ। छुआछूत और जातिगत भेदभाव दूर करने के लिए जन जागृति अभियान चलाने की सलाह पर सहमति बनी।
कुरीतियों से व्यक्ति निर्माण में बाधा आ रही है
कहा गया कि जिन कुरीतियों से व्यक्ति निर्माण में बाधा आ रही है, उन्हें दूर करने के लिए गांव-गांव तक जागरूक करने की आवश्यकता है। कारण बताया गया कि राष्ट्र निर्माण में सर्व समाज की भूमिका है।
पढ़ें: वाराणसी पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत, कई राजनैतिक मायने रखता है यह दौरा
इसलिए संकीर्ण विचारों से उठ कर स्वस्थ समाज और सबल राष्ट्र का निर्माण करना है। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए लोगों को जागरूक करने को कहा गया। साथ ही माना गया कि इसके लिए सुयोग्य की तलाश केवल संघ के माध्यम से हो सकती है।
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