आजादी के दीवाने: रामनरेश ने दरोगा को पटककर उसकी छाती पर रख दिया था पैर, शहीद हुए थे पांच क्रांतिकारी
Independence Day 2024: काशी के इतिहास में ऐसा बहुत कुछ छिपा हुआ है, जिसके बारे में अधिकतर लोगों को नहीं पता है। ऐसा ही एक पन्ना है काशी के दालमंडी की तवायफों का। आजादी की लड़ाई में इन तवायफों का योगदान अविस्मरणीय है। दालमंडी की ये तवायफें ऐसी थीं जिन्होंने देश की आजादी की लड़ाई बहादुरी से लड़ीं।
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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा...। जनपद का एकमात्र शहीद स्थल चोलापुर शहीद स्मारक...। 17 अगस्त 1942 को हुए पांच शूरवीरों की शहादत की स्मृतियां यहां आज भी जीवंत हैं।
17 अगस्त 1942 में चोलापुर क्षेत्र के आयर गांव में नाग पंचमी पर क्षेत्र के पहलवान दंगल में जोर आजमाइश कर रहे थे। अखाड़े में वीर बहादुर सिंह हाथ में तिरंगा लेकर पहुंचे और पहलवानों को ललकारते हुए कहा, हे शूरवीरों जंजीरों से जकड़ी धरती मां को छुड़ाने का प्रयास करो। जिस मिट्टी पर जोर आजमाइश कर रहे हो, वो धरती मां परतंत्रता की जंजीरों से जकड़ी हुई हैं।
वीर बहादुर सिंह के आह्वान पर राम नरेश उपाध्याय उर्फ विद्यार्थी, पंचम, श्रीराम उर्फ बच्चू, चौथी और निरहू के साथ कई लोग चोलापुर थाने पर तिरंगा फहराने के लिए चल पड़े। हजारों लोग इनके साथ हो लिए।
चोलापुर थाने पर पहुंचकर स्व. बीरबहादुर सिंह ने झंडा फहराने का प्रयास किया। जिस पर तात्कालिक दरोगा रामचंद्र सिंह ने विरोध किया। रामनरेश उर्फ विद्यार्थी दरोगा रामचंद्र सिंह से भिड़ गए और उन्हें उठाकर जोरदार पटखनी देकर उसकी छाती पर पैर रख दिया। इतना देखते ही रामचंद्र के भतीजे ने रिवाॅल्वर से रामनरेश उर्फ विद्यार्थी को कनपटी पर गोली मार दी। जिससे वे मौके पर ही शहीद हो गए।
मौजूद उच्चाधिकारियों ने भीड़ पर फायरिंग का आदेश दे दिया। फायरिंग में पंचम, श्रीराम उर्फ बच्चू, चौथी एवं निरहू मौके पर ही शहीद हो गए। बहादुर सिंह को गिरफ्तार कर अंग्रेज बनारस ले गए। उन पर मुकदमा चला और सात साल सश्रम कारावास की सजा हुई।
छोड़ दिया था गहने पहनना
स्वाधीनता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दालमंडी की गुमनाम तवायफ राजेश्वरी बाई, जद्दन बाई से लेकर रसूलन बाई तक का जिक्र न करें तो आजादी की लड़ाई का इतिहास अधूरा रह जाएगा। रसूलन बाई ने खतरा मोल लेकर अंग्रेजों के खिलाफ खड़े हिंदुस्तानी देशभक्तों का सहयोग किया। ब्रिटिश हुकूमत ने रसूलन बाई को काफी प्रताड़ित भी किया। इतिहास के पन्नों में जिक्र है कि रसूलन बाई ने महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित होकर गहने पहनना छोड़ दिया था। उन्होंने गहने तभी पहने, जब देश आजाद हो गया।
तवायफ ने बचाया था आजाद को
एक बार ब्रिटिश पुलिस हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के चंद्रशेखर आजाद, शचींद्र नाथ सान्याल और उनके एक साथी के पीछे थी। तीनों क्रांतिकारी भागते-भागते हुस्ना बाई के कोठे पर पहुंच गए। उन्होंने हुस्ना बाई से शरण मांगी। हुस्ना बाई ने बिना हिचके, बिना किसी परिणाम की चिंता किए दोनों को कमरे में छिपा दिया। इसके बाद पुलिस को बाहर से ही विदा कर दिया।
बाद में जब तीनों क्रांतिकारी सुरक्षित निकल गए और बाद में पुलिस को इस बात की जानकारी हुई तो हुस्ना बाई को प्रताड़ित किया गया। हुस्ना बाई का कहना था धंधा तो सिर्फ मेरा है मगर ये बच्चे देश के हैं, आजादी के परवानों को हम कैसे मरने देते?
अखंड भारत के संकल्पों से गूंजा कोना-कोना
वाराणसी। स्वतंत्रता दिवस के एक दिन पूर्व बजरंग दल ने अखंड भारत संकल्प दिवस मनाया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने अखंड भारत की रंगोली बनाकर विभाजन की विभीषिका बयां की। साथ ही अखंड भारत के निर्माण का संकल्प लिया।
विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल काशी प्रांत के कार्यकर्ता सारनाथ स्थित महाराजा सुहेलदेव पार्क में एकत्र हुए। यहां अखंड भारत की मनमोहक रंगोली को दीपों से सजाकर वंदे मातरम का सामूहिक गायन किया। बजरंग दल के युवा नेता निखिल त्रिपाठी के नेतृत्व में सैकड़ों युवाओं ने सारनाथ से भारत माता मंदिर तक बाइक रैली निकाली।
मुख्य अतिथि बजरंगदल काशी प्रांत के संयोजक सत्यप्रताप सिंह रहे। विशिष्ट अतिथि विहिप उत्तर काशी के अध्यक्ष राजेश मिश्रा एडवोकेट रहे। अध्यक्षता डॉ. अनुपम तिवारी ने की। इस मौके पर फागु राजभर, धर्मेंद्र पांडेय, दीपक सोनकर, शुभम त्रिपाठी, विजयशंकर उपाध्याय आदि रहे।
तुलसीदास और नंददास को किया नमन
गोस्वामी तुलसीदास और नंददास की की जयंती समारोह बुधवार को चौखंभा स्थित गोपाल मंदिर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। वक्ताओं ने उनके जीवन-दर्शन को रेखांकित किया। कहा, तुलसीदास ने इसी स्थान पर विनय पत्रिका और और भ्रमण गीत की रचना की।
मुकुंदगोपाल सेवा संस्थान व भारत भारती परिषद की ओर से आयोजित समारोह की शुरुआत षष्ठपीठाधीश्वर गोस्वामी श्याममनोहर महाराज ने श्रीनाथ जी की छवि पर ने माल्यार्पण कर किया। मुख्य अतिथि डॉ. उदय प्रताप सिंह, साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह, श्याम मनोहर महाराज ने अपने विचार रखे। स्वागत अशोक वल्लभ अग्रवाल व अरुण पारिख और संचालन वृजकिशोर ने किया। इस मौके पर जयंती लाल शाह, दीपेश चौधरी, अतुल शाह आदि माैजूद रहे।