{"_id":"5a848c2c4f1c1bff388b8210","slug":"robertsganj-lok-sabha-seat-will-be-unchanged-for-reservation","type":"story","status":"publish","title_hn":"कयासों पर लगा विराम, नहीं बदलेगा राबर्ट्सगंज लोस सीट का आरक्षण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कयासों पर लगा विराम, नहीं बदलेगा राबर्ट्सगंज लोस सीट का आरक्षण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Thu, 15 Feb 2018 02:26 PM IST
विज्ञापन
चुनाव आयोग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट के आरक्षण में बदलाव के लगाए जा रहे कयासों पर विराम लग गया है। पिछले विधानसभा चुनाव से पूर्व ओबरा और दुद्धी विधानसभा सीट के अनुसूचित जनजाति होने के बाद लोकसभा सीट में भी परिवर्तन के कयास लग रहे थे। निर्वाचन आयोग के अवर सचिव वीडी अरोड़ा ने लोकसभा सीट के परिवर्तन संबंधी किसी भी तरह के प्रस्ताव से इनकार किया है।
राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट दशकों से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछले कुछ वर्षों से इस सीट के आरक्षण में परिवर्तन होने के कयास लगाए जा रहे थे। यह कयासबाजी तब शुरू हुई, जब जिले की दो विधानसभा सीटों के आरक्षण में परिवर्तन हुआ। पहले जिले में राबर्ट्सगंज और दुद्धी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। जबकि घोरावल का आंशिक हिस्सा राजगढ़ विधानसभा में था और यह सीट सामान्य वर्ग के लिए थी।
लेकिन वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारत निर्वाचन आयोग ने नए सिरे से परिसीमन किया। इसमें जिले में राबर्ट्सगंज, दुद्धी के अलावा ओबरा और घोरावल दो नई सीटें बन गईं। इसमें राबर्ट्सगंज, घोरावल और ओबरा सामान्य वर्ग के लिए थीं, जबकि दुद्धी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। फिर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले और एक परिवर्तन हुआ।
विज्ञापन
इस बार निर्वाचन आयोग ने ओबरा और दुद्धी विधानसभा सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया। इसी के बाद से राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट के आरक्षण में परिवर्तन के भी कयास लगाए जाने लगे।
लेकिन भारत निर्वाचन आयोग के अवर सचिव वीडी अरोड़ा ने एक पत्र में स्पष्ट किया है कि मौजूदा कानून के तहत आयोग के पास राबर्ट्सगंज (अजा) लोकसभा सीट सहित किसी भी विधानसभा, लोकसभा क्षेत्र की स्थिति को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
उन्होंने यह पत्र भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व में लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे अशोक कुमार कन्नौजिया को भेजा है। कन्नौजिया ने आयोग को इस संबंध में पत्र भेजा था।
विज्ञापन
राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट दशकों से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछले कुछ वर्षों से इस सीट के आरक्षण में परिवर्तन होने के कयास लगाए जा रहे थे। यह कयासबाजी तब शुरू हुई, जब जिले की दो विधानसभा सीटों के आरक्षण में परिवर्तन हुआ। पहले जिले में राबर्ट्सगंज और दुद्धी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। जबकि घोरावल का आंशिक हिस्सा राजगढ़ विधानसभा में था और यह सीट सामान्य वर्ग के लिए थी।
विज्ञापन
लेकिन वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारत निर्वाचन आयोग ने नए सिरे से परिसीमन किया। इसमें जिले में राबर्ट्सगंज, दुद्धी के अलावा ओबरा और घोरावल दो नई सीटें बन गईं। इसमें राबर्ट्सगंज, घोरावल और ओबरा सामान्य वर्ग के लिए थीं, जबकि दुद्धी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। फिर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले और एक परिवर्तन हुआ।
विज्ञापन
इस बार निर्वाचन आयोग ने ओबरा और दुद्धी विधानसभा सीट को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया। इसी के बाद से राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट के आरक्षण में परिवर्तन के भी कयास लगाए जाने लगे।
लेकिन भारत निर्वाचन आयोग के अवर सचिव वीडी अरोड़ा ने एक पत्र में स्पष्ट किया है कि मौजूदा कानून के तहत आयोग के पास राबर्ट्सगंज (अजा) लोकसभा सीट सहित किसी भी विधानसभा, लोकसभा क्षेत्र की स्थिति को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
उन्होंने यह पत्र भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व में लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी रहे अशोक कुमार कन्नौजिया को भेजा है। कन्नौजिया ने आयोग को इस संबंध में पत्र भेजा था।