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जीएसटी भुगतान में व्यापारियों को राहत, नेट टैक्स पर देना होगा ब्याज
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जीएसटी के अंतर्गत कर के देरी से भुगतान पर अब नेट टैक्स पर ब्याज लिया जाएगा। बजट में लाए गए प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार ने यह राहत दी है। इससे शहर के 30 हजार व्यापारियों को राहत मिलेगी। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के पदाधिकारियों की रविवार को हुई बैठक में यह जानकारी दी गई।
प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने कहा कि एक फरवरी को आए बजट में जीएसटी में सेक्शन 50 (1) में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, इसमें यदि कोई व्यापारी अपना रिटर्न देरी से भरता है तो उससे अब नेट लाइबिलिटी पर ब्याज लिया जाएगा। अभी तक देरी से रिटर्न भरने पर ब्याज की गढ़ना ग्रॉस पर की जाती थी, लेकिन अब ब्याज उसी अवस्था में लिया जाएगा, जबकि व्यापारी चालान के माध्यम से टैक्स जमा करता है। उन्होंने बताया कि यह नियम 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा व्यापारी को यह होगा कि यदि उसने रिटर्न लेट भरा है पर उस कर दायित्व नहीं है तो उस पर ब्याज की देनदारी नहीं होगी।
कैट पूर्वांचल प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने कहा कि कैट की मांग पर यह निर्णय लॉकडाउन के दौरान ही जीएसटी काउंसिल ने ले लिया था, लेकिन सरकार के द्वारा इसे क़ानूनी जामा नहीं पहनाया गया था। अब बजट में इसे क़ानूनी रूप दे देने से बनारस के लगभग 30 हजार व्यापारियों को राहत होगी। वहीं कैट जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर गुप्ता ने कहा कि सरकार को धारा 35 (4) को भी समाप्त कर देना चाहिए।
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प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने कहा कि एक फरवरी को आए बजट में जीएसटी में सेक्शन 50 (1) में एक नया प्रावधान जोड़ा गया है, इसमें यदि कोई व्यापारी अपना रिटर्न देरी से भरता है तो उससे अब नेट लाइबिलिटी पर ब्याज लिया जाएगा। अभी तक देरी से रिटर्न भरने पर ब्याज की गढ़ना ग्रॉस पर की जाती थी, लेकिन अब ब्याज उसी अवस्था में लिया जाएगा, जबकि व्यापारी चालान के माध्यम से टैक्स जमा करता है। उन्होंने बताया कि यह नियम 1 जुलाई 2017 से लागू किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा व्यापारी को यह होगा कि यदि उसने रिटर्न लेट भरा है पर उस कर दायित्व नहीं है तो उस पर ब्याज की देनदारी नहीं होगी।
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कैट पूर्वांचल प्रभारी अखिलेश मिश्रा ने कहा कि कैट की मांग पर यह निर्णय लॉकडाउन के दौरान ही जीएसटी काउंसिल ने ले लिया था, लेकिन सरकार के द्वारा इसे क़ानूनी जामा नहीं पहनाया गया था। अब बजट में इसे क़ानूनी रूप दे देने से बनारस के लगभग 30 हजार व्यापारियों को राहत होगी। वहीं कैट जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर गुप्ता ने कहा कि सरकार को धारा 35 (4) को भी समाप्त कर देना चाहिए।
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