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Ropeway Project: रोपवे बनने से खत्म हो जाएंगे काशी विद्यापीठ के चार विभाग, भारत माता मंदिर के अस्तित्व पर भी संकट

Thu, 14 Jul 2022 12:04 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 14 Jul 2022 12:04 PM IST
सार

काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने बताया कि रोपवे परियोजना के तहत विश्वविद्यालय परिसर की भूमि में छह टॉवर और एक स्टेशन प्रस्तावित किया गया है। इसके कारण विश्वविद्यालय के कई विभाग प्रभावित होंगे।  

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Ropeway Project in varanasi Four departments of Kashi Vidyapith will end due to construction of ropeway Bharat Mata temple too
रोपवे (सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

वाराणसी कैंट स्टेशन से गोदौलिया तक बनने वाले रोपवे से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की सुरक्षा एवं भविष्य की रणनीति प्रभावित होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुलाधिपति व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व प्रदेश सरकार से इस मामले में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। रोपवे के लिए प्रस्तावित जमीन के कारण विश्वविद्यालय के कई विभाग प्रभावित होंगे।  

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कुलपति प्रो. एके त्यागी ने बताया कि रोपवे परियोजना के तहत विश्वविद्यालय परिसर की भूमि में छह टॉवर और एक स्टेशन प्रस्तावित किया गया है। इसके कारण विश्वविद्यालय का समाज विज्ञान संकाय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय, प्रशासनिक भवन, मानविकी संकाय, कुलपति आवास, अतिथि गृह, चित्रकला विभाग, भारत माता मंदिर की जमीन के साथ ही विभाग भी प्रभावित होंगे।
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विश्वविद्यालय का परिसर बहुत कम क्षेत्रफल में है और भवन भी छोटे-छोटे हैं। भविष्य में भवनों के विस्तार में बहुत मुश्किल होगी। रोपवे टॉवर बनने के कारण छात्रावास विस्तार की कार्ययोजना प्रभावित होगी। इसके साथ ही संकायों में नए पाठ्यक्रम संचालन के लिए नए कक्षों का निर्माण किया जाना है।

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विश्वविद्यालय परिसर में रोपवे स्टेशन बन जाएगा तो विश्वविद्यालय का चित्रकला विभाग प्रभावित हो जाएगा। साथ ही शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हो जाएंगी। इसके अलावा पूरे भारत में मात्र दो भारत माता के मंदिर उपलब्ध हैं। विश्वविद्यालय परिसर स्थित भारत माता मंदिर उत्कृष्ट नमूना है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से सैलानी आते हैं।

यदि विश्वविद्यालय में स्टेशन बनता है तो भारत माता मंदिर पर काफी प्रभाव पड़ेगा तथा उसके अस्तित्व पर संकट हो जाएगा। इस क्षेत्र में विश्वविद्यालय के आवासीय परिसर होने के कारण कुलपति आवास, महिला छात्रावास सहित अन्य आवासों की गोपनीयता एवं सुरक्षा व व्यवस्था भी प्रभावित होगी।

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