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वाराणसी पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत, कई राजनैतिक मायने रखता है यह दौरा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 11 Nov 2018 09:01 PM IST
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mohan bhagwat
- फोटो : amar ujala
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत रविवार शाम साढ़े छह बजे छह दिवसीय प्रवास के लिए बनारस पहुंचे। कोइराजपुर के निर्माणाधीन संत अतुलानंद स्कूल में आयोजित प्रचारक वर्ग शिविर में उनके पहुंचने के बाद छह दिवसीय शिविर के पहले दिन उन्होंने प्रचारकों से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण सहित कई बिंदुओं पर मंथन किया। सूत्रों की मानें तो इस दौरान संघ की 2019 की कार्ययोजना पर भी विचार-विमर्श शुरू हो गया है।
आयोजन स्थल पर पहुंचने के बाद संघ प्रमुख प्रचारकों का अभिवादन स्वीकार करने के बाद अपने लिए निर्धारित कक्ष में चले गए। इसके बाद उनके बौद्धिक सत्र का शुभारंभ हुआ। संघ प्रमुख ने कार्ययोजना के बाबत देश भर से आए करीब ढाई सौ प्रचारकों के साथ विमर्श किया।
उन्होंने अगले पांच दिन तक अलग-अलग चलने वाले शिविर के सत्रों की कार्य सूची मांगी। बताया गया कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर में माहौल बनाने, नोटा का विरोध, केंद्र सरकार के अब तक के कार्यकाल के कामकाज के बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी। इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक शिविर में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने के आसार हैं।
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आयोजन स्थल पर पहुंचने के बाद संघ प्रमुख प्रचारकों का अभिवादन स्वीकार करने के बाद अपने लिए निर्धारित कक्ष में चले गए। इसके बाद उनके बौद्धिक सत्र का शुभारंभ हुआ। संघ प्रमुख ने कार्ययोजना के बाबत देश भर से आए करीब ढाई सौ प्रचारकों के साथ विमर्श किया।
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उन्होंने अगले पांच दिन तक अलग-अलग चलने वाले शिविर के सत्रों की कार्य सूची मांगी। बताया गया कि राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर में माहौल बनाने, नोटा का विरोध, केंद्र सरकार के अब तक के कार्यकाल के कामकाज के बिंदुओं पर चर्चा की जाएगी। इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक शिविर में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने के आसार हैं।
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काशी से बनाया जाएगा राम मंदिर निर्माण का माहौल
काशी से अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का माहौल बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत का छह दिवसीय काशी प्रवास रविवार से शुरू हो चुका है। इस दौरान राम मंदिर समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। संघ से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भगवान श्रीराम टेंट में रहेंगे या मंदिर में, इस बारे में विचार-विमर्श कर नई रूपरेखा बनाई जा सकती है। केंद्र और राज्य सरकार के अब तक के कामकाज और वातावरण पर भी गहन मंत्रणा की जाएगी।
संघ का मानना है कि मौजूदा वक्त में हिंदू हितों का अनादर करके कोई पार्टी राजनीति की बुलंदी नहीं छू सकती है। मंदिर निर्माण राष्ट्रीय मुद्दा है, किसी पार्टी और दल का नहीं। इस विचार को देशभर में पहुंचाया जाएगा। 25 नवंबर को संघ के कई अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ता अयोध्या जा रहे हैं। काशी के साधु संत और हिंदू संगठनों के लोग भी इनके साथ होंगे।
काशी में मंदिर निर्माण से जुड़ी नकारात्मक अवधारणा को तोड़ने के लिए मूल वैचारिकी की रचना होगी। ठीक वैसे ही जिस प्रकार सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया था, संघ राम मंदिर के बारे में प्रधानमंत्री से ऐसी ही अपेक्षा कर रहा है।
संघ का मानना है कि मौजूदा वक्त में हिंदू हितों का अनादर करके कोई पार्टी राजनीति की बुलंदी नहीं छू सकती है। मंदिर निर्माण राष्ट्रीय मुद्दा है, किसी पार्टी और दल का नहीं। इस विचार को देशभर में पहुंचाया जाएगा। 25 नवंबर को संघ के कई अनुषांगिक संगठनों के कार्यकर्ता अयोध्या जा रहे हैं। काशी के साधु संत और हिंदू संगठनों के लोग भी इनके साथ होंगे।
काशी में मंदिर निर्माण से जुड़ी नकारात्मक अवधारणा को तोड़ने के लिए मूल वैचारिकी की रचना होगी। ठीक वैसे ही जिस प्रकार सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया था, संघ राम मंदिर के बारे में प्रधानमंत्री से ऐसी ही अपेक्षा कर रहा है।
शिवनारायण को धर्माचार्य संपर्क प्रमुख की कमान
सूत्रों ने बताया कि संघ ऐसा वातावरण बनाना चाहता है कि ताकि विधेयक या अध्यादेश से पहले ही देश का माहौल राममय हो जाए। योजना को सिरे चढ़ाने के लिए संघ ने अपने तेज तर्रार प्रचारक लगाए हैं। इसके तहत शिवनारायण को धर्माचार्य संपर्क प्रमुख बनाया गया है। पहले वह पहले उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक थे।
मंथन के प्रमुख मुद्दे
शिविर में विभिन्न सत्रों में कई बिंदुओं पर मंथन होगा। जानकारी के मुताबिक इनमें सामाजिक व्यवहार, कुंभ और कुंभ से पूर्व लगने वाले पर्यावरण, युवा कुंभ, कुंभ को सांस्कृतिक राष्ट्रवादी पर्व बनाने, राम मंदिर निर्माण, नोटा का विरोध, कौशल विकास व युवाओं को रोजगार, गांव के लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराने, हिंदुत्व, तीन तलाक, अन्य धर्मों में जाकर सामाजिक सुधार करने और लक्ष्य 2019 प्रमुख हैं।