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जनकपुर पहुंचे राम, स्वागत में फूलों की बारिश
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 01 Oct 2015 02:13 AM IST
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भाई लक्ष्मण के साथ भगवान श्रीराम जनकपुर की गलियों से होकर गुजरे तो हर तरफ से पुष्पवर्षा होने लगी। हर कोई घर के बाहर आकर उनकी सुंदर छवि को निहारने में लगा रहा। हर तरफ दोनों भाई की चर्चा हो रही थी। इसके बाद गुरु की आज्ञा लेकर फूल लेने बागीचे में आते हैं, ठीक इसी समय सखियों के साथ जानकी की भी वहां पहुंचती हैं। रामनगर की रामलीला में बुधवार को जनकपुर दर्शन, अष्ट-सखी संवाद, फुलवारी का मंचन देखने वालों की भीड़ लगी रही।
रामलीला के चौथे दिन 36 वी वाहिनी पीएसी के ठीक सामने जनकपुर मंदिर के परिसर में लीला का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम भाई लक्ष्मण के साथ जनकपुर देखने की लालसा में गुरु से आज्ञा लेकर निकलते हैं। यहां गलियों में उनको देख हर तरफ चर्चा होने लगी। इसके बाद फुलवारी मंचन की लीला शुरू होती है। प्रात: मुर्गे की बोली सुनकर पहले लक्ष्मण उठते हैं और फिर राम को जगाते हैं। गुरु को प्रणाम कर फूल लेने बागीचे में जाते हैं ठीक उसी समय सखियों सहित गिरिजा पूजा के लिए जानकी भी पहुंचती हैं। गीत गाती हुई सखियां जानकी को चारो ओर से घेरे चली जाती है। इधर श्रीराम को देख सुकुचाई जानकी एक बार फिर उनकी सांवली सूरत देखने की लालसा सखियों से व्यक्त करती हैं। इसके बाद सीताजी ने विधिवत गिरिजा जी का पूजन किया। गिरिजा जी सीता जी की वाणी सुन प्रसन्न हो गई। तभी आकाशवाणी होती है हे जानकी हमारी सत्यवाणी सुनी, तुम्हारी हर मनोकामना पूरी होगी। जिसमें तुम्हारा मन लगा है वहीं वर मिलेगा। गौरी जी का आशीर्वाद पाकर खुश सीता जी राजमहल चली गई। संध्या वंदना के बाद प्रभु श्रीराम लक्ष्मण के साथ गुरु के समीप आकर प्रणाम करते हैं। इसी के साथ बुधवार की लीला को विश्राम दिया गया।
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रामलीला में आज
रामनगर-धुनष यज्ञ, परशुराम-संवाद।
जाल्हूपुर-धुनष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद।
भोजुबीर-रावण-जन्म, देव स्तुति, विष्णु भगवान की झांकी, आकाशवाणी।
शिवपुर-नगर दर्शन, अष्ट सखी संवाद, फुलवारी।
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रामलीला के चौथे दिन 36 वी वाहिनी पीएसी के ठीक सामने जनकपुर मंदिर के परिसर में लीला का मंचन हुआ। भगवान श्रीराम भाई लक्ष्मण के साथ जनकपुर देखने की लालसा में गुरु से आज्ञा लेकर निकलते हैं। यहां गलियों में उनको देख हर तरफ चर्चा होने लगी। इसके बाद फुलवारी मंचन की लीला शुरू होती है। प्रात: मुर्गे की बोली सुनकर पहले लक्ष्मण उठते हैं और फिर राम को जगाते हैं। गुरु को प्रणाम कर फूल लेने बागीचे में जाते हैं ठीक उसी समय सखियों सहित गिरिजा पूजा के लिए जानकी भी पहुंचती हैं। गीत गाती हुई सखियां जानकी को चारो ओर से घेरे चली जाती है। इधर श्रीराम को देख सुकुचाई जानकी एक बार फिर उनकी सांवली सूरत देखने की लालसा सखियों से व्यक्त करती हैं। इसके बाद सीताजी ने विधिवत गिरिजा जी का पूजन किया। गिरिजा जी सीता जी की वाणी सुन प्रसन्न हो गई। तभी आकाशवाणी होती है हे जानकी हमारी सत्यवाणी सुनी, तुम्हारी हर मनोकामना पूरी होगी। जिसमें तुम्हारा मन लगा है वहीं वर मिलेगा। गौरी जी का आशीर्वाद पाकर खुश सीता जी राजमहल चली गई। संध्या वंदना के बाद प्रभु श्रीराम लक्ष्मण के साथ गुरु के समीप आकर प्रणाम करते हैं। इसी के साथ बुधवार की लीला को विश्राम दिया गया।
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रामलीला में आज
रामनगर-धुनष यज्ञ, परशुराम-संवाद।
जाल्हूपुर-धुनष यज्ञ, लक्ष्मण-परशुराम संवाद।
भोजुबीर-रावण-जन्म, देव स्तुति, विष्णु भगवान की झांकी, आकाशवाणी।
शिवपुर-नगर दर्शन, अष्ट सखी संवाद, फुलवारी।