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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Ratneshwar Mahadev: This temple is tilted on one side for three hundred years, neither devotees go here

रत्नेश्वर महादेव: तीन सौ साल से एक तरफ झुका हुआ है ये मंदिर, सावन में यहां न भक्त जाते हैं, न होती है पूजा

Fri, 07 Jul 2023 01:36 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Fri, 07 Jul 2023 01:36 PM IST
सार

मणिकर्णिका घाट के पास दत्तात्रेय घाट पर स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर रत्नेश्वर महादेव तीन सौ सालों से अधिक का इतिहास समेटे हुए हैं और लोगों के लिए आश्चर्य का केंद्र भी है। मंदिर लगभग तीन सौ साल से एक तरफ झुका हुआ है छह महीने तक पानी में डूबा रहता है।

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Ratneshwar Mahadev: This temple is tilted on one side for three hundred years, neither devotees go here
रत्नेश्वर महादेव का मंदिर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कण-कण शिव की नगरी काशी में वैसे तो सब कुछ महादेव की मंशा व कृपा से संचालित होता है। सावन में शिव नगरी की छटा ही निराली होती है। बाबा विश्वनाथ के धाम सहित शहर के सभी शिवालयों में बोल बम का जयकारा होता है, अभिषेक, पूजन और अर्चन होता लेकिन वहीं एक मंदिर ऐसा भी है जहां ना तो बोल बम का जयकारा गूंजता है और ना ही घंटा और घड़ियाल।

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गंगा की तलहटी में दत्तात्रेय घाट पर विराजमान रत्नेश्वर महादेव का मंदिर लोकोक्ति, कहावतों और कहानियों को समेटे हुए काशी के एक नए दर्शन का साक्षात्कार कराता है। सावन के महीने में जहां शिव मंदिर भक्तों से गुलजार रहता है वहीं इस मंदिर में ना तो भक्त जाते हैं और ना ही पूजा होती है। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण सावन के महीने में यह मंदिर जलमग्न रहता है। मणिकर्णिका घाट के पास दत्तात्रेय घाट पर स्थित ऐतिहासिक शिव मंदिर रत्नेश्वर महादेव तीन सौ सालों से अधिक का इतिहास समेटे हुए हैं और लोगों के लिए आश्चर्य का केंद्र भी है। मंदिर लगभग तीन सौ साल से एक तरफ झुका हुआ है छह महीने तक पानी में डूबा रहता है। बाढ़ के दिनों में 40 फीट से ऊंचे इस मंदिर के शिखर तक पानी पहुंच जाता है। बाढ़ के बाद मंदिर के अंदर सिल्ट जमा हो जाता है। मंदिर टेढ़ा होने के बावजूद ये आज भी कैसे खड़ा है, इसका रहस्य कोई नहीं जानता है।

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Ratneshwar Mahadev: This temple is tilted on one side for three hundred years, neither devotees go here
रत्नेश्वर महादेव मंदिर। - फोटो : सोशल मीडिया।

ये है मंदिर की प्रचलित कथाएं

मंदिर का इतिहास भी बेहद दिलचस्प बताया जाता है। इस मंदिर के निर्माण बारे में भिन्न-भिन्न कथाएं कही जाती हैं। डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि रत्नेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना राजमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर की दासी रत्नाबाई ने करवाया था। आधार कमजोर होने के कारण कालांतर में यह मंदिर एक ओर झुक गया, जो अपने आप में अनोखा है। गर्भगृह में एक या दो नहीं बल्कि, कई शिवलिंग स्थापित हैं। इसे शिव की लघु कचहरी भी कहा जाता है। कई लोग तीर्थ यात्रियों और श्रद्धालुओं को इसे काशी करवट बताकर मूर्ख बनाते हैं। जबकि काशी करवट मंदिर कचौड़ी गली में है।

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