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कुंभाभिषेक से दमका संकटमोचन का दरबार

Tue, 12 Apr 2016 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 12 Apr 2016 02:18 AM IST
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Restoration of the palace from the asthmatics kumbhabhiseka
संकटमोचन मंदिर के शिखर की आभा नए कलेवर में।
काशी में जग विख्यात संकट मोचन मंदिर के शिखर की आभा नए कलेवर से सोमवार को दमक उठी। संकट मोचन हनुमान के प्राचीन शिखर के जीर्णोद्धार के बाद वैदिक विद्वानों ने वेद मंत्रों की सस्वर गूंज के बीच कुंभाभिषेक की महापूजा कराई। 36 अभिमंत्रित कलशों से शिखर का अभिषेक हुआ। संकट मोचन के दरबार में पंचमहाभूतों के आवाहन से प्रकृति की प्रतिष्ठापना जाने माने वेद विद्वानों ने कराई। मान्यता के अनुसार कुंभाभिषेक के दौरान विग्रह में नए सिरे से शक्ति मंत्रों के जरिए प्रतिष्ठापित की जाती है। अनुष्ठान पूरा होने के बाद अब भक्तों की सुनवाई के लिए, मन के दुख निकालने के लिए संकट मोचन के द्वार खोल दिए गए।    
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अरसा बाद संकट मोचन हनुमान मंदिर के कुंभाभिषेक की लंबी प्रक्रिया रविवार की शाम 3:30 बजे काशी के प्रतिष्ठित वेद विद्वानों के आचार्यत्व में शुरू हुई। जीर्णोद्धार के संकल्प के बाद गणपति की विधि विधान से पूजा हुई। इसके बाद कलश आवाहन किया गया। इस दौरान वेद मंत्रों से 36 कलशों को अभिमंत्रित किया गया। पांच कलश शिखर के लिए और पांच संकट मोचन हनुमान के लिए अभिमंत्रित किए गए। इसके बाद पंच महाभूतों क्षिति, जल,पावक, गगन समीरा का आवाहन किया गया।
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प्रसिद्ध वैदिक आचार्य पं. अनंत भट्ट संकट मोचन के शिखर विधान को विग्रह की तरह नए सिरे से प्रतिष्ठापित कराया गया, ताकि ईश्वर की शक्ति विग्रह में पुनर्स्थापित हो सके। जिस तरह नए मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान नियमों का पालन किया जाता है उसी तरह वास्तु शांति, नवग्रह शांति के बाद पांच प्रकार के हवन कराए गए। गणपति हवन, नवग्रह हवन, वास्तु हवन, सुदर्शन हवन के बाद संकट मोचन के विग्रह के लिए विशेष पवमान हवन किया गया। क्षेत्रपाल पूजा के बाद पूर्णाहुति की गई। 
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महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि संकट मोचन हनुमान के खंडित हुए शिखर की आठ साल पहले मरम्मत कराई गई थी लेकिन काम बहुत बाकी रह गया था। इसलिए कुंभाभिषेक कराने का निर्णय लिया गया। अब हनुमान जी नए कलेवर में भक्तों की बातें सुनेंगे और बिगड़ा काम बना देंगे।
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