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Varanasi News: बिना हाथी के हुई रामनगर की रामलीला, विजयदशमी पर रहेंगे दो हाथी
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चौका घाट पर चित्रकूट रामलीला में भगवान राम लक्ष्मण श्री हनुमान की की हुई आरती। अमर उजाला
रामनगर। रामनगर की रामलीला में सोमवार को बिना हाथियों के ही लीला हुई। रविवार को हाथी के बिदकने के बाद तीनों हाथियों को लीला में शामिल नहीं किया गया। रामलीला के 23वें दिन रविवार की स्थगित लीला के तहत श्रीराम-रावण युद्ध के प्रसंग का मंचन हुआ। लीला देखने के लिए भीड़ जुटी रही।
लीला के प्रसंगानुसार, रावण प्रतापी तो था ही, लेकिन माया रचने में भी माहिर था। जब वह युद्ध के लिए रणभूमि पहुंचा तो विभीषण श्रीराम से पूछ बैठे कि प्रभु, आपके पास न रथ है और न सारथी। आखिर आप जीतेंगे कैसे? युद्ध में अपना सब कुछ गंवाने के बाद रावण के पास खुद युद्ध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। इसलिए उसे युद्धभूमि में आना पड़ा। रावण प्रचंड योद्धा था। आते ही उसने श्रीराम की सेना को विचलित कर दिया।
रावण युद्ध के लिए आता है और अपनी सेना से कहता है कि लड़ाई से जिसका मन हट गया हो, वह अभी भाग जाए। लड़ाई के मैदान से भागने में भलाई नहीं है। मैंने अपनी भुजाओं के बल पर बैर बढ़ाया है। इसका जवाब भी मैं स्वयं दूंगा। उसके आगे बढ़ते ही कई अपशकुन होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज कर वह आगे बढ़ता है। दोनों सेनाओं के साथ ही राम और रावण के बीच युद्ध होने लगता है। राम को पैदल युद्ध करते देख विभीषण उनसे कहते हैं कि आप कैसे विजय प्राप्त करेंगे? तब राम उनसे कहते हैं कि शौर्य और धैर्य रथ के पहिए हैं। सत्य, शील और दृढ़ता ध्वजा-पताका हैं। ज्ञान, बल, इंद्रियों को जीतना और परोपकार रथ के घोड़े हैं, जो क्षमा और दया रूपी रस्सी से जुड़े हैं। ईश्वर का भजन उस रथ का सारथी है। वैराग्य रूपी ढाल, संतोष रूपी तलवार, दान रूपी फरसा और बुद्धि रूपी धनुष है। निर्मल और अचल मन तरकस है। नियम-संयम तीर हैं। ब्राह्मण और गुरु की पूजा कवच है। इसी उपाय से विजय प्राप्त करूंगा।
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रावण के प्रहार से वानर-भालू व्याकुल हो उठे। यह देखकर लक्ष्मण को क्रोध आ गया और वे रावण से लड़ने के लिए चल पड़े। उन्हें देखकर रावण कहता है कि तूने मेरे पुत्र का नाश किया है। आज तुझे मारकर अपनी छाती ठंडी करूंगा। वह लक्ष्मण पर बाणों की वर्षा करता है, जिन्हें लक्ष्मण काट देते हैं। वे अपने बाणों से रावण के रथ को काट देते हैं। रावण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ता है। मूर्छा दूर होने पर वह लक्ष्मण पर ब्रह्मा की दी हुई प्रचंड शक्ति का प्रयोग करता है, जिससे लक्ष्मण विकल होकर गिर पड़ते हैं। रावण उन्हें उठाने लगता है, लेकिन वे उससे उठते नहीं हैं। यह देखकर हनुमान रावण को एक घूंसा मारते हैं, जिससे वह मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ता है। मूर्छा दूर होने पर वह हनुमान के बल की प्रशंसा करता है। राम लक्ष्मण से कहते हैं कि हृदय में यह समझो कि तुम देवताओं की रक्षा करने वाले और काल को भी निगल जाने वाले हो। लक्ष्मण तुरंत उठकर रावण का रथ नष्ट कर देते हैं। हमले में रावण फिर मूर्छित हो जाता है। सारथी उसे उठाकर लंका भवन ले जाता है। मूर्छा दूर होने पर वह यज्ञ करने चला जाता है। आरती के साथ लीला को विराम दिया गया। मंगलवार को विजयादशमी की लीला में दो हाथी शामिल होंगे।
जेल में लक्ष्मण मूर्छा और अहिरावण वध की लीला
शिवपुर। केंद्रीय कारागार में रामलीला के नौवें दिन लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग के बाद अहिरावण वध की लीला हुई। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म, सत्य और सदाचार का संदेश दिया गया। लीला के दौरान जब रावण को लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त होने की जानकारी मिलती है, तो वह अपने भाई कुंभकर्ण को जगाकर युद्ध के लिए भेजता है। इसके बाद मेघनाद युद्धभूमि में आता है, लेकिन श्रीराम और लक्ष्मण के हाथों उसका वध हो जाता है। इसके बाद रावण अपने पुत्र अहिरावण का आह्वान करता है। मंगलवार को विजयादशमी की लीला के साथ रामलीला का समापन हो जाएगा। लीला में वरिष्ठ जेल अधीक्षक श्री राधाकृष्ण मिश्र, दिल्ली के आचार्य मधुर दास महाराज आदि मौजूद रहे। संवाद
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लीला के प्रसंगानुसार, रावण प्रतापी तो था ही, लेकिन माया रचने में भी माहिर था। जब वह युद्ध के लिए रणभूमि पहुंचा तो विभीषण श्रीराम से पूछ बैठे कि प्रभु, आपके पास न रथ है और न सारथी। आखिर आप जीतेंगे कैसे? युद्ध में अपना सब कुछ गंवाने के बाद रावण के पास खुद युद्ध करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। इसलिए उसे युद्धभूमि में आना पड़ा। रावण प्रचंड योद्धा था। आते ही उसने श्रीराम की सेना को विचलित कर दिया।
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रावण युद्ध के लिए आता है और अपनी सेना से कहता है कि लड़ाई से जिसका मन हट गया हो, वह अभी भाग जाए। लड़ाई के मैदान से भागने में भलाई नहीं है। मैंने अपनी भुजाओं के बल पर बैर बढ़ाया है। इसका जवाब भी मैं स्वयं दूंगा। उसके आगे बढ़ते ही कई अपशकुन होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज कर वह आगे बढ़ता है। दोनों सेनाओं के साथ ही राम और रावण के बीच युद्ध होने लगता है। राम को पैदल युद्ध करते देख विभीषण उनसे कहते हैं कि आप कैसे विजय प्राप्त करेंगे? तब राम उनसे कहते हैं कि शौर्य और धैर्य रथ के पहिए हैं। सत्य, शील और दृढ़ता ध्वजा-पताका हैं। ज्ञान, बल, इंद्रियों को जीतना और परोपकार रथ के घोड़े हैं, जो क्षमा और दया रूपी रस्सी से जुड़े हैं। ईश्वर का भजन उस रथ का सारथी है। वैराग्य रूपी ढाल, संतोष रूपी तलवार, दान रूपी फरसा और बुद्धि रूपी धनुष है। निर्मल और अचल मन तरकस है। नियम-संयम तीर हैं। ब्राह्मण और गुरु की पूजा कवच है। इसी उपाय से विजय प्राप्त करूंगा।
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रावण के प्रहार से वानर-भालू व्याकुल हो उठे। यह देखकर लक्ष्मण को क्रोध आ गया और वे रावण से लड़ने के लिए चल पड़े। उन्हें देखकर रावण कहता है कि तूने मेरे पुत्र का नाश किया है। आज तुझे मारकर अपनी छाती ठंडी करूंगा। वह लक्ष्मण पर बाणों की वर्षा करता है, जिन्हें लक्ष्मण काट देते हैं। वे अपने बाणों से रावण के रथ को काट देते हैं। रावण मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ता है। मूर्छा दूर होने पर वह लक्ष्मण पर ब्रह्मा की दी हुई प्रचंड शक्ति का प्रयोग करता है, जिससे लक्ष्मण विकल होकर गिर पड़ते हैं। रावण उन्हें उठाने लगता है, लेकिन वे उससे उठते नहीं हैं। यह देखकर हनुमान रावण को एक घूंसा मारते हैं, जिससे वह मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़ता है। मूर्छा दूर होने पर वह हनुमान के बल की प्रशंसा करता है। राम लक्ष्मण से कहते हैं कि हृदय में यह समझो कि तुम देवताओं की रक्षा करने वाले और काल को भी निगल जाने वाले हो। लक्ष्मण तुरंत उठकर रावण का रथ नष्ट कर देते हैं। हमले में रावण फिर मूर्छित हो जाता है। सारथी उसे उठाकर लंका भवन ले जाता है। मूर्छा दूर होने पर वह यज्ञ करने चला जाता है। आरती के साथ लीला को विराम दिया गया। मंगलवार को विजयादशमी की लीला में दो हाथी शामिल होंगे।
जेल में लक्ष्मण मूर्छा और अहिरावण वध की लीला
शिवपुर। केंद्रीय कारागार में रामलीला के नौवें दिन लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग के बाद अहिरावण वध की लीला हुई। रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, धर्म, सत्य और सदाचार का संदेश दिया गया। लीला के दौरान जब रावण को लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त होने की जानकारी मिलती है, तो वह अपने भाई कुंभकर्ण को जगाकर युद्ध के लिए भेजता है। इसके बाद मेघनाद युद्धभूमि में आता है, लेकिन श्रीराम और लक्ष्मण के हाथों उसका वध हो जाता है। इसके बाद रावण अपने पुत्र अहिरावण का आह्वान करता है। मंगलवार को विजयादशमी की लीला के साथ रामलीला का समापन हो जाएगा। लीला में वरिष्ठ जेल अधीक्षक श्री राधाकृष्ण मिश्र, दिल्ली के आचार्य मधुर दास महाराज आदि मौजूद रहे। संवाद