Ropeway: हर 2 मिनट में मिलेगा गंडोला, एक घंटे में छह हजार लोग करेंगे यात्रा; पहले सेक्शन का 75 फीसदी काम पूरा
Ropeway News: वाराणसी में शुरू होने वाले रोपवे काे लेकर पर्यटकों और स्थानीय लोगों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। काम भी 75 प्रतिशत पूरा हो गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह काम मई तक पूरी हो जाएगा।
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Ropeway in Varanasi: रोपवे के पहले फेज के पहले सेक्शन का 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। मई तक काम पूरा होना प्रस्तावित है। रोपवे शुरू होने के बाद गोदौलिया से कैंट रेलवे स्टेशन पहुंचने में लगभग 16 मिनट लगेगा। एक दिशा में एक घंटे में 3000 लोग यात्रा कर सकेंगे।
यानी 6000 लोग दोनों दिशा से एक घंटे में आ जा सकेंगे। रोपवे चलने के दौरान हर देढ़ से दो मिनट के अंतराल में यात्रियों को गंडोला उपलब्ध रहेगा। मेट्रो की तर्ज पर इसका संचालन 16 घंटे किया जाएगा।
रोपवे से जुड़े एक अफसर ने बताया कि रोपवे यातायात के लिए जितना सुगम होगा उतना ही यात्रियों के लिए सुरक्षित भी होगा। आंधी, बरसात और कोहरा भी गंडोला की गति को रोक नहीं पाएंगे। 60 किमी प्रति घंटे की स्पीड से चल रही हवा में भी गंडोला सुरक्षित तरीके से चलता रहेगा।
इससे तेज चलने वाली आंधी में सेंसर अलर्ट कर देगा। ऐसे समय में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए गंडोला को गैरेज में पार्क कर दिया जाएगा। रोपवे की अत्याधुनिक तकनीक के चलते ठंड के दिनों में कोहरे और बारिश में भी रोपवे चल सकेगा। बिजली जाने पर खास तरह की बैकअप व्यवस्था रहेगी।
रोपवे को लेकर बढ़ा उत्साह
लगभग 45 से 50 मीटर की ऊंचाई से करीब 148 ट्रॉली कार चलेगी। एक ट्रॉली में 10 पैसेंजर सवार हो सकते हैं। दूसरे सेक्शन रथयात्रा से गोदौलिया तक सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। गोदौलिया पर एक तरफ पिलर तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है और अगले पंद्रह दिन में पिलर का काम पूरा हो जाएगा।
रथयात्रा होगी गंडोला की पार्किंग, सौर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा : पूरे दिन चलने के बाद जब रोपवे का संचालन बंद किया जाएगा तो सभी गंडोला रथयात्रा पर पार्क किए जाएंगे। इसकी पार्किंग रथयात्रा पर तैयार की जा रही है। वहीं, गंडोले के अंदर जलने वाली लाइटों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होगा। सभी गंडोले सौर ऊर्जा से लैस रहेंगे।
बिजली उपकेंद्र बनने में लग जाएंगे तीन महीने
रोपवे के लिए भारत माता मंदिर परिसर में बन रहे बिजली उपकेंद्र में अभी करीब तीन महीने तक का समय लगेगा। जब तक बिजली उपकेंद्र बनकर तैयार नहीं हो जाता, तब तक रोपवे का संचालन नहीं हो सकेगा। बीच-बीच में ट्रायल तो किया जाएगा लेकिन सुचारू रूप से संचालन के लिए उपकेंद्र का बनना जरूरी है।
शुक्रवार को पावर कॉरपोरेशन के एमडी पंकज कुमार ने निरीक्षण कर इसकी समीक्षा की थी और तेजी से बनाने के निर्देश दिए थे। दूसरी ओर रात में काम तेज करने के लिए कैंट स्टेशन से काशी विद्यापीठ तक पिलर पर हाईमास्ट लाइटों को लगाने का काम भी तेज कर दिया गया ताकि रात के समय काम किया जा सके।