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जज्बे को सलाम: काशी की रंजना ने एशियाई यूथ गेम्स में जीता पदक, कैंसर से मां को खो दिया था; सालभर की मेहनत

Sat, 25 Oct 2025 01:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 25 Oct 2025 01:19 PM IST
सार

Sports News: बनारस के लूठाकलां गांव की रहने वाली रंजना ने बहरीन में खेले जा रहे एशियाई यूथ गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया। उनके पदक जीतने की जानकारी मिलते ही गांव में जश्न का माहाैल बन गया।

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Ranjana yadav from varanasi won medal at Asian Youth Games lost mother to cancer year of hard work
रंजना यादव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Asia Youth Games 2025: बहरीन में खेली गई एशियाई यूथ गेम्स में लूठाकलां निवासी रंजना यादव के पदक जीतने पर ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर और आतिशबाजी कर दीपावली की तरह जश्न मनाया। रंजना यादव ने कैंसर रोग से पीड़ित अपनी मां को खो दिया था, लेकिन उन्होंने मां से किया वादा निभाया और अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में रजत पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया। 

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यह खबर मिलते ही ग्रामीणों ने भारत का परचम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराने वाली रंजना के परिजनों को मिठाई खिलाई और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। चौबेपुर के लूठा गांव की रंजना ने एथलेटिक्स की पांच किलोमीटर वॉक रेस में रजत पदक जीतकर देश, प्रदेश और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। 
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उनके पिता किसान हैं। उनकी मां उर्मिला देवी का निधन गत वर्ष हुआ था। पांच भाई-बहनों में रंजना सबसे छोटी हैं। उनके बड़े पापा भोला यादव और दादा दीनानाथ यादव ने रंजना की इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त की है।

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रंजना के गांव में जश्न

रंजना ने यह सफलता अंडर-16 आयु वर्ग में हासिल की है। वह वर्तमान में भोपाल में रहकर इंटरमीडिएट की पढ़ाई के साथ-साथ एथलेटिक्स की तैयारी कर रही हैं। उनकी खेल यात्रा की शुरुआत अंडर-12 आयु वर्ग से हुई थी, जब उन्होंने वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में कोच चंद्रभान यादव की देखरेख में प्रशिक्षण लेना शुरू किया।

रंजना ने 13 अक्तूबर को ओडिशा में आयोजित प्रतियोगिता की छह किलोमीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था। उनके पिता राजकुमार यादव पिछले 35 वर्षों से गुजरात के मेहसाणा में दूध ट्रक ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं। बेटी की इस सफलता की खबर सुनकर उन्होंने भावुक होकर कहा, मेरी बेटी ने हमारे सपनों को हकीकत में बदल दिया है। 

अब उसका अगला लक्ष्य गोल्ड मेडल है। गांव में रंजना की इस उपलब्धि से खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों और परिजनों ने ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाइयां बांटकर इस ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया। लोगों ने कहा कि रंजना ने यह साबित कर दिया है कि अगर गांव की बेटियां ठान लें, तो वे भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं।

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