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काली कमाई का कुबेरः पूर्वांचल का 'यादव सिंह' हर माह करता था इतने करोड़ की वसूली

Sun, 11 Jun 2017 09:22 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 11 Jun 2017 09:22 PM IST
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rs yadav illeagal recovery of two crore per month
एआरटीओ आरएस यादव का गोरखपुर वाला मकान - फोटो : अमर उजाला
 अवैध वसूली के आरोप में गिरफ्तार चंदौली के निलंबित एआरटीओ (प्रवर्तन) आरएस यादव पिछले 19 वर्षों से वाराणसी मंडल में ही जमा हुआ था। सरकार चाहे जिसकी भी रही हो, सड़क पर सिक्का आरएस यादव का ही चलता था। लेकिन योगी सरकार में कोई जोर नहीं चला।
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आरएस यादव पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। नौबतपुर चेकपोस्ट से अब तक वही ओवरलोड ट्रक पास होते रहे जिसे आरएस यादव चाहते थे। 
पुलिस की जांच में पता चला है कि खास तौर पर पांच बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनियों के ढाई हजार ओवरलोड ट्रकों को वे हर महीने नौबतपुर चेकपोस्ट से पास कराते रहे। एक ट्रक से सात हजार रुपये की वसूली की जाती थी।
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केवल इन्हीं ट्रकों से हर माह पौने दो करोड़ रुपये की अवैध वसूली का खुलासा हुआ है। इनके अलावा भी सैकड़ों ओवरलोड ट्रकों से वसूली कर उन्हें पास कराया जाता रहा है। आरएस यादव की गाड़ी में मिली डायरी में पिछले महीने ढाई हजार ट्रकों से वसूली का विवरण चौंकाने वाला है।
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गिरफ्तार एआरटीओ की गाड़ी से उनके चालक और एक दलाल को पुलिस ने बीते गुरुवार को ट्रकों से अवैध वसूली करते पकड़ा था।
करोड़ों का साम्राज्य खड़ा करने वाले आरएस यादव 23 साल पहले जल निगम में जेई हुआ करते थे।

चंदौली प्रशासन की जांच में फिलहाल इन तथ्यों का खुलासा हुआ है कि 1994 में पांच साल के लिए उन्हें प्रतिनियुक्ति पर संभागीय परिवहन कार्यालय वाराणसी में बतौर आरआई भेजा गया था।

बाद में शासन में पैरवी कर इन्होंने खुद को परिवहन विभाग में ही समायोजित करा लिया। इसी विभाग में प्रमोशन पाकर एआरटीओ बन गए। 1994 से 2017 तक की नौकरी में 19 साल तक उनका कार्यक्षेत्र वाराणसी और चंदौली ही रहा। बाकी के चार साल भी गाजीपुर और भदोही में गुजारे।

ज्यादातर नौकरी उन्होंने प्रवर्तन अधिकारी के रूप में ही की। सपा सरकार में एक कद्दावर मंत्री और बसपा सरकार में भी बड़े कद वाले एक मंत्री की पैरवी से उन्हें वाराणसी मंडल में अभयदान मिलता रहा।


पिछले बीस सालों में यादव ने वाराणसी समेत पूर्वांचल में करोड़ों की संपत्ति बना ली है। पूर्वांचल में ‘मोटी कमाई’ का सबसे बड़ा केंद्र चंदौली माना जाता है। यहां पोस्टिंग के लिए सत्ता तक सीधी पकड़ उनका सहारा बनी।
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