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वाराणसी में रेमडेसिविर की किल्लत दूर, नहीं रुकेगा इलाज
Mon, 12 Apr 2021 04:30 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Mon, 12 Apr 2021 04:30 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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वाराणसी में रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत अब दूर हो गई है। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की पहल पर उसे कोविड हास्पिटलों में भिजवाया जा रहा है। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि एक निजी कंपनी के माध्यम से बीएचयू, दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल और कोरोना के अधिकृत निजी अस्पतालों में रेमडेसिविर इंजेक्शन भिजवा दिया गया है।
पिछले तीन चार दिनों से इस इंजेक्शन की किल्लत बनी थी, जिस वजह से मरीजों का इलाज भी प्रभावित हो रहा था। जिलाधिकारी ने बताया कि जो भी मरीज इसे प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें फिलहाल अस्पताल के माध्यम से ही हर दिन की डोज के हिसाब से इंजेक्शन मिलेगा। यह सुविधा केवल कोविड असप्ताल में ही है और नान कोविड असप्ताल और डॉक्टर के क्लीनिक पर नहीं है। जिलाधिकारी ने बताया कि 2 दिन बाद और भारी मात्रा में इंजेक्शन मिलने के बाद सभी अस्पतालों को इसे उपलब्ध कराया जाएगा।
10 प्रतिशत से कम मरीजों को ही पड़ती है जरूरत
जिलाधिकारी ने बताया कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति में 10 प्रतिशत से भी कम मरीजों में इस इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। यदि मरीज समय से लक्षण आते ही एंटीबायोटिक दवा और डॉक्सीसाइक्लिन का पांच दिन का कोर्स शुरू कर देता है इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती है।
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पिछले तीन चार दिनों से इस इंजेक्शन की किल्लत बनी थी, जिस वजह से मरीजों का इलाज भी प्रभावित हो रहा था। जिलाधिकारी ने बताया कि जो भी मरीज इसे प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें फिलहाल अस्पताल के माध्यम से ही हर दिन की डोज के हिसाब से इंजेक्शन मिलेगा। यह सुविधा केवल कोविड असप्ताल में ही है और नान कोविड असप्ताल और डॉक्टर के क्लीनिक पर नहीं है। जिलाधिकारी ने बताया कि 2 दिन बाद और भारी मात्रा में इंजेक्शन मिलने के बाद सभी अस्पतालों को इसे उपलब्ध कराया जाएगा।
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10 प्रतिशत से कम मरीजों को ही पड़ती है जरूरत
जिलाधिकारी ने बताया कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति में 10 प्रतिशत से भी कम मरीजों में इस इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। यदि मरीज समय से लक्षण आते ही एंटीबायोटिक दवा और डॉक्सीसाइक्लिन का पांच दिन का कोर्स शुरू कर देता है इसकी आवश्यकता नहीं पड़ती है।
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