फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Researchers discovered three unique descendants of fungus, will be a boon for heart patients

BHU Research: शोधकर्ताओं ने खोजे कवक के तीन अनोखे वंशज, हृदय रोगियों के लिए होगा वरदान

Sat, 25 Mar 2023 10:36 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sat, 25 Mar 2023 10:36 AM IST
सार

बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डाॅ. राघवेन्द्र सिंह एवं उनकी शोधकर्ताओं की यह खोज पूरे विश्व के लिए अहम है। इस वर्ग के हायलाइन कवकों द्वारा रूबेलिन मेटाबोलाइट्स (हृदय रोग के लिए एक दवा) का उत्पादन करने की क्षमता पाई जाती है। इस पर शोध भी चल रहा है।

विज्ञापन
Researchers discovered three unique descendants of fungus, will be a boon for heart patients
बीएचयू में रिसर्च। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं की टीम ने कवक के तीन अनोखे वंशजों की खोज की है। कवक के यह नए जींस नियोएसर्वूलीसेप्टोरिया, नियोसरकोस्पोरेला और नियोरेमुलेरियोप्सिस हैं। यह शोध कार्य जर्मनी की जर्मन माइकोलॉजिकल सोसायटी की प्रतिष्ठित पत्रिका माइकोलॉजिकल प्रोग्रेस में प्रकाशित हुआ है। बीएचयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक डाॅ. राघवेन्द्र सिंह एवं उनकी शोधकर्ताओं की यह खोज पूरे विश्व के लिए अहम है। इस वर्ग के हायलाइन कवकों द्वारा रूबेलिन मेटाबोलाइट्स (हृदय रोग के लिए एक दवा) का उत्पादन करने की क्षमता पाई जाती है। इस पर शोध भी चल रहा है। इससे पता चलता है कि यह समूह जैव तकनीकी के क्षेत्र में एवं फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज में कार्य करने वाले वैज्ञानिक के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

विज्ञापन

Researchers discovered three unique descendants of fungus, will be a boon for heart patients
बीएचयू ने किया शोध। - फोटो : अमर उजाला

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार यदि जैव विविधता की पहचान और संरक्षण के लिए समर्पित प्रयास नहीं किए गए तो मानव जाति के समक्ष ऐसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है, जहां जीवों के तमाम प्रकार की जातियां एवं प्रजातियां गुमनाम एवं हमेशा के लिए विलुप्त हो सकती हैं। इन कवकों को दिसंबर 2019 में मध्य प्रदेश के जंगलों से परजीवी के रूप में पेरिस्ट्रोपी बायिकलकुलटा नामक पौधे से प्राप्त किया गया था।
इन कवकों की पहचान नए वंश (जींस) के रूप में की गई है। प्रयोगशाला में इस कवक का गहन अध्ययन करने के पश्चात इस नई वंश के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा की गई। यह खोज आधुनिक मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एवं इलेक्ट्राॅन मिक्रेस्कोपिक तकनीक का उपयोग करके हुई है। बीएचयू की यह खोज विविध प्रजातियों के संरक्षण में मददगार मानी जा रही है। शोधकर्ताओं की टीम में संजीत कुमार वर्मा, संजय यादव, गार्गी सिंह (दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर) एवं डाॅ. प्रकाश कुशवाहा (सहायक प्राध्यापक- माधव राव शासकीय महाविद्यालय, पथरिया, दमोह, म.प्र.) शामिल हैं। 

जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है दुनिया
शोधकर्ताओं की मानें तो इस समय पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है। वर्ल्ड वाइड फंड फार नेचर की लिविंग प्लैनेट रिपोर्ट 2022 के अनुसार, 1970 और 2018 के बीच दुनिया भर में निगरानी की जाने वाली वन्यजीव आबादी में 69 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। बीएचयू की यह खोज विविध प्रजातियों के संरक्षण में मददगार होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed