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रोडवेज बसों में आग से बचाव के नहीं है समुचित इंतजाम
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रोडवेज की बसों में सफर करना इस समय खतरे से खाली नहीं है। अधिकतर एसी और साधारण बसों में आग से बचाव को लेकर अग्निशमन यंत्र नदारद है। वहीं जिन बसों में अग्निशमन यंत्र रखे भी गए हैं तो वह इतने सामानों के भार से दबे हुए हैं कि आग लगने की स्थिति में निकालना मुश्किल होगा। वाराणसी परिक्षेत्र में संचालित होने वाली परिवहन निगम की बसों में आग से बचाव की समुचित व्यवस्था नहीं है। सोमवार को ककरमत्ता में जनरथ एसी बस में भी अग्निशमन यंत्र रखा हुआ था लेकिन इतने सामानों से दबा हुआ था कि चालक और परिचालक को निकालने का मौका तक नहीं मिला।
सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के लिए बसों को 13 प्रकार से जांचकर वर्कशॉप से निकाला जाता है, जिसमें बसों की हेडलाइट, बैकलाइट, ब्रेक, हार्न, बैटरी और इसमें अग्निशमन यंत्र और आपात दरवाजों की भी जांच होती है। जिसकी सही तरह से जांच न होने से ऐसी दुर्घटनाएं घटती हैं। लापरवाही की हद तब होती है जब प्रशासन के आलाधिकारियों भी इससे वाकिफ होने के बाद भी अंजान बने रहते हैं। वर्कशाप में बसों की मरम्मत तो की जाती है लेकिन सामान के अभाव में जुगाड़ के तरीके से बसों में पार्ट्स लगाए जाते हैं। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक केके तिवारी ने बताया कि सभी बसों में अग्निशमन यंत्र को दुरूस्त कराया जा रहा है। जिन बसों में नहीं है, उनमें जल्द ही लगाया जाएगा। वहीं जनरथ एसी बस में आग लगने के प्रकरण में जांच की जा ही है। तकनीकी दल अपनी जांच कर रही है।
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सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने के लिए बसों को 13 प्रकार से जांचकर वर्कशॉप से निकाला जाता है, जिसमें बसों की हेडलाइट, बैकलाइट, ब्रेक, हार्न, बैटरी और इसमें अग्निशमन यंत्र और आपात दरवाजों की भी जांच होती है। जिसकी सही तरह से जांच न होने से ऐसी दुर्घटनाएं घटती हैं। लापरवाही की हद तब होती है जब प्रशासन के आलाधिकारियों भी इससे वाकिफ होने के बाद भी अंजान बने रहते हैं। वर्कशाप में बसों की मरम्मत तो की जाती है लेकिन सामान के अभाव में जुगाड़ के तरीके से बसों में पार्ट्स लगाए जाते हैं। इस संबंध में क्षेत्रीय प्रबंधक केके तिवारी ने बताया कि सभी बसों में अग्निशमन यंत्र को दुरूस्त कराया जा रहा है। जिन बसों में नहीं है, उनमें जल्द ही लगाया जाएगा। वहीं जनरथ एसी बस में आग लगने के प्रकरण में जांच की जा ही है। तकनीकी दल अपनी जांच कर रही है।
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