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Varanasi News: बरेका का फर्जी अधिकारी बनकर टेंडर के नाम पर 2.27 लाख की ठगी
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कोर्ट के आदेश पर सारनाथ थाने में दो आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना का फर्जी अधिकारी बनकर स्क्रैप का ठेका दिलाने के नाम पर 2.27 लाख रुपये की ठगी में दो आरोपियों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट के आदेश पर बुधवार को सारनाथ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। सारनाथ के हवेलिया में लोहिया नगर फेज-2 निवासी पीड़ित विवेक चौबे ने कोर्ट को बताया कि जुलाई 2024 में उनकी मुलाकात भेलूपुर निवासी आकर्ष जायसवाल के माध्यम से भगवानपुर लंका निवासी सुमित कुमार त्रिपाठी से हुई। आकर्ष ने सुमित को बरेका का बड़ा अधिकारी बताया था। सुमित ने विवेक को फर्जी पहचान पत्र और स्क्रैप टेंडर के फर्जी कागजात दिखाए। झांसा दिया कि बरेका का स्क्रैप संबंधी सारा काम उसी के अधीन है। इसके एवज में उसने पंद्रह लाख रुपये की मांग की थी। विवेक चौबे ने बताया कि माता प्रमिला चौबे के बैंक खाते से ढाई लाख रुपये सुमित को दिए। यह राशि 26 जुलाई 2024 और 2 अगस्त 2024 को यूपीआई और नकद दी गई। काफी समय बीतने के बाद भी स्क्रैप की आपूर्ति नहीं हुई। शक होने पर बरेका पहुंचकर छानबीन शुरू की। तब मालूम चला कि सुमित कुमार त्रिपाठी नाम का कोई व्यक्ति कार्यरत ही नहीं है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र दिखाकर लोगों से अवैध धन उगाही का धंधा चला रखा था। धोखाधड़ी का पता चलने पर आरोपियों ने पुलिस में शिकायत न करने की मिन्नतें कीं। सितंबर 2024 में दो किस्त में 23000 रुपये वापस भी किए। शेष 227000 रुपये आज तक नहीं दिए। पैसे मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी भी देते हैं। फरवरी और मार्च 2026 में पुलिस आयुक्त और सारनाथ पुलिस में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर आकर्ष जायसवाल और सुमित कुमार त्रिपाठी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना का फर्जी अधिकारी बनकर स्क्रैप का ठेका दिलाने के नाम पर 2.27 लाख रुपये की ठगी में दो आरोपियों के खिलाफ सीजेएम कोर्ट के आदेश पर बुधवार को सारनाथ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। सारनाथ के हवेलिया में लोहिया नगर फेज-2 निवासी पीड़ित विवेक चौबे ने कोर्ट को बताया कि जुलाई 2024 में उनकी मुलाकात भेलूपुर निवासी आकर्ष जायसवाल के माध्यम से भगवानपुर लंका निवासी सुमित कुमार त्रिपाठी से हुई। आकर्ष ने सुमित को बरेका का बड़ा अधिकारी बताया था। सुमित ने विवेक को फर्जी पहचान पत्र और स्क्रैप टेंडर के फर्जी कागजात दिखाए। झांसा दिया कि बरेका का स्क्रैप संबंधी सारा काम उसी के अधीन है। इसके एवज में उसने पंद्रह लाख रुपये की मांग की थी। विवेक चौबे ने बताया कि माता प्रमिला चौबे के बैंक खाते से ढाई लाख रुपये सुमित को दिए। यह राशि 26 जुलाई 2024 और 2 अगस्त 2024 को यूपीआई और नकद दी गई। काफी समय बीतने के बाद भी स्क्रैप की आपूर्ति नहीं हुई। शक होने पर बरेका पहुंचकर छानबीन शुरू की। तब मालूम चला कि सुमित कुमार त्रिपाठी नाम का कोई व्यक्ति कार्यरत ही नहीं है। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और पहचान पत्र दिखाकर लोगों से अवैध धन उगाही का धंधा चला रखा था। धोखाधड़ी का पता चलने पर आरोपियों ने पुलिस में शिकायत न करने की मिन्नतें कीं। सितंबर 2024 में दो किस्त में 23000 रुपये वापस भी किए। शेष 227000 रुपये आज तक नहीं दिए। पैसे मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी भी देते हैं। फरवरी और मार्च 2026 में पुलिस आयुक्त और सारनाथ पुलिस में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। सारनाथ थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर आकर्ष जायसवाल और सुमित कुमार त्रिपाठी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।