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UP: मौसम बदलने से हाइपरथर्मिया का खतरा बढ़ा, चिल्ड्रेन वार्ड में आधे से अधिक बच्चे बीमारी से ग्रसित; परेशानी

Wed, 16 Apr 2025 02:03 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Wed, 16 Apr 2025 02:03 PM IST
सार

Health News: अस्पतालों के चिल्ड्रेन वार्ड में बच्चों संख्या अधिक हो रही है। अधिकतर हाइपरथर्मिया के शिकार हो रहे हैं। चिकित्सकों ने बदलते माैसम से बचने की अपील की है।

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Risk of hyperthermia increased due change in weather in varanasi children ward suffering from disease
मंडलीय अस्पताल में मरीजों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Hyperthermia: दो दिन पहले हवा में नमी रहने के बाद अब तेज धूप ने बच्चों में हाइपरथर्मिया की आशंका बढ़ा दी है। बीएचयू अस्पताल के बाल रोग विभाग के साथ ही मंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल में रोजाना करीब 100 बच्चे बुखार की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।

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सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में बच्चे बुखार, सांस फूलने की जैसी समस्याएं लेकर आ रहे हैं। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में 20 बेड वाले चिल्ड्रन वार्ड में भी इन दिनों 5 से 15 साल तक के करीब 10 बच्चे भर्ती हैं। डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि तेज बुखार के साथ बेचैनी, दिल की धड़कन तेज होना इस बीमारी के लक्षण हैं।
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बीएचयू अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रो. सुनील राव के अनुसार ओपीडी के साथ ही इमरजेंसी में मौसम बदलने से बच्चों को बुखार, पेट संबंधी समस्या लेकर लोग पहुंच रहे हैं। इसमें अभिभावकों को बच्चों को धूप से बचाने की सलाह दी जा रही है। 

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बाल रोग विशेषज्ञ और अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि गर्मी के मौसम में हाइपरथर्मिया की आशंका ज्यादा रहती है। हाइपरथर्मिया में शरीर का तापमान नॉर्मल टेंपरेचर से ज्यादा बढ़ जाता है। 

बड़ों की तुलना में बच्चों में ये समस्या ज्यादा होती है क्योंकि बीमारी से लड़ने की क्षमता बहुत कम होती है। ऐसे में शरीर के तापमान को बनाए रखने के लिए बच्चों को हाइड्रेट रखना चाहिए। उधर, जिला अस्पताल में बाल रोग विभाग की ओपीडी में भी इस तरह की समस्या लेकर 15-20 बच्चे रोजाना आ रहे हैं। 

अस्पतालों में बने चिल्ड्रन वार्ड में डॉक्टरों से भर्ती बच्चों की सेहत पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है। गंभीर समस्या होने पर बीएचयू में रेफर करने पर वहां डॉक्टरों से समन्वय स्थापित कर बच्चों को भर्ती करवाया जाएगा। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ

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