रोपवे : तीन स्टेशनों का 87 फीसदी काम पूरा, कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा पर लगाए गए उपकरण; जानें खास
वाराणसी में रोपवे को लेकर जनता में उत्साह बना हुआ है। ट्रायल के दाैरान आए दिन सोशल मीडिया पर वीडियो पर वायरल होने लगते हैं। कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा पर बन रहे स्टेशन लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हैं।
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Ropeway in Varanasi: रोपवे के पहले चरण के तहत हो रहे काम में पहले सेक्शन में तीन स्टेशन कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा का 87 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। वहीं, इन स्टेशनों पर लगाए जा रहे फसाड, इंटीरियर और उपकरणों के इंस्टालेशन का काम भी 98 फीसदी पूरा हो गया है। पहले फेज में कैंट से रथयात्रा तक का काम जून तक पूरा होना है।
नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश गौड़ ने बताया कि रोपवे स्टेशन का निर्माण और उपकरणों का इंस्टालेशन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो रहा है। पहले चरण के पहले सेक्शन में तीनों स्टेशनों का सिविल वर्क पूरा हो चुका है।
इंटीरियर और उपकरणों के इंस्टॉलेशन का कार्य विशेषज्ञों की देखरेख में चल रहा है। बताया कि कैंट रोपवे स्टेशन का काम लगभग 75 प्रतिशत, विद्यापीठ रोपवे स्टेशन का काम लगभग 95 प्रतिशत और रथयात्रा रोपवे स्टेशन का काम लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है।
विद्युत उपकेंद्र का निर्माण भी 80% पूरा
अधीक्षण अभियंता प्रदीप गोगानिया बताया कि रोप-वे विद्युत उपकेंद्र का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। निर्धारित समय पर उपकेंद्र का काम पूरा कराने का निर्देश दिया गया है। दूसरे सोर्स की हाईटेंशन लाइन का निर्माण भी जल्द शुरू हो जाएगा। बताया कि करीब 80 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। बताया कि ट्रायल के लिए बिजली विभाग ने लिंक लाइन का निर्माण पहले ही करा लिया था।
40 फीसदी तक हटा दिए गए बिजली के तार
गोदौलिया के पास हो रहे रोपवे निर्माण के मद्देनजर करीब एक महीने से बिजली के तारों को हटाने का काम किया जा रहा है। यहां पिलर निर्माण का काम लगभग पूरा हो गया है। विभाग के मुताबिक बिजली के तारों को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। अगले एक महीने में इसे हटाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।
प्रोजेक्ट पर एक नजर
- पहले चरण में 4 किलोमीटर के दायरे में रोप वे का संचालन शुरू होगा।
- कैंट स्टेशन से गोदौलिया चौराहे तक 5 स्टेशन और 29 टॉवर रहेंगे।
- लगभग 4 किलोमीटर के सफर को तय करने में 16 मिनट का समय लगेगा।
- 50 मीटर की ऊंचाई पर 150 ट्रॉली संचालित होंगी।
- एक ट्रॉली में 10 पैसेंजर बैठेंगे, जहां 1 घंटे में 600 ट्रॉलियों का संचालन दोनों तरफ से होगा. जिसमें 6000 यात्री सफर करेंगे।