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BHU: अमेरिका, रूस, नेपाल व मलेशिया के शोधार्थियों ने पढ़े 180 शोध पत्र; पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर चर्चा

Sun, 18 Jan 2026 01:42 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 18 Jan 2026 01:42 PM IST
सार

Varanasi News: बीएचयू में जनसंचार बनाम सोशल मीडिया की पैनल चर्चा हुई। युवाओं और शिक्षाविद ने सोशल मीडिया के मुद्दों को लेकर गहनता से विमर्श किया। कुछ समस्याओं के समाधान भी बताए गए।

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Researchers from USA, Russia, Nepal and Malaysia presented 180 research papers in bhu
बीएचयू कैंपस में जाती छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया ने ऐसे कई मुद्दे सामने लाए जो अब तक मुख्यधारा मीडिया से दूर थे लेकिन रील संस्कृति के चलते क्वालिटी कंटेंट में सतहीपन बढ़ गया है। 30 सेकेंड से एक मिनट में सब कुछ देखने की लालसा ने गुणवत्ता से समझौता करा दिया है।

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आज कंटेंट क्रिएशन का उद्देश्य केवल यूजर को कुछ सेकंड के लिए स्क्रीन पर रोकना है। ये बातें बीएचयू में इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. केजी सुरेश ने कहीं। पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की ओर से सोशल मीडिया के युग में पत्रकारिता और जनसंचार में बदलते रुझान विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शनिवार को जनसंचार बनाम सोशल मीडिया की पैनल चर्चा हुई। इसमें अमेरिका, रूस, नेपाल और मलेशिया के शोधार्थियों ने 180 शोध पत्र पढ़े। इस दौरान वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रिंट मीडिया आज भी बेहद शक्तिशाली माध्यम है। 
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प्रो. सुरेश ने चिंता जताई कि आज का युवा वर्ग गंभीर समाचार पत्रों से कटकर रील संस्कृति में उलझ गया है। बॉयसी यूनिवर्सिटी, अमेरिका की डॉ. इरीना बाबिक ने कहा कि डिजिटल मीडिया में विश्वसनीयता और तथ्यात्मकता बनाए रखना चुनौती बन गई है। 
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लोमोनोसोव मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी, रूस की डॉ. अन्ना ग्लैडकोवा ने कहा कि सोशल मीडिया में एल्गोरिद्म आधारित कंटेंट के कारण समाज में ध्रुवीकरण बढ़ रहा है। विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानप्रकाश मिश्र ने सभी वक्ताओं को अंगवस्त्रम्, पुष्पगुच्छ व स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। संचालन आयोजक सचिव डॉ बाला लखेंद्र ने किया। 

कंटेट से ज्यादा व्यूज और मोनेटाइजेशन पर ध्यान
प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि आज पॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की गुणवत्ता से ज्यादा व्यूज और मोनेटाइजेशन पर ध्यान दिया जा रहा है। इससे पत्रकारिता व्यक्ति-केंद्रित होती जा रही है। प्रो. सुरेश ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में आज भी उत्कृष्ट शोधपरक लेखन हो रहा है लेकिन पाठकों की संख्या घटती जा रही है। 

यूट्यूब पत्रकारिता में जिम्मेदारी का अभाव
शिक्षाविद पूर्व कुलपति प्रो. केवी नागराज ने कहा कि सोशल मीडिया आज मोबोक्रेसी का रूप लेता जा रहा है। यूट्यूब पत्रकारिता में जिम्मेदारी और जवाबदेही का अभाव है। उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज से जो श्रेष्ठ है, उसे लिजिए। 

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