रामनगर की रामलीला: मारे गए मेघनाद कुंभकरण, दहाड़ें मारकर रोया रावण; भक्तों ने लगाए श्रीराम के जयकारे
वाराणसी के रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला में मेघनाद और कुंभकरण के वध का प्रसंग मंचित किया गया। दोनों के मारे जाने पर रावण दहाड़ें मारकर रोया। इस दौरान लीला स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। रामलीला के इस भावुक प्रसंग को देखने के लिए बड़ी संख्या में भक्त जुटे। पूरा परिसर रामभक्ति और धार्मिक उत्साह से गूंज उठा।
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जब विपत्ति आती है तो आदमी की मति पहले ही गुम हो जाती है और वह गलत पर गलत करने लगता है। रावण के साथ भी यही हुआ। अहंकार के दानव ने उसे इतना आकंठ घेर लिया कि वह प्रभु श्रीराम से ही बैर ले बैठा। मंदोदरी, विभीषण और यहां तक कि कुंभकरण ने भी समझाया, लेकिन विनाशकाले विपरीत बुद्धि। वह सब कुछ खो बैठा। भाई, बंधु, कुटुंब, रिश्तेदार, नातेदार किसी की नहीं सुनी। हाल यह हुआ कि उसे दहाड़ें मारकर रोने की नौबत आई तो कभी मूर्छित होकर गिर पड़ा।
रामलीला के तेइसवें दिन शनिवार को रावण के दूत बताते हैं कि लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त हो गई है। अपनी सेना की पराजय देखकर रावण अपने भाई कुंभकरण को अनेक उपाय करके नींद से जगाता है। कुंभकरण रावण की उदासी का कारण पूछता है तो रावण उसे पूरी कहानी बताता है।
इस पर कुंभकरण भी उसे धिक्कारते हुए कहता है कि अभी भी अभिमान छोड़कर राम को भजो, तभी भला होगा। तुमने मुझे जगाकर अच्छा नहीं किया। आओ, अब आखिरी बार गले मिल लूं। अब समय नहीं है। वह युद्ध के लिए रणभूमि में पहुंचता है। उसका विशालकाय शरीर देखकर वानर और भालू व्याकुल हो उठते हैं। सेना को व्याकुल देखकर राम स्वयं कुंभकरण से युद्ध करते हैं और उसका वध कर देते हैं।
रावण को दुखी देखकर उसका पुत्र मेघनाद उसे दिलासा देकर युद्ध के लिए रथ पर चढ़कर आकाश मार्ग से रणभूमि में पहुंचता है। मेघनाद राम को नागपाश में बांध देता है। तब नारद के निवेदन पर गरुड़ राम को नागपाश से मुक्त कराते हैं। इसके बाद राम बाण मारकर मेघनाद को मूर्छित कर देते हैं। मूर्छा टूटने पर वह यज्ञ करने चला जाता है। विभीषण राम को बताते हैं कि यदि उसका यज्ञ पूरा हो जाएगा तो उसे जल्दी मारा नहीं जा सकेगा। हनुमान उसका शव लंका के द्वार पर रखकर आते हैं। मेघनाद का शव देखकर रावण मूर्छित हो जाता है। मूर्छा टूटने पर वह मंदोदरी से कहता है कि यह संसार नाशवान है।
सीता की खोज और लंका दहन : शिवपुर स्थित केंद्रीय कारागार में रामलीला के सातवें दिन सीता की खोज और लंका दहन की लीला हुई। साथ ही भगवान श्रीराम, सुग्रीव, अंगद और हनुमान जी से जुड़े प्रसंगों की लीला हुई। सुग्रीव ने भगवान श्रीराम को बताया कि बालि के भय से वह इस स्थान पर छिपकर रहते हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम बालि का वध कर सुग्रीव को किष्किंधा का राजा तथा अंगद को युवराज बनाते हैं।
एसडीएम ने जमीन पर बैठकर देखी रामलीला
राजातालाब क्षेत्र के रानी बाजार में विजयादशमी से पहले रामलीला का शुभारंभ हुआ। उप जिलाधिकारी शांतनु कुमार ने शनिवार को दीप प्रज्ज्वलित कर रामलीला की शुरुआत की। उन्होंने प्रभु राम के चरणों में प्रणाम किया और जमीन पर बैठकर रामलीला देखी। उन्होंने कहा कि श्रीराम हमारे मर्यादा पुरुष हैं। यदि समाज उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर ध्यान दे तो वर्तमान समाज में शांति स्थापित हो जाएगी।